Bijnor News
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के शेरकोट में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक कथित तांत्रिक और उसके परिवार ने एक भोले-भाले परिवार को तंत्र-मंत्र और जादू-टोने के नाम पर न केवल 5.20 लाख रुपये की चपत लगाई, बल्कि उनकी कीमती संपत्ति (प्लॉट) हड़पने की भी कोशिश की।
तंत्र-मंत्र के मायाजाल में फंसा परिवार
घटना का पूरा विवरण
यह मामला बिजनौर के शेरकोट थाना क्षेत्र का है, जहाँ मोहल्ला नौंधना में रहने वाले सलीम अहमद ने पुलिस के समक्ष आपबीती सुनाई। सलीम अहमद के अनुसार, यह सिलसिला करीब छह साल पहले कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुआ था। उस समय उनके परिवार के कई सदस्य अचानक बीमार पड़ गए थे, जिससे पूरा परिवार काफी मानसिक तनाव और डर के दौर से गुजर रहा था। इसी कठिन समय का फायदा उठाते हुए, एक परिचित ने उन्हें नहटौर के बेगराजपुर गांव निवासी असलम तांत्रिक से मिलने की सलाह दी।
असलम तांत्रिक से मुलाकात के बाद, उसने सलीम के परिवार को विश्वास दिलाया कि उनके घर पर ‘ऊपरी साया’ या ‘भूत-प्रेत का साया’ है, जिसकी वजह से ही परिवार के सदस्य बीमार हो रहे हैं। तांत्रिक ने बड़ी चालाकी से परिवार का भरोसा जीत लिया और कहा कि वह विशेष पूजा और तांत्रिक क्रियाओं के जरिए उन्हें इस संकट से बाहर निकाल लेगा। पीड़ित परिवार डर के साये में था और तांत्रिक की बातों पर पूरी तरह विश्वास कर बैठा।
ठगी और ब्लैकमेलिंग का लंबा खेल
आरोप है कि पिछले तीन-चार वर्षों में, असलम तांत्रिक ने अपने बेटे मूसा और बेटी सरताज के साथ मिलकर परिवार से धीरे-धीरे कुल 5.20 लाख रुपये ऐंठ लिए। जब भी परिवार ने विरोध करने की कोशिश की, तो तांत्रिक ने उन्हें डराना-धमकाना शुरू कर दिया। असलम और उसके गिरोह का कहना था कि अगर उन्होंने पैसे देना बंद कर दिया या पुलिस के पास गए, तो वह अपने ‘काला जादू’ (तंत्र-मंत्र) के जरिए पूरे परिवार को जान से मार देगा।
यही नहीं, मामला तब और गंभीर हो गया जब गिरोह की नजर सलीम अहमद के कीमती प्लॉट पर पड़ी। आरोपियों ने परिवार को धमकाते हुए कहा कि वे इस प्लॉट को उनके नाम कर दें, अन्यथा उनके पूरे परिवार का विनाश हो जाएगा। अपनी जान और परिवार की सुरक्षा के डर से सलीम अहमद लंबे समय तक घुट-घुटकर जीते रहे।
पुलिस तक कैसे पहुंचा मामला?
जब धमकी का स्तर बहुत बढ़ गया और तांत्रिक ने जबरन प्लॉट हथियाने का दबाव डालना शुरू किया, तो सलीम अहमद ने अपनी हिम्मत जुटाई और बिजनौर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से मुलाकात की। उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई और न्याय की गुहार लगाई। एसपी के निर्देश पर शेरकोट पुलिस ने फौरन एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू की।
शनिवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने मुख्य आरोपी असलम तांत्रिक को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान, पुलिस को आरोपी के ठिकाने से कई आपत्तिजनक सामग्री मिली, जिनमें ताबीज, महिलाओं की फोटो, इत्र की शीशियां, और काले-सफेद मोतियों की मालाएं शामिल थीं। यह सामान इस बात का सबूत है कि किस तरह वह लोगों को अंधविश्वास के जाल में फंसाकर उनका शोषण करता था।
अंधविश्वास का यह काला सच
बिजनौर और आसपास के इलाकों में यह पहली बार नहीं है जब तंत्र-मंत्र के नाम पर इतनी बड़ी धोखाधड़ी हुई है। कुछ समय पहले ही, इसी तरह के मामलों में तांत्रिकों द्वारा कब्रिस्तान से शवों के साथ छेड़छाड़ करने जैसी घिनौनी घटनाएं भी सामने आई थीं। ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि कैसे कुछ अपराधी समाज के डर का फायदा उठाकर न केवल आर्थिक, बल्कि मानसिक रूप से भी लोगों को तोड़ देते हैं।
समाज के लिए सबक
इस तरह के मामलों से हमें बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। आज के आधुनिक युग में भी तंत्र-मंत्र और जादू-टोने के नाम पर ठगी होना, हमारी सामाजिक जागरूकता की कमी को दर्शाता है। लोग अक्सर अपनी निजी समस्याओं, बीमारी या परिवार की परेशानियों के कारण कमजोर हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में वे किसी भी ‘चमत्कारी’ समाधान की तलाश में तांत्रिकों के चंगुल में फंस जाते हैं।
बिजनौर की यह घटना उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो किसी भी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा करते हैं जो बिना किसी वैज्ञानिक आधार के ‘चमत्कार’ का दावा करता है। यदि किसी के साथ ऐसी कोई घटना हो रही हो, तो उसे तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना देनी चाहिए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार का डर मन में न रखें; कानून का दरवाजा हमेशा खुला रहता है।|This story also covered by Amar Ujala
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निष्कर्ष और आगे की राह
मुख्य आरोपी तांत्रिक असलम फिलहाल सलाखों के पीछे है, लेकिन उसके बेटे और बेटी की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे गिरोह का भंडाफोड़ होगा। बिजनौर पुलिस की इस कार्रवाई ने उन लोगों को राहत दी है जो लंबे समय से इस गिरोह के डर में जी रहे थे। समाज को भी ऐसे तत्वों के खिलाफ सतर्क रहने की जरूरत है ताकि फिर से किसी गरीब या कमजोर परिवार को इस तरह के जाल में न फंसाया जा सके।
यह मामला केवल एक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक गहरी मानवीय त्रासदी है। अंधविश्वास का कोई अंत नहीं होता, लेकिन शिक्षा और जागरूकता के जरिए हम ऐसे ‘ठगों’ के मंसूबों को नाकाम जरूर कर सकते हैं।
Written by .M.A, Arif


