रिठाला में भीषण आग 100 झोपड़ियां जली,उत्तम नगर वेस्ट मेट्रो हादसा,पूर्वी दिल्ली अनारकली अवैध साप्ताहिक बाजार,सदर बाजार चार मंजिला इमारत आग।
“जर्जर इमारत या बेदखली?” पालिका धाम को लेकर तीखा विवाद, NDMC ने फिर दिया नोटिस
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने गोल मार्केट स्थित पालिका धाम आवासीय परिसर को जर्जर और असुरक्षित घोषित करते हुए निवासियों से परिसर खाली करने का निर्देश दिया है, लेकिन कर्मचारियों ने बेदखली से इनकार कर दिया है।
नई दिल्ली के गोल मार्केट इलाके में स्थित पालिका धाम—जर्जर हालत को देखते हुए NDMC ने इसे निवास के लिए असुरक्षित घोषित किया।
Delhi News Today 05 Mar 2026
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने पालिका धाम आवासीय परिसर को संरचनात्मक रूप से जर्जर और निवास के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया है। इसके बाद संयुक्त निदेशक की तरफ से जारी सार्वजनिक नोटिस में सभी निवासियों को “तत्काल प्रभाव से” परिसर खाली करने की सलाह दी गई है। हालांकि, यहां रहने वाले NDMC के कर्मचारी और अन्य आवंटित निवासी परिसर खाली करने से इनकार कर रहे हैं, जिससे यह मामला काफी हद तक बेदखली विवाद जैसा दिख रहा है।
जर्जर या बेदखली? NGT और सुरक्षा का नारा
NDMC का कहना है कि पालिका धाम की इमारत 1970 के दशक में बनी “ब्रिक मैसनरी स्ट्रक्चर” है और इसकी संरचनात्मक जांच में गंभीर खतरे पाए गए हैं। परिषद ने चेतावनी दी है कि भवन के गिरने या किसी अप्रिय घटना की स्थिति में जान‑माल का नुकसान हो सकता है, इसलिए सभी 149 आवासीय इकाइयों को तुरंत खाली कराने का आदेश जारी किया गया है। यह नोटिस संभावित रूप से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) या अन्य हाई‑प्रोफाइल निगरानी के दबाव में दिया गया है, क्योंकि पुरानी सरकारी इमारतों की सुरक्षा और पुनर्विकास पर लगातार फोकस बढ़ रहा है।
निवासियों का विरोध और सुरक्षा का दावा
इधर, पालिका धाम में रहने वाले अधिकांश निवासियों का तर्क है कि वे यहां दशकों से रह रहे हैं और कोई गंभीर संरचनात्मक दुर्घटना या दुर्भाग्यपूर्ण घटना हाल के सालों में नहीं हुई है। कई आवंटित कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें मजबूरन खाली करने का आदेश देना “बेदखली की तैयारी” जैसा लग रहा है, खासकर तब जब वैकल्पिक आवास की सुविधाओं के स्थान और नियम स्पष्ट नहीं दिखते। निवासी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अगर भवन वाकई इतना खतरनाक है, तो इसके साथ ही किसी तुरंत और तय‑मानक योजना के तहत उनका आवास‑अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
वैकल्पिक आवास और आगे की राह
NDMC ने अलग सर्कुलर में Type‑I और Type‑II आवासीय इकाइयों के लिए बोलियां (बिडिंग) शुरू करने की घोषणा की है, जिससे संवेदनशील श्रेणी के निवासियों को विकल्प दिया जा सके। नोटिस में 7 मार्च 2026 को अंतिम तारीख भी बताई गई है, जिसके बाद भी परिसर खाली न होने पर प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना निकट दिख रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला NDMC के लिए एक टेस्ट बन गया है: वह किस हद तक सुरक्षा, कानूनी अधिकार और नौकरशाही की गतिशीलता को साथ बैठा पाती है।
दिल्ली सदर बाजारः बारा टूटी चौक के पास चार मंजिला इमारत में लगी भीषण आग, जलकर एक युवक की मौत
उत्तरी दिल्ली के सदर बाजार इलाके, बारा टूटी चौक के पास स्थित चार मंजिला इमारत में शार्ट सर्किट से आग लगी, जो प्लास्टिक खिलौनों के कारण बेकाबू हो गई; दमकल टीमों ने 20 गाड़ियां लगाकर आग पर काबू पाया, लेकिन चौथी मंजिल से जला हुआ शव मिला।
चार मंजिला भवन में लगी भीषण आग के दौरान बचाव कार्य में जुटे दमकल कर्मी—सदर बाजार की भागदौड़ भरी शाम।
Delhi News Today 05 Mar 2026
दिल्ली के पुराने कॉमर्शियल हब सदर बाजार में बुधवार की शाम को बारा टूटी चौक के पास लगी एक चार मंजिला इमारत में जोरदार आग लग गई। शार्ट सर्किट से आग शुरू हुई, जिसके बाद ऊपरी मंजिलों पर भरे प्लास्टिक के खिलौनों ने उसे तेजी से फैला दिया। अग्निशमन विभाग (DFS) ने घटना की सूचना मिलते ही तुरंत कई दमकल गाड़ियां मौके पर भेज दीं और करीब 20 गाड़ियों की लगातार कोशिश के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया। हालांकि, तलाशी के दौरान चौथी मंजिल से जला हुआ एक शव बरामद किया गया, जिसकी अभी तक पहचान नहीं हो पाई है।
आग कैसे फैली और बचाव कार्य कैसे चला?
घटना के बारे में प्रारंभिक जानकारी बताती है कि इमारत के अंदर बिजली के तारों में शार्ट सर्किट से आग शुरू हुई और हल्की पर जलने वाली सामग्री और प्लास्टिक के खिलौनों ने उसे तेजी से बढ़ा दिया। आग की लपटें नीचे से ऊपर की तरफ तेजी से फैलीं, जिससे गलियारे और सीढ़ियां धुएं से घिर गईं। दमकल टीमों ने लगातार पानी की बौछार करके लपटों को नियंत्रित किया और मकान से फंसे लोगों को बाहर निकालने का भी प्रयास किया। भीड़भाड़ वाले इलाके के कारण रास्ता संकरा होने से दमकल गाड़ियों की गतिशीलता पर असर पड़ा, फिर भी अधिकारियों के मुताबिक आग को फैलने से रोकने में सफलता मिली।
जला शव और शुरुआती जांच
तलाशी के दौरान दमकल कर्मियों ने चौथी मंजिल पर जला हुआ शव देखा, जिसे घटनास्थल पर ही पहचान के लिए छोड़ दिया गया। नजदीकी दुकानदारों और इलाके के कई लोगों ने बताया कि वह मंजिल आमतौर पर खाली या भंडारण के लिए इस्तेमाल होती थी, जिससे शक है कि वहां रहने वाला कोई व्यक्ति आग की लपटों में फंस गया होगा। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है और बिल्डिंग के मालिकों, इलाका निवासियों और नजदीकी दुकानदारों से जांच शुरू कर दी है। अभी घटना की आधिकारिक जांच जारी है और आग के सटीक कारणों की रिपोर्ट आने बाकी है।
सदर बाजार की अनसुरक्षित इमारतें और आगे की चिंता
सदर बाजार क्षेत्र में पुरानी इमारतों, बिजली की ओवरलोड लाइनों और अत्यधिक जमावड़े सामान के कारण आग का खतरा हमेशा से रहा है। पिछले साल भी इसी इलाके में एक भवन में आग लगी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इस घटना से फिर एक बार यह बात उभरती है कि यहां की हाई‑डेंसिटी इमारतों को नियमित रूप से निरीक्षण, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा नियमों के पालन की जरूरत है। व्यापारी संघों ने लगातार कहा है कि सीमित रास्तों और पुरानी बिल्डिंग इंफ्रा के बीच आग की स्थिति में बचाव अभियान और जोखिम भरा हो जाता है।
अनारकली में अवैध साप्ताहिक बाजार: निवासियों की रोजी‑रोटी नहीं, रोज रोंगटे खड़े
पूर्वी दिल्ली के अनारकली इलाके में साप्ताहिक बाजार का अवैध फैलाव अब स्थानीय आवासीय क्षेत्रों तक पहुंच गया है; जाम, आपातकालीन वाहनों की आवाजाही में बाधा और बढ़ती गंदगी से घर‑घर हताश है, लेकिन प्रशासन अब तक चुपचाप बैठा है।
अनारकली में सप्ताह पर सप्ताह फैलता हुआ साप्ताहिक बाजार—सड़कें गाड़ियों और रेहड़ियों से भरी हुईं।
Delhi News Today 05 Mar 2026
पूर्वी दिल्ली के अनारकली निवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी अब अवैध साप्ताहिक बाजार की वजह से उलट‑फेर हो गई है। बाजार का विस्तार व्यावसायिक ऑप्ट‑एरिया से हटकर आवासीय बस्तियों की गलियों तक हो चुका है, जिससे सड़कें दिनों में भी जाम से भरी रहती हैं, आपातकालीन वाहनों की आवाजाही रुक‑रुक कर चलती है और गलियों में फेंका हुआ कचरा और सड़क पर बिखरा कचरा निवासियों के लिए रोज नया संकट बनता जा रहा है। स्थानीय आरडब्ल्यूए सदस्यों और हितधारकों का दावा है कि वे बार‑बार शिकायतें दर्ज करा चुके हैं, पर प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई या स्पष्ट योजना अब तक दिखाई नहीं दी है।
बाजार का अवैध फैलाव कैसे बढ़ा?
अनारकली का साप्ताहिक बाजार आमतौर पर सीमित स्थान पर रिस्ट्रिक्ट होना चाहिए, लेकिन यहां दुकानदारों ने बिना मंजूरी के रेहड़ियां, ट्रॉली और प्लास्टिक टेबलें आवासीय गलियों में टांग ली हैं। इससे सड़कों की चौड़ाई सिकुड़ गई है, वाहन पास बनने लगे हैं और रात में बिजली के तारों के नीचे टैंपो और कारों को पार्क करने की प्रथा न सिर्फ ट्रैफिक को ब्लॉक कर रही है बल्कि आपातकालीन हालत में एंबुलेंस‑फायर ब्रिगेड की पहुंच के लिए भी खतरा पैदा कर रही है। निवासियों का शिकायत है कि हर सप्ताह बाजार के दिन सुबह से ही घर के बाहर से निकलना या वापस लौटना मुश्किल हो जाता है, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए इससे रोज नई परेशानी उत्पन्न होती है।
गंदगी, स्वास्थ्य और सुरक्षा का खतरा
बाजार वालों के रेहड़ियों से निकला कचरा, ताजामाल, फल‑सब्जी के फालतू हिस्से और खुल में फेंका कोई भी सामान आसपास की गलियों में जमा हो जाता है। बारिश के सीजन में यह गंदगी पानी में मिलकर बीमारी फैलाने का खतरा बढ़ा देती है। स्थानीय डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह व्यवस्था संक्रामक रोगों के फैलाव के लिए एक आदर्श प्लेटफॉर्म बन सकती है, जबकि NDMC/पूर्वी दिल्ली नगर निगम की ओर से नियमित सफाई और निगरानी अभी तक दिखाई नहीं दी। निवासी चेतावनी दे रहे हैं कि अगर ठोस कदम नहीं उठे तो एक दिन ये बाजार न सिर्फ ट्रैफिक की समस्या बनेगा, बल्कि स्वास्थ्य संकट का केंद्र भी बन सकता है।
निवासी: “शिकायतें, लेकिन कोई सुनवाई नहीं”
स्थानीय निवासियों ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर निगम, MP/MLA कार्यालय और कार्यालय‑स्तरीय अधिकारियों तक कई बार शिकायतें दर्ज करा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई भी तत्काल कार्रवाई नहीं हुई है। कई ने यह भी अनुरोध किया है कि अगर बाजार को आवासीय क्षेत्रों से दूर एक उचित जगह पर शिफ्ट किया जाए और वहां ढंग से सुविधाएं दी जाएं, तो वे इस मांग का समर्थन करेंगे। लेकिन अभी की तस्वीर यह है कि प्रशासन की तरफ से चुप्पी बरती जा रही है, जिससे निवासियों के मन में असुरक्षा और बेजुबानी का अहसास बढ़ता जा रहा है।
“घर का इकलौता चिराग” बुझ गया: उत्तम नगर मेट्रो के पास कैब का दरवाजा खुलने से स्कूटी सवार की कुचलकर मौत
द्वारका के उत्तम नगर वेस्ट मेट्रो स्टेशन के पास मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ; 30 वर्षीय दक्ष अपनी स्कूटी पर लौट रहे थे कि ओवरटेक करती बस ने उन्हें कुचल दिया, जबकि ठीक पहले ही सड़क पर खड़ी कैब का दरवाजा अचानक खुला था।
उत्तम नगर वेस्ट मेट्रो स्टेशन के पास सुबह की भीड़: कैब का दरवाजा खुलने से हुआ यह दुखद हादसा, जिसमें 30 वर्षीय दक्ष की जान चली गई।
Delhi News Today 05 Mar 2026
दिल्ली के द्वारका क्षेत्र में स्थित उत्तम नगर वेस्ट मेट्रो स्टेशन के पास मंगलवार सुबह सड़क यातायात ने एक परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। जब दक्ष 45 वर्षीय दक्ष अपनी स्कूटी पर स्थानीय मार्ग पर तेज गति से घर वापस लौट रहे थे, तो उनके लिए यह रास्ता आखिरी साबित हो गया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, दक्ष अपनी दादी को मेट्रो स्टेशन छोड़कर घर की तरफ लौट रहे थे, जहाँ उनके परिवार के लिए वह घर का एकमात्र आधार थे।
हादसा कैसे हुआ?
घटना के दृश्यदर्शी स्थानीय लोगों का कहना है कि उत्तम नगर वेस्ट मेट्रो स्टेशन के नीचे एक कैब खड़ी थी, जिसमें सवारी की तरफ से दादी उतराव की तैयारी कर रही थी। इसी बीच कार का दरवाजा अचानक खुल गया, जिससे दक्ष की तेजी से आ रही स्कूटी सीधे धारीदार दरवाजे से टकरा गई। टक्कर के बाद स्कूटी बिचल गई और दक्ष सड़क पर गिरते ही उस पर आगे से आ रही एक डीटीसी बस का पिछला पहिया आ गया, जिससे वे उसकी चपेट में आ गए। गंभीर चोटों के कारण उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
परिवार पर भारी दबाव
दक्ष की मौत से परिवार टूट चुका है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, वह घर का एकमात्र आय स्रोत था और अपने माता‑पिता के साथ छोटे व्यवसाय को संभाल रहा था। उनकी मां ने घटना के बाद रोते हुए बताया कि उन्होंने खुद दक्ष को मेट्रो स्टेशन छोड़ने के लिए टेक्सी बुलवाई थी, जिसका दरवाजा खुलने से यह दुर्घटना घटी। “हम रोज यहीं बस लेने आते हैं, लेकिन आज ये इंजेक्शन जैसा चुभ गया। हमें चाहे इस कैब ड्राइवर और बस चालक पर कठोर कार्रवाई कब तक होगी?” एक पड़ोसी ने यह सवाल उठाय।
जांच और निर्माण की चुनौती
दिल्ली पुलिस ने घटनास्थल उपलब्ध कराया है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज जब्त किए गए हैं, क्योंकि कई दृश्यदर्शी ने बताया कि वह दिन घनी भीड़ और रेहड़ियों के कारण दृश्य कम थे। पुलिस ने इस सपने में मुताबिक हत्या, लापरवाही और यातायात उल्लंघन की धाराएं दर्ज कर ली हैं, लेकिन जब तक विस्तृत रिपोर्ट नहीं आती, तब तक यह अस्पष्टता है कि कैब ड्राइवर किसके लिए उस दरवाजे को खोल रहा था और क्या उसने बैक साइड मिरर में स्कूटी को देखा था। यह हादसा दिल्ली सरकार के लिए एक और टेस्ट है—कि जब यहां ट्रैफिक लाइनें और सुरक्षा नियम बढ़ते हैं, तब भी सड़क के दैनिक चलन में लोगों की जान कितनी सस्ती लगती है।
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दिल्ली रिठाला: झुग्गी बस्ती में भीषण आग, 100 से ज्यादा झोपड़ियां जलकर राख, एक युवती की मौत
उत्तरी दिल्ली के रिठाला इलाके में तड़के झुग्गी बस्ती में अचानक लगी आग ने सैकड़ों झोपड़ियों को जलाकर खाक कर दिया; दमकल की 15 गाड़ियां मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन एक युवती अपनी जान गंवा बैठी।
रिठाला मेट्रो स्टेशन के निकट झुग्गी बस्ती में अचानक लगी भीषण आग; आग की लपटों ने दर्जनों झोपड़ियों को एकदम भस्म कर दिया।
Delhi News Today 05 Mar 2026
दिल्ली फायर ब्रिगेड के अनुसार, रिठाला इलाके में एक घनी आबादी वाली झुग्गी बस्ती में तड़के अचानक आग लग गई, जो तेजी से पूरे इलाके में फैल गई। इस सुबह आमतौर पर लगभग 70–80 झुग्गियों के जलने की बात सामने आई थी, लेकिन स्थानीय निवासियों और रिपोटर्स के मुताबिक अंततः कम से कम 100 से ज्यादा झोपड़ियां पूरी तरह जलकर राख हो गईं। आग धीरे‑धीरे खेतों से लगी झुग्गियों की तरफ बढ़ी और हल्के‑हल्के आग पकड़ने वाले सामान—लकड़ी, प्लास्टिक, रजाई, कागज—ने आग की लपटों को और भड़का दिया। लोग रात की गहराई में नींद से उठे तो उनके घर सिर्फ धुएं के गुबार और जले हुए फर्नीचर का मलबा बन चुके थे।
आग कैसे फैली और बचाव कार्य कैसे चला?
घटना के बारे में शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि आग रात या तड़के के बीच किसी रचक्कय या लापरवाही से शुरू हुई; फिलहाल उसे आधिकारिक तौर पर जांच के अंतर्गत रखा गया है। रिठाला मेट्रो स्टेशन के निकट की यह बस्ती इतनी घनी है कि हर झोपड़ी दूसरी से इंच‑इंच की दूरी पर है, जिससे आग के फैलाव को रोकना दमकलकर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। दिल्ली फायर ब्रिगेड ने तुरंत 15 दमकल गाड़ियां भेजीं, जिन्होंने करीब सुबह के समय तक लगातार पानी की बौछार करके आग पर नियंत्रण पाया। इस दौरान स्थानीय निवासी भी मिट्टी‑मलबा उठाकर या छोटे‑छोटे बाल्टियों से मदद करते नजर आए।
युवती की मौत और निवासियों की दहशत
इस हादसे में एक युवती की मौत की पुष्टि हुई है, जिसे उसके जल चुके घर के अंदर ही मलबे के नीचे मिला है। उसके परिवार के लोगों का रोना‑रोव कर रहा था, क्योंकि उसके पीछे घर का पूरा सहारा भी टूट चुका था। स्थानीय निवासियों ने बताया कि वह सुबह सूते जल्दी से नहीं उठ पाई या भागते समय आग की चपेट में आ गई। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोग भीतर से फंस गए थे, लेकिन दमकल और पुलिस की टीमों ने जल्दी अलार्म कराया और अधिकतर लोगों को बाहर निकाल लिया गया। फिर भी, अचानक हुए घटनाक्रम ने बस्ती के ज्यादातर लोगों को ट्रॉमा में धकेल दिया।
नुकसान और आगे की चुनौतियां
स्थानीय निवासियों के मुताबिक लगभग 300–400 परिवार प्रभावित हुए, क्योंकि हर झोपड़ी में एक से ज्यादा लोग रहते हैं। उनके पास न सिर्फ घर कमरे सब जल गए, बल्कि बेटी‑बेटों के स्कूल किताबें, पुरानी यादें, छोटी‑मोटी बचत और जरूरी दस्तावेज सब आग की शिकार हो गए। निवासियों ने ड्रेनेज और बिजली की लाइनों की अनियमितता, लगातार जलने वाले कबाड़ और घनी आबादी को आग के फैलाव के मुख्य कारण बताया। वे प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि झुग्गी बस्तियों को व्यवस्थित करने, अग्निशमन उपकरण लगाने और सुरक्षित आवासीय व्यवस्था की तरफ जल्दबाजी से कदम उठाया जाए, ताकि यह “दर्दनाक आदत” बार‑बार दोहरी ना जाए।


