Bhakiyu Tikait Office Demolished
पिलखुवा के छिजारसी टोल प्लाजा के पास हाईवे किनारे बने भाकियू टिकैत के अस्थायी कार्यालय और चाय की दुकान को अवैध निर्माण बताते हुए प्रशासन ने बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया, जिसके बाद किसान कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
हापुड़ के लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर छिजारसी टोल प्लाजा के पास भाकियू टिकैत के अस्थायी कार्यालय पर प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद पुलिस और विरोध कर रहे किसान कार्यकर्ता।
बुलडोजर कार्रवाई के बाद बढ़ा तनाव
उत्तर प्रदेश के Hapur जिले में शुक्रवार को उस समय माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया जब प्रशासन ने लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर स्थित छिजारसी टोल प्लाजा के पास बने Bharatiya Kisan Union (टिकैत गुट) के अस्थायी कार्यालय और उससे सटी चाय की दुकान पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया।
कार्रवाई के दौरान मौके पर प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस बल और स्थानीय लोग मौजूद थे। जैसे ही यह खबर आसपास के गांवों में फैली, बड़ी संख्या में किसान कार्यकर्ता घटनास्थल पर पहुंचने लगे। कुछ ही देर में हाईवे किनारे सैकड़ों किसान इकट्ठा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई।
स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और उन्हें थाने ले जाकर समझाने की कोशिश की। इस पूरी घटना के बाद इलाके में काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा।
प्रशासन का दावा: NHAI की जमीन पर था अवैध निर्माण
प्रशासन का कहना है कि यह पूरा निर्माण National Highways Authority of India (NHAI) की जमीन पर किया गया था और इसके लिए किसी भी प्रकार की अनुमति या लाइसेंस नहीं लिया गया था।
एसडीएम Manoj Singh के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम शुक्रवार सुबह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और पहले से तैयार योजना के तहत अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान क्षेत्राधिकारी Anita Chauhan और पिलखुवा कोतवाली प्रभारी Manish Chauhan भी मौके पर मौजूद रहे।
अधिकारियों का कहना है कि इस निर्माण को लेकर पहले भी कई बार नोटिस जारी किए जा चुके थे। प्रशासन ने संबंधित लोगों से खुद ही ढांचा हटाने को कहा था, लेकिन जब ऐसा नहीं किया गया तो आखिरकार बुलडोजर चलाकर निर्माण गिराने की कार्रवाई करनी पड़ी।
कार्रवाई के दौरान कार्यालय के अंदर रखा सामान और दुकान का सामान सड़क किनारे बिखर गया, जिसे देखकर राहगीर और स्थानीय लोग भी हैरान रह गए।
किसानों का आरोप: संगठन को निशाना बनाया गया
बुलडोजर कार्रवाई के बाद Bharatiya Kisan Union के कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि यह कार्यालय कई वर्षों से किसानों की समस्याओं को सुनने और उनके मुद्दों को उठाने का केंद्र बना हुआ था।
भाकियू कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त समय दिए अचानक कार्रवाई कर दी और किसान संगठन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
किसानों का यह भी कहना है कि अगर हाईवे किनारे बने सभी निर्माण अवैध हैं, तो अन्य दुकानों और ढांचों के खिलाफ भी उसी तरह कार्रवाई होनी चाहिए। उनका आरोप है कि सिर्फ किसानों से जुड़े कार्यालय को निशाना बनाना उचित नहीं है।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने इस मामले में बातचीत नहीं की तो आगे बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है।
छिजारसी टोल प्लाजा: हमेशा रहता है व्यस्त इलाका
पिलखुवा क्षेत्र में स्थित Chhijarsi Toll Plaza लखनऊ-दिल्ली हाईवे का एक प्रमुख टोल प्वाइंट है। इस इलाके से हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं और अक्सर यहां ट्रैफिक का दबाव बना रहता है।
ऐसे इलाकों में समय के साथ छोटे-छोटे ढांचे, चाय की दुकानें और अस्थायी निर्माण खड़े हो जाते हैं, जो यात्रियों के लिए सुविधा तो बनते हैं, लेकिन प्रशासन के अनुसार ये सुरक्षा और नियमों के लिहाज से अवैध माने जाते हैं।
इसी वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण समय-समय पर हाईवे किनारे बने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करता रहता है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद
हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों में हाईवे किनारे बने ढांचों को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आ चुके हैं। कई बार स्थानीय लोग और व्यापारी यह तर्क देते हैं कि ये दुकानें और अस्थायी ढांचे यात्रियों की जरूरतों को पूरा करते हैं, जबकि प्रशासन का कहना होता है कि ये सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
इस घटना के बाद भी वही बहस एक बार फिर तेज हो गई है कि हाईवे किनारे बने ऐसे ढांचों को पूरी तरह हटाया जाना चाहिए या फिर इनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
आगे क्या हो सकता है
कार्यालय तोड़े जाने के बाद किसान संगठनों ने प्रशासन से जवाब मांगा है और कहा है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं प्रशासन ने साफ किया है कि अगर भविष्य में भी किसी ने NHAI की जमीन पर अवैध निर्माण किया तो उसके खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन अब स्थिति पर नजर बनाए हुए है और इलाके में पुलिस की तैनाती भी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मामला स्थानीय स्तर पर ही शांत हो जाता है या फिर किसान संगठनों द्वारा इसे बड़े आंदोलन के रूप में उठाया जाता है।
फिलहाल, बुलडोजर कार्रवाई के बाद पैदा हुआ यह विवाद हापुड़ की राजनीति और किसान संगठनों के बीच एक नया मुद्दा बनता हुआ दिखाई दे रहा है।


