बिजनौर में रमजान अंतिम जुमे पर अमन की दुआ, मस्जिदों में काली पट्टी बांधकर आतंकवाद का विरोध

Bijnor Last Juma Prayers

रमजान के अंतिम शुक्रवार को जामा मस्जिद समेत प्रमुख मस्जिदों में शांतिपूर्ण नमाज, उलेमा ने की नेक काम की हिदायत, मुस्लिम समुदाय ने हाथ पर काली पट्टी बांधकर जताया विरोध।

Bijnor Last Juma Prayers

बिजनौर जामा मस्जिद और ताजपुर में अकीदतमंदों ने अमन-शांति की दुआ मांगी, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद।

बिजनौर जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में रमजान के अंतिम शुक्रवार को विभिन्न मस्जिदों में जुमा की नमाज अदा की गई। जामा मस्जिद समेत प्रमुख मस्जिदों पर भारी संख्या में नमाजी पहुंचे। इस अवसर पर अल्लाह के बारगाह में देश में अमनो-अमान की दुआ मांगी गई। पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा।

हादसे का पूरा विवरण

रमजान के पवित्र महीने के अंतिम जुमे पर बिजनौर शहर की जामा मस्जिद, ताजपुर जामा मस्जिद, कोतवाली देहात क्षेत्र की मस्जिदों में बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुटे। नमाज के दौरान उलेमा-ए-दीन ने कुरे काम छोड़कर नेक काम करने की हिदायत दी। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हाथ पर काली पट्टी बांधकर आतंकवाद का विरोध जताया। वक्ताओं ने कहा कि आतंकवाद किसी भी देश की संप्रभुता के लिए खतरा है। जिले भर में सैकड़ों मस्जिदों में दोपहर 12:45 से 2:30 बजे तक नमाज अदा की गई। एसडीएम नगीना समेत पुलिस टीम मस्जिदों पर तैनात रहीं, जिससे कोई अप्रिय घटना न हो। नमाजियों में उत्साह और धार्मिक आस्था का खासा प्रदर्शन हुआ।

उलेमा व अधिकारियों के बयान

उलेमा ने नमाज के बाद कहा, “रमजान में जुमे का महत्व अतुलनीय है। गुनाहों से तौबा करें, जकात-फितरा दें और समाज में भाईचारा बढ़ाएं।” कोतवाली प्रभारी ने बताया, “सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही, कोई विघ्न नहीं आया।” एक नमाजी बोले, “अल्लाह से अमन-चैन की दुआ की, आतंकवाद का कड़ा विरोध किया।”

पृष्ठभूमि और संदर्भ

रमजान इस्लाम का पवित्र महीना है, जिसमें रोजेदार इबादत पर ध्यान केंद्रित करते हैं। जुमे की नमाज का विशेष महत्व है, खासकर रमजान में। बिजनौर में जामा मस्जिद, चाहशीरी मस्जिद, स्टेशन वाली मस्जिद आदि प्रमुख केंद्र रहे। पिछले रमजान में भी इसी तरह शांतिपूर्ण नमाज हुई थी। उत्तर प्रदेश में रमजान के दौरान मस्जिदों पर सुरक्षा बढ़ाई जाती है। आतंकवाद विरोधी काली पट्टी का प्रदर्शन समुदाय की शांति प्रेमी छवि दर्शाता है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों जैसे ताजपुर, नगीना में भी उत्साह देखा गया। रमजान की फजीलत पर इमामों ने प्रकाश डाला, तौबा व दान की नसीहत दी। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जो सामाजिक सद्भाव को मजबूत करती है।

आगे क्या?

रमजान का समापन नजदीक है, ईद की तैयारियां जोरों पर। प्रशासन सुरक्षा बनाए रखेगा। समुदाय ने संकल्प लिया कि अमन-शांति की दुआएं जारी रखेंगे। यह आयोजन बिजनौर की गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करता है।

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