Bulandshahr News
बुलंदशहर के खुर्जा देहात इलाके के गांव मुबारिकपुर के निकट खुले मैदान में सड़क निर्माण के लिए सो रहे मजदूरों पर रोड़ी से भरा डंपर पलट गया, जिसमें चार मजदूर रोड़ी और बाड़ी के नीचे दब गए और दो की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए।
“रोड़ी से भरे डंपर के अधूरी फोटो, जिसके नीचे मजदूरों को रोड़ी हटाकर निकालने का दृश्य दिख रहा हो।”
बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे बुलंदशहर के खुर्जा देहात थाना क्षेत्र के गांव मुबारिकपुर के पास एक भयानक दृश्य देखने को मिला, जब सड़क निर्माण के लिए रोड़ी से भरा डंपर खुले मैदान में फैले तंबू के पास पहुंचा और चालक द्वारा रोड़ी उतारने के लिए आगे बढ़ाते समय वह एक तरफ नरम मिट्टी में धंस गया और ऊपर का भारी हिस्सा मजदूरों के ऊपर आ गिरा। इस घटना में दो मजदूरों की दबे‑दबे ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए।
घटना का “कैसे” और “क्यों”
मुबारिकपुर गांव के निकट राजमार्ग पर सड़क निर्माण कार्य चल रहा था, जिसके लिए रोड़ी को यहां खुले मैदान में एकत्रित किया गया था। मंगलवार रात दस मजदूर तंबू बनाकर इसी मैदान में सो रहे थे, जबकि डंपर में रोड़ी लोड होना बाकी था। बुधवार सुबह रोड़ी लदा डंपर वहां आया और चालक ने उसे आगे की तरफ ले जाकर रोड़ी उतारने की कोशिश की।
इसी दौरान डंपर के एक तरफ के पहिए नरम मिट्टी में धंस गए, जिससे वाहन का संतुलन बिगड़ गया और ऊपर का रोड़ी‑से‑भरा हिस्सा मैदान में सो रहे मजदूरों के ऊपर पलट गया। चार मजदूर सीधे रोड़ी और डंपर की बाड़ी के नीचे आ गए, जबकि दस में से छह मजदूर तुरंत उठकर खुद को बचा पाए। साथ वाले मजदूरों ने तुरंत रोड़ी हटाकर उन दो लोगों को बाहर निकाला, जो दबाव में कम थे—राकेश पुत्र योगेंद्र और विजय, जो गांव रहीमकोट के निवासी थे।
दूसरी तरफ, डंपर और रोड़ी के नीचे दबे दो मजदूरों को स्थानीय लोग और साथियों से बाहर निकाला नहीं जा सका। इस बीच सीओ शोभित कुमार और खुर्जा देहात थाना प्रभारी मनोज कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी व क्रेन बुलाकर रोड़ी हटाई। इसके बाद दबे दो मजदूरों—30 वर्षीय राकेश पुत्र राजेंद्र और 35 वर्षीय पवन (दोनों रहीमकोट निवासी)—को बाहर निकाला गया, जो पहले से ही दबाव में मौत की गोद में जा चुके थे। अन्य घायलों को खुर्जा या नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
सीओ शोभित कुमार (खुर्जा देहात):
“घटना सुबह जल्दी हुई, जब डंपर रोड़ी उतारने के लिए आगे बढ़ा तो उसके पहिए मिट्टी में धंस गए और वह एक तरफ पलट गया। चार मजदूर रोड़ी के नीचे आ गए। हमने तुरंत जेसीबी और क्रेन बुलाकर राहत और बचाव कार्य शुरू करवाया। दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हैं।”
स्थानीय मजदूर (नाम गोपनीय):
“हम रात भर यहीं सोते हैं, क्योंकि दूर जाने का तंग है। रात में तो यह डंपर वहां नहीं आता था, लेकिन सुबह आते ही उसने यह तबाही मचा दी। दो भाइयों की जान चली गई, बस उनके घर वालों के लिए यह दिन बहुत भारी है।”
स्वजन उपस्थित मजदूर की बहन (तारकोल इलाके से उठाए गए घायल के लिए):
“उन्होंने हमारे भाई को जेसीबी से निकाला, वह बेहोश था। अस्पताल में डॉक्टर कह रहे हैं कि उसकी हालत नाजुक है। लेकिन कम से कम उसकी जान बच गई, जबकि दो और भाइयों को तो रोड़ी के नीचे से निकाला भी नहीं जा सका।”
मुबारिकपुर गांव के पास सड़क निर्माण कार्य के लिए यह मैदान पहले से ही रोड़ी और सामग्री जमा करने का जगह बन चुका था। रात भर सोने के लिए मजदूर अक्सर यहीं तंबू बनाकर रहते हैं, क्योंकि आवास की व्यवस्था या परिवहन की कमी होती है। इस तरह की दुर्घटनाओं के बारे में लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है, जहां ओवरलोडेड डंपर या टिपर अनजाने में सो रहे लोगों के ऊपर आ गिर जाते हैं।
हाल के वर्षों में गुजरात, महाराष्ट्र और झारखंड में भी इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं, जहां टिपर या डंपर सो रहे मजदूरों के ऊपर आ गिरे और कई लोगों की जान चली गई। इन घटनाओं ने निर्माण कार्यस्थलों पर सुरक्षा नियमों—जैसे रोड़ी या सामग्री को रात भर खुले मैदान में न छोड़ना, मजदूरों के लिए अलग आवास व रोशनी—को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
What next
घटना के बाद खुर्जा देहात पुलिस ने डंपर चालक और निर्माण ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों ने ओवरलोडिंग और मजदूरों के लिए असुरक्षित रहने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि अगर डंपर को सही तरीके से रोड़ी उतारने के लिए डिज़ाइन की होई साइट पर ही रखा जाता और मजदूरों को दूर आवास में सोने की व्यवस्था की जाती, तो
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