Uttarakhand News 30Oct2025

जौंदला में बाघ ने व्यक्ति को बनाया शिकार, वन विभाग ने बढ़ाई सुरक्षा इंतजाम

Uttarakhand News 30Oct2025

Uttarakhand News 30Oct2025/sbkinews.in

उत्तराखंड के जौंदला क्षेत्र में एक भयावह घटना हुई है, जहां बाघ ने एक व्यक्ति को शिकार बना लिया। यह घटना इलाके में तबाही और दहशत का कारण बन गई है। मृत व्यक्ति की लाश देखकर वन विभाग के अधिकारी भी कांप उठे। उन्होंने现场 का बारीकी से निरीक्षण किया और घटना की गंभीरता को समझा।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जौंदला वन क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ रही है, जिसके कारण मानव-वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। इस मामले में मृतक की पहचान कर ली गई है और पुलिस तथा वन विभाग मिलकर जांच कर रहे हैं कि घटना कैसे हुई।

क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से कदम बढ़ाए गए हैं। वन विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए आसपास के गांवों के लोगों को जागरूक किया है कि वे सावधानी बरतें और वन क्षेत्र में जाने से बचें। साथ ही, बाघ नियंत्रण दल भी तैनात किया गया है ताकि ऐसी और घटनाओं को रोका जा सके।

स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि वे बाघ और मानव के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के प्रयास करेंगे। साथ ही पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता दी जाएगी।

इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है। वन विभाग की टीम लगातार जंगलों में गश्त बढ़ा रही है ताकि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो।

उत्तराखंड में चीन सीमा के करीब पहुंची सड़क, भारत के लिए क्यों है यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण

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उत्तराखंड में भारत-चीन सीमा क्षेत्र पर एक अहम उपलब्धि दर्ज की गई है। सीमा सड़कों के निर्माण में जुटी बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने सुमना-लपथल से टोपीडुंगा तक सड़क कटिंग का कार्य पूरा कर लिया है। यह मार्ग चमोली जिले के अत्यंत दुर्गम और संवेदनशील इलाके में स्थित है, जहां अब तक पहुंचना अत्यंत कठिन था। इस सड़क की लंबाई करीब 69.69 किलोमीटर है, जो अब पूरी तरह से कनेक्ट हो चुकी है।

पहले इस क्षेत्र में आवाजाही केवल पैदल मार्गों से होती थी, जिससे सेना की तैनाती और आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति में काफी कठिनाइयां आती थीं। लेकिन अब इस सड़क के निर्माण से न केवल सैनिकों की आवाजाही सरल हुई है, बल्कि सीमांत गांवों के लोगों को भी राहत मिलेगी। सड़क तैयार होने से भारत की सामरिक स्थिति और मजबूत हो जाएगी क्योंकि यह इलाका चीन की सीमा से बेहद नजदीक है।

गौरतलब है कि चीनी सेना इस क्षेत्र में कई बार घुसपैठ की कोशिश कर चुकी है। ऐसे में इस मार्ग का निर्माण भारतीय सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। सड़क के जरिए अब सीमावर्ती चौकियों तक तेज़ी से पहुंचा जा सकेगा, जिससे किसी भी आकस्मिक स्थिति में भारतीय सेना को मजबूत जवाबी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

इस परियोजना को लेकर रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बीआरओ की यह पहल “सुरक्षित सीमा, सक्षम भारत” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल भारत की सीमाओं को अधिक सुरक्षित बनाएगी, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।

उत्तराखंड परिवहन महासंघ के चक्का जाम का गढ़वाल मंडल में असर, बस-टैक्सी रूट ठप, यात्रियों की परेशानी बढ़ी

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उत्तराखंड में परिवहन महासंघ द्वारा किए गए चक्का जाम का गढ़वाल मंडल के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर बड़ा प्रभाव पड़ा। इस आंदोलन के कारण मंडल के प्रमुख रूटों पर बसों और टैक्सियों का संचालन पूरी तरह से ठप हो गया। गढ़वाल के विभिन्न इलाकों में जहां लोग अपने दैनिक कामकाज और जरूरी यात्रा के लिए परिवहन सेवा पर निर्भर थे, वहां फंसे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

चक्का जाम के चलते लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अन्य विकल्प खोजने को मजबूर हुए, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई। कई यात्रियों ने सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के बंद होने से उत्पन्न हुई असुविधा और फजीहत को अनुभव किया। इसके अलावा कई व्यक्ति काम, पढ़ाई और अन्य जरूरी कार्यों में भी प्रभावित हुए।

परिवहन महासंघ ने अपने चक्का जाम की वजह से सरकारी और निजी बस ऑपरेटर्स के बीच चल रहे विवाद को समाप्त करने के लिए यह कदम उठाया है। उनका कहना है कि लंबित मांगों को सरकार गंभीरता से नहीं ले रही, जिसके चलते उन्होंने यह आंदोलन शुरू किया है।

इस जाम ने न केवल यात्री आवाजाही को बाधित किया, बल्कि स्थानीय व्यापार भी प्रभावित हुआ। हालात तब और खराब हो गए जब यात्रियों और ऑपरेटर्स के बीच टकराव की खबरें आने लगीं।

परिवहन सेवा जल्द सामान्य करने की मांग के साथ, यात्रियों और स्थानीय प्रशासन ने जल्द समाधान की उम्मीद जताई है ताकि गढ़वाल मंडल की आवाजाही फिर से सुचारू रूप से चल सके।

उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर विरोध: हल्द्वानी में जबरन मीटर बदलने का आरोप, कर्मियों को लौटाया

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उत्तराखंड के हल्द्वानी में ऊर्जा निगम द्वारा स्मार्ट मीटर लगाने के प्रयास का स्थानीय लोगों ने विरोध किया है। राजेंद्र नगर के निवासियों ने आरोप लगाया कि मीटर जबरन बदले जा रहे हैं, जबकि पुराने मीटर सही से काम कर रहे थे। लोगों ने इस कार्रवाई को सरकारी धन की बर्बादी बताते हुए संबंधित कर्मियों को लौटा दिया। इस विरोध के पीछे यह भी शिकायत है कि नए स्मार्ट मीटर लगाने के बाद बिजली के बिलों में वृद्धि हुई है, जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पार्षद प्रीति आर्या ने इसे गंभीर मुद्दा बताया और कहा कि यह प्रक्रिया बिना किसी उचित जानकारी के शुरू की गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत साहू ने कहा कि ऊर्जा निगम को चाहिए कि वे स्मार्ट मीटर के फायदों को स्पष्ट करें और जनता का विश्वास हासिल करें। वर्तमान में, उपभोक्ताओं में नई तकनीक को लेकर पर्याप्त जानकारी और भरोसा नहीं है, इसलिए उनका विरोध स्वाभाविक है। स्मार्ट मीटर लगाने में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं को सही जानकारी देना आवश्यक है ताकि उनकी चिंताएं दूर की जा सकें।

यह घटना दर्शाती है कि तकनीकी बदलाव के साथ जनता की सहमति और विश्वास भी जरूरी है। ऊर्जा विभाग को उपभोक्ताओं के हित में कारगर कदम उठाने होंगे ताकि स्मार्ट मीटर योजना सफल हो सके और जनता की समस्याओं का समाधान हो सके।

उत्तराखंड में मटर की आवक घटी, मंडी में दाम बढ़े

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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से मंडियों में मटर की आवक में काफी कमी आई है, जिससे बाजार में सस्ती और ताजी मटर की कमी महसूस हो रही है। पहाड़ों में उत्पादन कम होने के कारण स्थानीय मटर की आपूर्ति लगभग न के बराबर है। इस कमी की भरपाई के लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश से मटर मंगवानी पड़ रही है, जिसकी वजह से मंडी में मटर के दामों में इजाफा हुआ है।

स्थानीय किसानों के उत्पादन में गिरावट और बाहरी राज्यों से मटर की आवक बढ़ने से बाजार में मटर की कीमतें बढ़ गई हैं। बाजार में दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है क्योंकि मटर दैनिक उपयोग की एक महत्वपूर्ण सब्जी है। इसके अलावा, ट्रांसपोर्ट की बढ़ती लागत और मौसम की वजह से भी दाम बढ़ने में योगदान मिला है।

व्यापारी इस बढ़े दाम को अस्थायी मानते हैं और उम्मीद करते हैं कि जल्द ही फसल आने पर मटर की आपूर्ति फिर से सामान्य हो जाएगी, जिससे कीमतें स्थिर हो सकेंगी। हालांकि, फिलहाल उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है ताकि आने वाले समय में ऐसी किल्लतों से बचा जा सके। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और किसानों को भी बेहतर मुनाफा होगा।

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