बदायूं मेडिकल हादसा: अल्ट्रासाउंड सेंटर ने पुरुष के पेट में बता दी बच्चेदानी—सिस्टम पर भारी सवाल!
Budaun Ultrasound News
सहसवान डॉ. रामनिवास गुप्ता अस्पताल की शर्मनाक चूक से नेम सिंह 3 दिन मानसिक हाहाकार। वायरल रिपोर्ट पर सीएमओ सख्त, सेंटर सील की तैयारी।
वायरल अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट जिसमें पुरुष नेम सिंह के पेट में ‘बच्चेदानी’ दिखाई गई—मेडिकल लापरवाही का जीता-जागता सबूत।
Badaun जिले के सहसवान क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक निजी अस्पताल की लापरवाही ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक पुरुष मरीज की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में ‘बच्चेदानी (यूटरस)’ लिख दिया गया, जबकि यह जैविक रूप से पुरुष शरीर में संभव ही नहीं है।
यह मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया और रिपोर्ट सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गई।
पेट दर्द की जांच कराने पहुंचे थे मरीज
सहसवान क्षेत्र के रहने वाले 46 वर्षीय नेम सिंह को कुछ दिनों से पेट दर्द की शिकायत थी। पड़ोस के डॉक्टर ने उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। इसके बाद वह जांच कराने के लिए डॉ. रामनिवास गुप्ता अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर पहुंचे।
बताया जा रहा है कि 19 मार्च को अस्पताल में उनका अल्ट्रासाउंड किया गया। जब रिपोर्ट हाथ में आई तो उसमें लिखा था कि उनके पेट में “बच्चेदानी मौजूद है और उसका आकार सामान्य है।”
रिपोर्ट पढ़कर नेम सिंह और उनका परिवार हैरान रह गया। घबराए हुए नेम सिंह तुरंत अपने परिचित डॉक्टरों के पास पहुंचे। डॉक्टरों ने रिपोर्ट देखते ही कहा कि यह संभव ही नहीं है और इसमें गंभीर गलती लग रही है।
दूसरी जांच में खुली रिपोर्ट की सच्चाई
मामले की पुष्टि के लिए नेम सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां दोबारा जांच की गई। वहां डॉक्टरों ने बताया कि उनकी रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य है और पहली रिपोर्ट में स्पष्ट गलती है।
इसके बाद नेम सिंह दोबारा उसी अस्पताल पहुंचे और जब डॉक्टरों से सवाल किया तो अस्पताल की ओर से इसे “टाइपिंग एरर” बताया गया।
डॉक्टरों का कहना था कि सॉफ्टवेयर में पहले की एक महिला मरीज की रिपोर्ट का डेटा गलती से इस रिपोर्ट में आ गया, जिसकी वजह से यह त्रुटि हुई। बाद में दोबारा अल्ट्रासाउंड किया गया और उसमें कोई समस्या नहीं मिली।
तीन दिन तक मानसिक तनाव में रहा परिवार
नेम सिंह का कहना है कि इस रिपोर्ट ने उन्हें और उनके परिवार को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया।
उनके अनुसार, “जब रिपोर्ट में बच्चेदानी लिखा देखा तो हम डर गए कि कहीं कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है। तीन दिन तक हमें समझ नहीं आया कि आखिर मामला क्या है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस रिपोर्ट के आधार पर कोई गलत इलाज शुरू हो जाता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
सीएमओ से शिकायत, जांच शुरू
नेम सिंह ने पूरे मामले की शिकायत जिला स्वास्थ्य विभाग से की है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं।
बदायूं के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने कहा कि वायरल रिपोर्ट का संज्ञान लिया गया है और जांच टीम गठित की गई है। यदि जांच में लापरवाही साबित होती है तो अल्ट्रासाउंड सेंटर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
सोशल मीडिया पर भी उठा मामला
जैसे ही यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई, लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कई लोगों ने ग्रामीण क्षेत्रों में निजी जांच केंद्रों की निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
विशेषज्ञों ने उठाए बड़े सवाल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी गलतियां बेहद गंभीर हैं। एक साधारण रिपोर्टिंग गलती भी मरीज को मानसिक आघात दे सकती है और कई बार गलत इलाज का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार हर अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट जारी करने से पहले मरीज का नाम, लिंग और मेडिकल डाटा दोबारा जांचना जरूरी है।
सुधार की जरूरत
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में चल रहे निजी जांच केंद्रों की निगरानी कितनी मजबूत है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए जाएंगे।
नेम सिंह और उनके परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय मिलना चाहिए ताकि भविष्य में किसी और मरीज को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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