Uttarakhand News 12Sep2025

उत्तराखंड में आपदा से क्षतिग्रस्त 15 हजार किमी सड़कों की मरम्मत के लिए 457 करोड़ का बजट जारी, राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत केंद्र सरकार संभालेगी

Uttarakhand News 12Sep2025
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देहरादून। उत्तराखंड में हाल ही में आई भयंकर आपदा के कारण लगभग 15 हजार किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं। इन सड़कें स्थानीय प्रशासन और आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग को सड़कों की मरम्मत के लिए 457 करोड़ रुपये का विशेष बजट प्रदान किया है।

यह बजट केंद्र सरकार की आर्थिक सहायता से जारी किया गया है और इस राशि से कुल 15,535 किलोमीटर लंबी सड़क नेटवर्क की मरम्मत की जाएगी। इससे आम जनता को यातायात सुविधा जल्द बहाल होगी और आर्थिक क्रियाकलापों को मजबूती मिलेगी।

प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत के लिए अतिरिक्त बजट और जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा संभाली जाएगी। एनएचएआई के पास इससे संबंधित अलग से निधि होगी जिससे प्रमुख राजमार्गों की मरम्मत पर तेजी से काम संभव होगा।

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए संबंधित सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित हो सके।

इस योजना से न केवल सड़कों की मरम्मत होगी बल्कि क्षेत्रीय विकास और पर्यटन को भी पुनः बढ़ावा मिलेगा। सरकार और संबंधित विभागों ने तेजी से कार्य शुरू किया है ताकि प्रभावित क्षेत्रों को जल्द राहत मिल सके।

पहाड़ों में भूस्खलन और भारी बारिश की वजह से हुई खराबियों को देखते हुए तकनीकी और सुरक्षित मरम्मत कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।[संवाद स्रोत]Here is a summarized headline for your query:

उत्तराखंड में आपदा से क्षतिग्रस्त 15 हजार किमी सड़कों की मरम्मत के लिए 457 करोड़ रुपये का बजट जारी, राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत केंद्र सरकार संभालेगी।

उत्तराखंड: अनाथ बच्चों को 18 साल तक मिलेगा 4000 रुपये मासिक, 23 साल पर सरकार कराएगी 10 लाख की एफडी

Uttarakhand News 12Sep2025
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उत्तराखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा में माता-पिता खो चुके अनाथ बच्चों के लिए खास मदद का ऐलान किया है। पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत चयनित अनाथ बच्चों को 18 साल की उम्र तक हर महीने 4000 रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा, जब बच्चे 23 वर्ष के हो जाएंगे, तब उन्हें 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपोजिट (एफडी) भी सरकार की ओर से मिलेगी।

यह योजना कोविड काल में माता-पिता खो चुके अनाथ बच्चों को भी राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, अब इसे उत्तराखंड के आपदा प्रभावित बच्चों तक विस्तारित किया गया है। इससे बच्चों को न केवल आर्थिक सुरक्षा मिलेगी बल्कि शिक्षा और जीवन यापन में भी सहायता मिलेगी।

सरकार ने इस योजना के तहत बच्चों की देखभाल, स्वास्थ्य, और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि वे एक बेहतर जीवन जी सकें। चयन प्रक्रिया में बच्चों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पूर्ण आकलन किया जाएगा।

इस पहल से उत्तराखंड सरकार ने आपदा पीड़ित अनाथ बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प दिखाया है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

यह योजना उन परिवारों के लिए आशा की किरण साबित होगी जिन्होंने अपनी बेटी-बेटे को अपूरणीय क्षति झेली है। सरकार और केंद्र का यह सहयोग बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए एक मजबूत आधार बनेगा।

उत्तराखंड में नकली दवाओं पर रोक के लिए 18 नए औषधि निरीक्षकों की तैनाती, गुणवत्ता जांच सशक्त होगी

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Uttarakhand News 12Sep2025

देहरादून। उत्तराखंड के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को 18 नए औषधि निरीक्षक नियुक्त किए गए हैं, जिनकी तैनाती राज्य के विभिन्न जिलों में की जाएगी। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने एफडीए मुख्यालय का निरीक्षण करते हुए कहा कि ये निरीक्षक नकली और घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

नव नियुक्त औषधि निरीक्षक आधुनिक तकनीकों व डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस होंगे, जिससे दवाओं की गुणवत्ता जांच और अवैध बिक्री पर नियंत्रण और भी प्रभावी बनेगा। विभाग ने नकली दवाओं के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का संकल्प लिया है।

डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि अब तक 450 से अधिक मेडिकल स्टोर और मैनुअफैक्चरिंग यूनिट में जांच की जा चुकी है। 18 नए निरीक्षकों की तैनाती से फील्ड में जांच और कानूनी कार्रवाई में तेजी आएगी। इसके साथ ही अभिलेखों की एकरूपता, कोर्ट में प्रभावी पैरवी और बार-बार अपराध करने वालों की ट्रेसिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इन तैनात अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य में गुणवत्ता नियंत्रण और लोगों को सुरक्षित दवाएं उपलब्ध कराने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह पहल उत्तराखंड में ड्रग फ्री मिशन 2025 का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नशामुक्त और स्वस्थ समाज का निर्माण करना है। विभाग का लक्ष्य है जनता को सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराना।

इस नए सशक्त निरीक्षक नेटवर्क के माध्यम से उत्तराखंड में दवा व्यवस्थापन में पारदर्शिता और निगरानी की गुणवत्ता में वृद्धि होगी।

केदारावाला में गुलदार की दस्तक से बढ़ी दहशत, वन कर्मियों ने शुरू की रात्रि गश्त

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Uttarakhand News 12Sep2025

विकासनगर के केदारावाला गांव में गुलदार के आए दिन दस्तक देने से ग्रामीणों में खौफ और दहशत फैल गई है। हाल ही में गुलदार ने दो बकरियों को अपना निशाना बनाया है, जिससे पशुपालकों की चिंता और बढ़ गई है। इससे पहले भी इलाके में गुलदार की हिंसक गतिविधियां होने के चलते ग्रामीण रात भर जागकर सुरक्षा करने को मजबूर हैं।

वन विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में वन कर्मियों की रात्रि गश्त बढ़ा दी है। साथ ही, गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरों की संख्या भी बढ़ाई गई है ताकि उसके मूवमेंट को समय-समय पर मॉनिटर किया जा सके।

ग्रामीणों ने वन विभाग से गुहार लगाई है कि वे जल्द से जल्द गुलदार के आतंक से मुक्त करने के लिए उचित प्रबंध करें। उनका कहना है कि लगातार पशुओं के नुकसान और मनुष्यों को सुरक्षित महसूस न होने की स्थिति में वे अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं।

वन विभाग का कहना है कि वे सुरक्षा उपायों के अतिरिक्त वन्यजीव व्यवहार विशेषज्ञों की मदद से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल, स्थानीय लोग सतर्कता बरतने के लिए रात्रि जागरण कर रहे हैं और अपनी घरेलू सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।

यह घटना केदारावाला सहित आसपास के क्षेत्र के लिए वन्यजीव और मानव संघर्ष की एक गंभीर समस्या को प्रदर्शित करती है, जिसे नियंत्रण में लाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

ऋषिकेश में मौसम बदलाव से वायरल बुखार और डेंगू मरीजों की संख्या में वृद्धि, सरकारी अस्पताल में बेड फुल

nearly 18,000 calls for ambulances in a week over covid delhi government data
Uttarakhand News 12Sep2025

ऋषिकेश। बदलते मौसम के साथ वायरल बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे राजकीय चिकित्सालय में मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। वायरल बुखार और डेंगू के लक्षण वाले मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं, जिसके चलते यहां के बेड पूरी तरह भर गए हैं।

सरकारी अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 200 मरीजों की जांच हो रही है। खास कर बच्चों में वायरल बुखार के लक्षणों में वृद्धि देखी जा रही है, जिससे चिंताएं बढ़ गई हैं। डेंगू के संदिग्ध मामलों की जांच भी की जा रही है, हालांकि अब तक केवल दो मामलों की पुष्टि हुई है।

महामारी विभाग और स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए साफ़-सफ़ाई का विशेष ध्यान रखें। पानी जमा न होने दें और मच्छरों से बचाव के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि आवश्यक संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। आम जनता से भी आग्रह है कि वे अस्पताल का अपव्यय न करें और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लक्षण पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

यह स्थिति बदलते मौसम में वायरल और मच्छरजनित बीमारियों की बढ़ती चुनौतियों को दर्शाती है, जिसके लिए सामूहिक जागरूकता और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।

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