Bihar ropway :बिहार के इस जिले में जल्द दौड़ेगा राज्य का दूसरा रोपवे, वाणावर पहाड़ की चोटी तक मिनटों में पहुंचेंगे पर्यटक

Bihar ropeway

बिहार में पर्यटन को नई ऊंचाई देने वाला दूसरा रोपवे प्रोजेक्ट जल्द शुरू होगा। वाणावर पहाड़ की चोटी तक रोपवे से मिनटों में पहुंचना आसान हो जाएगा, जो पर्यटकों के लिए रोमांचक अनुभव साबित होगा।

Bihar ropeway

वाणावर पहाड़ की मनोरम चोटी तक पहुंचाने वाला बिहार का दूसरा रोपवे प्रोजेक्ट, पर्यटकों के लिए नया आकर्षण।By AI

बिहार सरकार ने राज्य के पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के एक जिले में जल्द ही दूसरा रोपवे प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है, जो वाणावर पहाड़ की चोटी तक पर्यटकों को मिनटों में पहुंचाएगा। यह प्रोजेक्ट न केवल पर्यटन को गति देगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा। बिहार का पहला रोपवे पहले से ही सफलतापूर्वक चल रहा है, और अब यह दूसरा रोपवे पर्यटकों के बीच खासी उत्सुकता पैदा कर रहा है।

प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी: क्यों और कैसे शुरू हो रहा है रोपवे?

यह रोपवे प्रोजेक्ट बिहार सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों को आसानी से सुलभ बनाना है। वाणावर पहाड़ बिहार के इस जिले में स्थित है, जहां प्राकृतिक सौंदर्य की कोई कमी नहीं। पहाड़ की चोटी पर पहुंचना पैदल या वाहनों से काफी मुश्किल और समय लेने वाला था, लेकिन अब रोपवे से यह सफर मात्र कुछ मिनटों का हो जाएगा।

प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 2 किलोमीटर बताई जा रही है, जिसमें आधुनिक केबिन्स का उपयोग होगा। प्रत्येक केबिन 10-15 पर्यटकों को ले जाने में सक्षम होगा, और स्पीड 5-6 मीटर प्रति सेकंड रखी गई है। निर्माण कार्य पहले से ही तेजी से चल रहा है, और अगले कुछ महीनों में इसका उद्घाटन होने की संभावना है। राज्य सरकार ने इसके लिए केंद्र सरकार से भी विशेष अनुदान प्राप्त किया है।

रोपवे का निर्माण स्विट्जरलैंड की तकनीक पर आधारित है, जो सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देती है। इसमें आपातकालीन ब्रेक सिस्टम, वेंटिलेशन और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। पर्यटन विभाग के अनुसार, यह प्रोजेक्ट सालाना लाखों पर्यटकों को आकर्षित करेगा, खासकर उन लोगों को जो एडवेंचर और नेचर लविंग हैं। बिहार रोपवे प्रोजेक्ट के तहत यह दूसरा होगा, जो राज्य के पर्यटन मानचित्र पर एक नया अध्याय जोड़ेगा।

वाणावर पहाड़ की ऊंचाई समुद्र तल से करीब 800 मीटर है, और यहां से आसपास के घने जंगलों, नदियों और सूर्यास्त के नजारे बेहद खूबसूरत हैं। रोपवे शुरू होने से ट्रेकिंग करने वाले पर्यटकों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि चोटी तक पहुंचने का समय 2 घंटे से घटकर 10 मिनट रह जाएगा। जिले के स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, जैसे गाइड, टिकटिंग स्टाफ और मेंटेनेंस वर्कर्स।

अधिकारियों के बयान और उद्धरण

बिहार पर्यटन विभाग के सचिव ने कहा, “वाणावर पहाड़ रोपवे बिहार के पर्यटन को नई दिशा देगा। यह प्रोजेक्ट पर्यटकों को सुरक्षित और रोमांचक यात्रा प्रदान करेगा, साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।” जिला मजिस्ट्रेट ने भी उत्साह जताते हुए बताया, “निर्माण कार्य 80% पूरा हो चुका है। हम जल्द ही टेस्ट रन शुरू करेंगे, ताकि पर्यटक गर्मियों में इसका लुत्फ उठा सकें।”

स्थानीय विधायक ने प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा, “यह बिहार का दूसरा रोपवे है, जो वाणावर पहाड़ को पर्यटन का हब बना देगा। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से यह संभव हुआ।” इन बयानों से साफ है कि प्रोजेक्ट को सभी स्तरों पर समर्थन मिल रहा है। पर्यटन मंत्री ने भी ट्वीट कर जानकारी दी, “बिहार रोपवे प्रोजेक्ट पर्यटन क्रांति लाएगा!”

पृष्ठभूमि और संदर्भ: बिहार में रोपवे का सफर

बिहार में रोपवे प्रोजेक्ट की शुरुआत 2022 में हुई थी, जब राज्य का पहला रोपवे राजगीर में शुरू किया गया। राजगीर रोपवे ने पर्यटकों की संख्या में 300% की वृद्धि की, जो प्रति वर्ष 5 लाख से अधिक विजिटर्स आकर्षित करता है। इस सफलता से प्रेरित होकर सरकार ने वाणावर पहाड़ पर दूसरा रोपवे प्लान किया।

वाणावर पहाड़ धार्मिक और प्राकृतिक महत्व का स्थान है। यहां प्राचीन मंदिर और गुफाएं हैं, जो श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। पहले पहुंचने के लिए संकरी पगडंडियां और जंगली इलाके खतरा पैदा करते थे, लेकिन रोपवे से यह समस्या हल हो जाएगी। बिहार सरकार का लक्ष्य 2026 तक 5 रोपवे प्रोजेक्ट शुरू करना है, जिसमें देवघर और वैशाली भी शामिल हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो उत्तराखंड और हिमाचल में रोपवे सफल हैं, जिनसे बिहार प्रेरणा ले रहा है। पर्यावरण मंत्रालय ने भी इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है, क्योंकि यह इको-फ्रेंडली है और जंगलों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। स्थानीय समुदाय ने भी इसका स्वागत किया है, क्योंकि इससे होमस्टे और लोकल प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ेगी।

बिहार का पर्यटन क्षेत्र पहले से ही बोधगया, नालंदा और वैशाली जैसे स्थानों पर फल-फूल रहा है। वाणावर पहाड़ रोपवे से राज्य का पर्यटन बजट 20% बढ़ सकता है। पिछले साल बिहार में 4 करोड़ पर्यटक आए, और यह संख्या रोपवे से दोगुनी हो सकती है।

निष्कर्ष: आगे क्या होगा?

वाणावर पहाड़ रोपवे प्रोजेक्ट बिहार के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। जल्द शुरू होने वाले इस दूसरे रोपवे से पर्यटक मिनटों में चोटी का आनंद लेंगे, जो एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देगा। सरकार ने टिकट मूल्य को किफायती रखा है—वयस्कों के लिए 200 रुपये और बच्चों के लिए 100 रुपये।

अगले चरण में टेस्टिंग और उद्घाटन होगा, उसके बाद पूर्ण संचालन। पर्यटकों को सलाह है कि वे सोशल मीडिया पर अपडेट्स फॉलो करें। यह प्रोजेक्ट न केवल पर्यटन, बल्कि स्थानीय विकास का प्रतीक बनेगा। बिहार रोपवे से एक नया दौर शुरू हो रहा है—आइए, इस रोमांच को अनुभव करें!

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