दिल्ली हाईकोर्ट ने क्विंस वैली स्कूल द्वारा नौवीं फेल EWS छात्रा को एडमिशन न देने पर दिल्ली सरकार और डीओई से स्पष्टीकरण मांगा।
दिल्ली हाईकोर्ट में EWS छात्रा के एडमिशन मामले की सुनवाई।
Delhi News: नौवीं में फेल EWS छात्रा को स्कूल ने रोका एडमिशन
विस्तृत कारण और प्रक्रिया
यह विवाद तब शुरू हुआ जब छात्रा ने 2025-26 सत्र में क्विंस वैली स्कूल, द्वारका में EWS कोटे से नौवीं कक्षा में एडमिशन लिया। सत्र समाप्ति पर वह एक मुख्य विषय में फेल हो गई, लेकिन अन्य विषयों में पास। स्कूल प्रबंधन ने RTE नियमों का हवाला देते हुए अगले वर्ष एडमिशन न देने का पत्र जारी किया, दावा किया कि फेल छात्रा EWS कोटे के पात्र नहीं। लेकिन RTE एक्ट स्पष्ट कहता है कि EWS छात्रों को कक्षा 1 से 8 तक फ्री एजुकेशन मिलेगी, और फेल होने पर भी निरंतरता बनी रहेगी। छात्रा के पिता, एक दैनिक मजदूर, ने DoE से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर HC का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने सुनवाई में स्कूल के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि RTE का उद्देश्य गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, न कि फेल होने पर बाहर करना। जस्टिस ने DoE से पूछा—क्या स्कूलों को फेल EWS छात्रों का एडमिशन रोकने का अधिकार है? मामले की अगली सुनवाई 15 मई 2026 को है। वकील गोपाल शर्मा, जो PIL दायर करने वाले हैं, ने बताया कि दिल्ली में 500+ ऐसे केस पेंडिंग हैं। स्कूल ने बचाव में कहा कि इंटरनल असेसमेंट में कम ग्रेड्स थे, लेकिन कोर्ट ने दस्तावेज मांगे। यह प्रक्रिया RTE के कार्यान्वयन पर सवाल उठाती है।
बयान और प्रतिक्रियाएं
जस्टिस यामिनी जैन ने बेंच से कहा, “RTE गरीब बच्चों का अधिकार है, स्कूल इसे तोड़ नहीं सकते। सरकार जवाब दे कि कितने EWS बच्चे ऐसे प्रभावित हैं।” छात्रा के पिता राजेश कुमार ने भावुक होकर बताया, “मेरी बेटी पढ़ना चाहती है, लेकिन स्कूल ने दरवाजा बंद कर दिया। मजदूरी से फीस नहीं दे सकते।” शिक्षा मंत्री अतशी ने ट्वीट किया, “EWS एडमिशन में कोई भेदभाव नहीं। DoE जांच करेगा।” स्कूल प्रिंसिपल डॉ. नेहा गुप्ता ने कहा, “हम RTE फॉलो करते हैं, लेकिन अकादमिक स्टैंडर्ड बनाए रखना जरूरी। फेल छात्रा को प्रमोट नहीं कर सकते।” RTE एक्टिविस्ट मनीष सिसोदिया बोले, “यह सुप्रीम कोर्ट के 2012 फैसले का उल्लंघन है। हजारों बच्चे प्रभावित।”
पृष्ठभूमि और संदर्भ
RTE एक्ट 2009 ने भारत में शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया। दिल्ली में 25% EWS/DG सीटें निजी स्कूलों में अनिवार्य हैं। 2025 में दिल्ली में 1.2 लाख EWS एडमिशन हुए, लेकिन 15% फेल होने पर एडमिशन रद्द के केस दर्ज। क्विंस वैली जैसे स्कूलों पर पहले भी शिकायतें—2024 में CBSE ने 5 स्कूलों को नोटिस दिया। सुप्रीम कोर्ट ने प्रेस्टीजियस स्कूल सोसाइटी बनाम उड़ीशा (2012) में कहा कि EWS छात्रों को कक्षा 1-8 तक फ्री शिक्षा, फेल होने पर भी। दिल्ली सरकार की 2023 पॉलिसी कहती है कि फेल EWS को उसी स्कूल में रखा जाए।
EWS श्रेणी में सालाना 1 लाख तक आय वाले परिवार आते हैं। दिल्ली में 1700+ निजी स्कूल RTE लागू करते हैं, लेकिन अमल कमजोर। NGO प्रथम के सर्वे में 30% EWS बच्चे ड्रॉपआउट रेट पर। महामारी के बाद ऑनलाइन क्लासेस ने ग्रामीण/गरीब बच्चों को पीछे धकेला। यह मामला निजी स्कूलों की ‘एलीटिज्म’ को उजागर करता है। केंद्र सरकार ने 2026 बजट में RTE फंड 20% बढ़ाया, लेकिन जमीनी स्तर पर कमी।
निष्कर्ष: आगे क्या होगा
दिल्ली HC का यह नोटिस RTE के मजबूत कार्यान्वयन की दिशा में बड़ा कदम है। अगली सुनवाई में DoE को डेटा देना होगा—कितने EWS बच्चे फेल होने पर बाहर हुए। संभवत: कोर्ट स्कूल को एडमिशन देने और जुर्माना लगाए। सरकार नई गाइडलाइंस जारी कर सकती है। EWS बच्चों के लिए हेल्पलाइन मजबूत हो। यह केस पूरे देश के लिए मिसाल बनेगा। अभिभावक सतर्क रहें, शिकायत DoE पोर्टल पर करें। शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का है—फेल होना अंत नहीं। क्या स्कूल बदलेगा रुख? कोर्ट का फैसला तय करेगा। For in depth more about article click here.


