Baghpat News
राष्ट्र वंदना चौक पर एडीएम कोर्ट के आदेश पर दुकान खाली कराने पहुंची टीम पर एडवोकेट ने डीजल उड़ेला। आत्मदाह का प्रयास, दुकान सील, 1 युवक थाने। 59 साल से किराएदार का विवाद।
बागपत राष्ट्र वंदना चौक पर तहसीलदार पर डीजल उड़ेला एडवोकेट उमेश। दुकान खाली कराने का हंगामा, पुलिस ने सील लगाई।
बागपत: उत्तर प्रदेश के Baghpat में मंगलवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक पुराने किराया विवाद में प्रशासन की कार्रवाई के दौरान किराएदार ने तहसीलदार और पुलिस टीम पर डीजल फेंक दिया। घटना शहर के व्यस्त राष्ट्र वंदना चौक पर हुई, जहां एडीएम कोर्ट के आदेश पर दुकान खाली कराने पहुंची प्रशासनिक टीम का विरोध किया गया।
बताया जा रहा है कि किराएदार एडवोकेट उमेश कुमार ने न केवल अधिकारियों पर डीजल उंडेला, बल्कि खुद पर भी डीजल डालकर आत्मदाह की धमकी दे डाली। इस घटना से मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने स्थिति को संभालते हुए दुकान खाली कराई और तुरंत उसे सील कर दिया।
क्या हुआ उस शाम?
मंगलवार करीब शाम 4 बजे तहसीलदार अमित कुमार सिंह पुलिस बल के साथ राष्ट्र वंदना चौक पहुंचे थे। उनके पास एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीत उपाध्याय द्वारा 5 अप्रैल को जारी आदेश था, जिसमें दुकान खाली कराने का निर्देश दिया गया था।
यह दुकान शहनाज फातिमा बेगम की बताई जा रही है, जबकि इसमें कई वर्षों से किराए पर ढाबा चलाया जा रहा था। प्रशासन की टीम जैसे ही दुकान खाली कराने की कार्रवाई करने लगी, उसी समय किराएदार पक्ष ने विरोध शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इसी दौरान एडवोकेट उमेश कुमार अचानक डीजल लेकर आए और तहसीलदार, दारोगा और अन्य पुलिसकर्मियों पर उंडेल दिया। उन्होंने खुद पर भी डीजल डाल लिया और जोर-जोर से चिल्लाते हुए आत्मदाह की धमकी देने लगे।
इस घटना से वहां मौजूद पुलिसकर्मी और लोग कुछ देर के लिए सन्न रह गए। मौके पर मौजूद व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने स्थिति को शांत कराने की कोशिश की।
पुलिस और प्रशासन ने संभाला मामला
घटना के दौरान माहौल तेजी से गर्म होने लगा था। कुछ स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन से दो-तीन दिन का समय देने की मांग भी की, लेकिन अधिकारियों ने साफ कर दिया कि कोर्ट के आदेश का पालन करना अनिवार्य है।
पुलिस ने स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए सख्ती दिखाई और लाठीचार्ज की चेतावनी भी दी। इसके बाद दुकान खाली कराई गई और प्रशासनिक टीम ने मौके पर ही दुकान को सील कर दिया।
कोतवाली प्रभारी बृजेश कुमार ने बताया कि घटना के बाद एक युवक को हिरासत में लेकर थाने में पूछताछ की जा रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तहसीलदार का बयान
तहसीलदार अमित कुमार सिंह ने बताया कि कार्रवाई पूरी तरह कोर्ट के आदेश के आधार पर की गई थी। उन्होंने कहा कि इस दौरान हुए हंगामे के बाद किराएदार उमेश कुमार और उनकी पत्नी नैन्सी ने लिखित रूप से माफी भी मांगी है।
तहसीलदार के अनुसार, दोनों ने लिखित आश्वासन दिया है कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा नहीं होगी। हालांकि प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी अधिकारियों पर डीजल फेंकना गंभीर अपराध है और इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
किराएदार का पक्ष
दूसरी ओर किराएदार एडवोकेट उमेश कुमार का कहना है कि उनके परिवार का इस दुकान पर कई दशक पुराना अधिकार रहा है।
उमेश के मुताबिक उनके पिता सोमनाथ ने वर्ष 1967-68 में यह दुकान किराए पर ली थी और तब से परिवार वहीं कारोबार कर रहा था। उनका कहना है कि उस समय बिजली का कनेक्शन भी लिया गया था, जो उनके कब्जे का प्रमाण है।
उमेश का आरोप है कि पहले किराया नियमित रूप से दिया जाता था और 2013 तक मासिक किराया करीब 100 रुपये था। बाद में दुकान मालिक ने किराया लेना बंद कर दिया और मामला अदालत तक पहुंच गया।
उनका कहना है कि उन्होंने दुकान में काफी निवेश किया और ढाबा चलाकर परिवार का पालन-पोषण किया, इसलिए बिना पर्याप्त नोटिस के दुकान खाली कराना उन्हें अन्यायपूर्ण लगता है।
मालिक पक्ष की दलील
दुकान मालिक शहनाज फातिमा बेगम की ओर से बताया गया कि किराया लंबे समय से जमा नहीं किया जा रहा था और इसी वजह से मामला अदालत में गया।
मालिक पक्ष के वकील के अनुसार अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद दुकान खाली कराने का स्पष्ट आदेश दिया था। प्रशासन की कार्रवाई उसी आदेश के पालन में की गई।
अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं की जा सकती और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
बागपत में किराया विवाद नए नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्र वंदना चौक बागपत का एक प्रमुख बाजार है और यहां कई दुकानें दशकों से किराए पर चल रही हैं। पुराने किराए के समझौते और बदलते कानूनों के कारण कई बार ऐसे विवाद सामने आते रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में किराया कानूनों में बदलाव और संपत्ति के बढ़ते मूल्य के कारण मालिक और किराएदार के बीच टकराव के मामले बढ़े हैं।
जानकार बताते हैं कि जब मामलों का समाधान अदालतों में लंबे समय तक लंबित रहता है, तो दोनों पक्षों के बीच तनाव भी बढ़ जाता है।
आगे क्या हो सकता है?
इस घटना के बाद पूरे शहर में चर्चा का माहौल है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अधिकारियों पर डीजल फेंकना गंभीर अपराध है और इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
फिलहाल दुकान को सील कर दिया गया है और आगे मालिक पक्ष इसे किसी अन्य व्यक्ति को किराए पर दे सकता है। वहीं पुलिस हिरासत में लिए गए युवक से पूछताछ कर रही है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
बागपत की इस घटना ने एक बार फिर पुराने किराया विवादों और उनके समाधान की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय रहते समाधान निकाला जाए तो इस तरह की तनावपूर्ण स्थितियों से बचा जा सकता है।
प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि कोर्ट के आदेशों का सम्मान करें और किसी भी विवाद को कानून के दायरे में रहकर सुलझाएं।


