Delhi News Today: ब्रह्मपुरी सीवर जाम संकट: 2 महीने से गलियों में गंदा पानी, जलभराव से बीमारियों का भयानक खतरा

पूर्वी दिल्ली के ब्रह्मपुरी में गली नंबर 13 समेत कई इलाकों में 2 माह से सीवर ओवरफ्लो, दूषित पानी से चोटें व संक्रमण का खतरा। MCD-जल बोर्ड पर लापरवाही के आरोप।

Delhi News Today: ब्रह्मपुरी सीवर जाम संकट: 2 महीने से गलियों में गंदा पानी, जलभराव से बीमारियों का भयानक खतरा

ब्रह्मपुरी गली नंबर 13 में गंदे पानी से लबालब गलियां, जहां हजारों लोग जी रहे हैं अस्वच्छता के जाल में।

Delhi News Today: ब्रह्मपुरी सीवर जाम संकट: 2 महीने से गलियों में गंदा पानी, जलभराव से बीमारियों का भयानक खतरा

पूर्वी दिल्ली के ब्रह्मपुरी इलाके में दो महीनों से सीवर जाम की भयानक समस्या ने आम जीवन को नर्क बना दिया है। गली नंबर 13 के 10 बी ब्लॉक सहित कई गलियों में ओवरफ्लो सीवर से गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे जलभराव आम हो गया। लोग घर से निकलते समय फिसलकर चोटिल हो रहे हैं, जबकि नलों से दूषित पानी आने से डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियां फैलने का खतरा मंडरा रहा। स्थानीय निवासियों ने MCD और दिल्ली जल बोर्ड पर शिकायतों को अनदेखा करने का आरोप लगाया। गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति और गंभीर हो गई, जहां हजारों लोग दुर्गंध और संक्रमण से जूझ रहे हैं।

समस्या क्यों और कैसे बनी? विस्तृत विश्लेषण

यह संकट जनवरी 2026 से शुरू हुआ, जब ब्रह्मपुरी के पुराने सीवर लाइनों में जाम होने से पानी उफान पर आ गया। गली नंबर 13 सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 10 बी ब्लॉक के घरों के बाहर 2-3 फीट तक गंदा पानी जमा है। मुख्य कारण हैं सीवर पाइपों की जर्जर हालत, अवैध कनेक्शन और कचरा जमा होना। सुपर सुपर सिलेंडर जैसी मशीनों से अस्थायी सफाई होती है, लेकिन स्थायी सुधार नहीं। गर्मी में पानी सूखने के बजाय उभर रहा, जो मच्छरों के लिए परफेक्ट ब्रिडिंग ग्राउंड बन गया।

निवासी बताते हैं कि शिकायतें 20 से अधिक दर्ज कराईं, लेकिन MCD केवल जेटिंग मशीन भेजता, जो 2-3 दिन बाद फिर जाम हो जाता। दिल्ली जल बोर्ड का कहना है कि फंड की कमी से मशीनरी घटी, जबकि 2000+ दैनिक शिकायतें लंबित हैं। गलियों में बच्चे-बुजुर्ग फिसलकर गिर रहे, कई को हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। नलों से काला पानी आने से पेयजल संकट भी गहरा गया। पड़ोसियों का आरोप है कि बिल्डिंग कचरा सीवर में डालने से ब्लॉकेज बढ़ा। यह समस्या सीलमपुर-शकरपुर जैसे यमुनापार इलाकों में आम है।

निवासियों के गुस्से भरे बयान

गली नंबर 13 की रहने वाली रानी देवी ने कहा, “2 महीने से घर में कैद हैं। बच्चे बीमार पड़ रहे, MCD आता है तो फोटो खींचकर चला जाता। गंदगी से सांस लेना मुश्किल।” 10 बी ब्लॉक के रामू ने फरियाद लगाई, “चोट लगी तो खुद खर्चा किया। जल बोर्ड-एमसीडी झगड़ रहे, हम मरें?” पार्षद प्रतिनिधि ने बताया, “50+ शिकायतें भेजीं, लेकिन ठेकेदार लापरवाह। धरना देने को मजबूर हैं।”

स्थानीय डॉक्टर एस.के. शर्मा बोले, “दूषित पानी से गैस्ट्रो, स्किन इंफेक्शन बढ़े। 20% मरीज ब्रह्मपुरी के। तत्काल सफाई जरूरी।” एक बुजुर्ग ने चेतावनी दी, “बारिश होते ही बाढ़ आएगी। सरकार जागे वरना आंदोलन होगा।”

पृष्ठभूमि: दिल्ली के सीवर संकट का काला इतिहास

ब्रह्मपुरी पूर्वी दिल्ली का घनी आबादी वाला मुस्लिम बहुल इलाका है, जहां 50,000+ लोग रहते हैं। 40 वर्ष पुरानी सीवर सिस्टम बूढ़ी हो चुकी, जो 1980s में बनी। NCRB आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 2025 में 5000+ सीवर शिकायतें दर्ज, जिनमें 60% यमुनापार। शकरपुर, सीलमपुर में भी ओवरफ्लो आम।

मुख्य कारण: फंड क्राइसिस—जल मंत्री ने 2024 में बताया कि 60% सफाई मशीनें बंद। अवैध कॉलोनियां, प्लास्टिक कचरा ब्लॉक करते। गर्मी-मानसून में समस्या दोगुनी। AAP सरकार पर MCD-जल बोर्ड टकराव का आरोप। केंद्र ने ‘अमृत 2.0’ योजना शुरू की, लेकिन ब्रह्मपुरी को फंड नहीं। पड़ोसी इलाकों में देहरादून-सहारनपुर जैसी जलभराव समस्या। COVID के बाद सफाई बजट 30% कम। निवासी आर्थिक रूप से कमजोर, इसलिए चुप रहते।

यह संकट स्वास्थ्य आपदा बन सकता—डेंगू के 100+ केस पूर्वी दिल्ली में। महिला-बच्चों पर ज्यादा असर। पार्षद चुनावों में मुद्दा बनेगा।

निष्कर्ष: समाधान की राह

ब्रह्मपुरी सीवर जाम ने प्रशासन की पोल खोल दी। तत्काल 10 जेटिंग मशीनें, नए पाइपलाइन बिछाने जरूरी। MCD-जल बोर्ड को एकीकृत कमेटी बनानी चाहिए। फंड आवंटन पर तुरंत कार्रवाई। स्थानीय स्तर पर कचरा प्रबंधन, जागरूकता कैंप। निवासी धरना-आंदोलन की तैयारी में। क्या गर्मी-मानसून से पहले सुधार होगा? सरकार जवाबदेह बने।For in depth click here




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