Uttarakhand News 03Nov2025

उत्तराखंड के 25 वर्षों में शहरी विकास का विस्तार, पर्यटन और संस्कृति को नया आयाम

Uttarakhand News 03Nov2025

Uttarakhand News 03Nov2025/sbkinews.in

उत्तराखंड के राज्य बनने के बाद से शहरी विकास में तेज़ी आई है, जहां शहरों की संख्या 63 से बढ़कर 110 तक पहुंच गई है। इस विस्तार ने प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा दी है।

पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास ने रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन उद्योग ने स्थानीय जनता की आय में वृद्धि की है, जिससे उनकी जीवनशैली में सुधार हुआ है।

पिछले दशक में उत्तराखंड में शहरीकरण की दर 30.2% रही है, जो दर्शाता है कि अधिक लोग शहरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस कारण से शहरों में अत्याधुनिक सुविधाओं, स्मार्ट शहर परियोजनाओं और बेहतर आवासीय योजनाओं को लागू किया जा रहा है।

भविष्य के लिए ग्रीन सिटी के विकास की योजना भी तैयार है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए स्थायी और स्वच्छ शहरी जीवन की आधारशिला रखी जाएगी। इस दिशा में काशीपुर में एक बड़े सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विशेषज्ञ और नीति निर्माता इस पर चर्चा करेंगे।

परियोजना में स्वच्छता, नवीकरणीय ऊर्जा, पानी प्रबंधन और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस पहल से उत्तराखंड की शहरी जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा और पर्यावरणीय प्रभाव कम होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विकास मॉडल न केवल प्रदेश के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेगा, जहां सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता के साथ आधुनिकता का संतुलन सिद्ध हो सकेगा।

उत्तराखंड में जंगलों की आग से जंग: बड़े पर्दे पर दिखेगा ‘शीतलाखेत मॉडल’

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उत्तराखंड के जंगलों को आग से बचाने के लिए विकसित ‘शीतलाखेत मॉडल’ पर आधारित फिल्म जल्द बड़े पर्दे पर दिखाई जाएगी‘डीएफओ डायरी: फायर वारियर’। यह फिल्म जंगलों को बचाने के लिए स्थानीय लोगों और वन विभाग के संयुक्त प्रयासों की सच्ची कहानी दर्शाती है।

फिल्म में दो दशकों से स्याहीदेवी-शीतलाखेत क्षेत्र में वनाग्नि से लड़ने के संघर्ष को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें वन विभाग के आईएफएस अधिकारी बीजू लाल और कई स्थानीय कलाकार प्रमुख भूमिका में हैं।

‘शीतलाखेत मॉडल’ के तहत स्थानीय ग्रामवासियों, वन विभाग और स्वयंसेवकों की मिलीजुली टीम बनाई गई है जो आग लगने पर तत्काल प्रतिक्रिया देती है। इस मॉडल में फायर लाइन निर्माण, आग की शुरुआती सूचना प्रणाली, और जनजागरूकता अभियानों से वनाग्नि नियंत्रण को मजबूती मिली है।

उत्तराखंड के साथ ही यह मॉडल अब पूरे देश के लिए वनाग्नि नियंत्रण की प्रेरणा बन रहा है। फिल्म में वन्य जीवों और वन संपदा की सुरक्षा के लिए हो रही गतिविधियां और संघर्ष को भी दिखाया गया है।

‘शीतलाखेत मॉडल’ न केवल जंगल सुरक्षा का उपकरण है, बल्कि स्थानीय लोगों में पर्यावरण संरक्षण की भावना भी बढ़ाता है। फिल्म को उत्तराखंड सहित उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, ओडिशा और झारखंड में रिलीज किया जाएगा।

यह फिल्म लोगों को जंगलों के महत्व और हमें उनसे कैसे जुड़े रहना चाहिए, इस विषय पर जागरूक करने का भी प्रयास करती है। ‘शीतलाखेत मॉडल’ ऐसे वन क्षेत्र की सुरक्षा की मिसाल है, जहां समुदाय की भागीदारी से आग पर नियंत्रण पाया गया है।

राजाजी टाइगर रिजर्व के चीला जोन में मानसून का जख्म, सफारी ट्रैक का हिस्सा भूस्खलन में ढहा

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राजाजी टाइगर रिजर्व 15 नवंबर 2025 को पुनः खुलने की तैयारी कर रहा है, लेकिन इसके प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक चीला जोन का वृत्ताकार सफारी ट्रैक मानसून के दौरान हुए भूस्खलन से प्रभावित हो गया है। मानसून में भू-स्खलन के चलते ट्रैक का लगभग 200 मीटर लंबा हिस्सा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है, जिससे रिजर्व को लगभग एक करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

ट्रैक की मरम्मत कार्य जारी है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार वृत्ताकार सफारी ट्रैक की अनुमति जारी होने में अभी संशय बरकरार है। फिलहाल पर्यटक केवल चीला से हिल टॉप तक की सफारी का आनंद ले पाएंगे।

भू-स्खलन ने ट्रैक के आसपास के क्षेत्र में भी भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे वन विभाग की चुनौतियां और बढ़ गई हैं। अधिकारियों ने इस स्थिति को लेकर पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन प्रबंधन के लिए विशेष प्रबंध करने की बात कही है।

वन्यजीव पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने आगाह किया है कि पर्यटक अपने दौरे की योजना बनाते समय इस बदलाव को ध्यान में रखें।

राजाजी टाइगर रिजर्व में पर्यावरणीय सुरक्षा और पर्यटन स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र ही ट्रैक पुनर्निर्माण के लिए संसाधन लगाने की तैयारी की जा रही है। वन विभाग स्थानीय समुदायों के सहयोग से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है।

पर्यटन प्रेमियों के लिए अपेक्षा है कि शीघ्र ही पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू सफारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे प्राकृतिक सुन्दरता और वन्यजीवों का आनंद बिना बाधा के लिया जा सके।

देहरादून में चलती कार में आग, समय रहते बाहर निकलकर टला बड़ा हादसा

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देहरादून में एक चलती कार में अचानक आग लग गई, लेकिन कार सवार लोगों ने होशियारी दिखाते हुए तुरंत वाहन से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। यह घटना सुबह की बताई जा रही है जब कार सड़क पर चल रही थी।

आग लगने की तुरंत बाद परिवहन यात्री घबरा गए, लेकिन उन्होंने संयम बनाए रखा और सुरक्षित दूरी पर जाकर खुद को सुरक्षित किया। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने भी आग बुझाने में मदद की, जिससे आग को बढ़ने से रोकने में सफलता मिली।

प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि पुलिस और फायर विभाग इसकी पुष्टि करने में लगे हुए हैं। किसी तरह की जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

यह घटना एक बड़े हादसे को टालने वाली साबित हुई है, जिसमें सतर्कता और तत्काल प्रतिक्रिया की अहमियत सामने आई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

स्थानीय प्रशासन ने आग जैसे किसी भी आपात घटना से निपटने के लिए लोगों को सतर्क रहने और वाहन की नियमित जांच कराने की सलाह दी है। इसके अलावा, फायर सेफ्टी के नियमों का पालन करने की भी हिदायत दी गई है।

यह घटना सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्थिति में सही निर्णय लेने की जरूरत को दोहराती है, जिससे बड़े नुकसान से बचा जा सके।

उत्तराखंड के कुछ जिलों में 4 नवंबर को स्कूल बंद, राष्ट्रपति के कार्यक्रम के कारण

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उत्तराखंड सरकार ने 4 नवंबर को राष्ट्रपति के कार्यक्रम के कारण कुछ जिलों के स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया है। यह कदम सुरक्षा कारणों और कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए उठाया गया है।

प्रभावित जिलों में स्कूलों को एक दिन का अवकाश रहेगा, ताकि बच्चों एवं शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और कार्यक्रम में किसी प्रकार की मुश्किलें न आएं।

सरकार ने अभिभावकों और शिक्षकों से अनुरोध किया है कि वे इस आदेश का पालन करें और अपने बच्चों को स्कूल न भेजें। साथ ही स्कूल प्रशासन को कहा गया है कि वे इस सूचना को सही ढंग से सभी तक पहुंचाएं।

रक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर यह फैसला आवश्यक माना गया है, ताकि राष्ट्रपति के कार्यक्रम में कोई व्यवधान न हो और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जा सके।

अधिक जानकारी और जिलावार सूची के लिए संबंधित शिक्षा विभाग की वेबसाइट और स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है। अधिकारियों ने जनता से सहयोग का आग्रह किया है ताकि कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।

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