अदाणी पावर प्लांट शटडाउन से उत्तराखंड में बिजली संकट गहराया: उद्योग प्रभावित, रोस्टरिंग शुरू

Adani Power Plant Shutdown

 रायगढ़ अदाणी प्लांट से 350 MW बिजली रुकी। देहरादून समेत औद्योगिक क्षेत्रों में शाम को रोस्टरिंग, 18 मिलियन यूनिट की कमी।

electric power station at sunset with multiple transmission towers and electrical equipment under a vibrant blue and orange sky premium photo

उत्तराखंड में बिजली रोस्टरिंग शुरू—अदाणी रायगढ़ प्लांट शटडाउन से उद्योग ठप्प, देहरादून सड़कों पर अंधेरा।

देहरादून। अदाणी पावर प्लांट (रायगढ़) के शटडाउन से उत्तराखंड को 350 मेगावाट बिजली की आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है। इससे राज्य में बिजली संकट गहरा गया, खासकर औद्योगिक इकाइयों पर भारी असर पड़ा। पीक आवर्स में रोस्टरिंग शुरू हो गई, देहरादून समेत प्रमुख शहरों में शाम को लाइटें गुल हो रही हैं।

संकट के कारण और प्रभाव 

जनवरी से मिड-टर्म करार के तहत अदाणी समूह की रायगढ़ इकाई से 350 MW बिजली मिल रही थी, लेकिन थर्मल तकनीकी खराबी के कारण यह आपूर्ति अचानक बंद हो गई। उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने स्थिति संभालने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में रोस्टरिंग लागू की। राज्य में रोजाना 2300 MW की मांग है, जबकि पहले 7-8 मिलियन यूनिट की कमी थी—अब यह 18 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई।

देहरादून, हरिद्वार, रुड़की के औद्योगिक क्लस्टर्स सबसे प्रभावित हैं। फैक्ट्रियां आधी क्षमता पर चल रही, उत्पादन घंटों ठप्प। घरेलू उपभोक्ताओं को भी शाम 6-10 बजे बीच-बीच में कटौती झेलनी पड़ रही। UPCL ने वैकल्पिक स्रोतों से बिजली खरीदने की कोशिश की, लेकिन कीमतें ऊंची होने से चुनौती बनी हुई।

आधिकारिक बयान और उद्धरण

UPCL के डायरेक्टर (ऑपरेशन्स) एके अग्रवाल ने बताया, “तकनीकी थर्मल इश्यू से अदाणी रायगढ़ की आपूर्ति बाधित हुई। 15 मार्च 2026 तक बहाली की उम्मीद। हम रोस्टरिंग से संकट संभाल रहे।”

एक औद्योगिक संघ प्रतिनिधि ने कहा, “350 MW कमी से करोड़ों का नुकसान। सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।”

पृष्ठभूमि और संदर्भ 

उत्तराखंड ऊर्जा-निर्भर राज्य है, जहां हाइड्रो पावर पर 60% निर्भरता है। सर्दियों में जलस्तर गिरने से कमी बढ़ जाती। अदाणी के साथ जनवरी में किया मिड-टर्म एग्रीमेंट ने राहत दी थी, लेकिन प्लांट शटडाउन ने सब उलट दिया। राज्य में कुल 33 मिलियन यूनिट दैनिक जरूरत है—औद्योगिक क्षेत्र 40% खपत करता। पिछले साल भी बिजली संकट रहा, लेकिन यह अदाणी शटडाउन से सबसे गंभीर। केंद्र सरकार के पावर मिनिस्ट्री ने थर्मल प्लांट्स की मॉनिटरिंग बढ़ाई है। पर्यटन और MSME उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित, रोजगार पर खतरा।

निष्कर्ष: आगे क्या? 

अदाणी पावर प्लांट शटडाउन से उत्तराखंड बिजली संकट ने औद्योगिक विकास को झटका दिया। 15 मार्च तक बहाली संभव, लेकिन तब तक रोस्टरिंग जारी रहेगी। UPCL को सोलर/विंड जैसे वैकल्पिक स्रोत मजबूत करने चाहिए। उद्योगपति धैर्य रखें, लेकिन लंबे संकट पर विरोध की तैयारी। जल्द सामान्यीकरण जरूरी वरना आर्थिक नुकसान अरबों पहुंचेगा।

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