दिल्ली के ओखला, गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल से निकाले गए इनर्ट में प्लास्टिक व लोहा मिलाया जा रहा है। इसे इको पार्क और खाली मैदानों में गैरकानूनी रूप से डंप किया जा रहा, पर्यावरण को खतरा।
दिल्ली के लैंडफिल साइट्स से निकला मिश्रित कचरा इको पार्क में डंप होता नजर आया, बड़ा पर्यावरणीय खतरा।
Delhi News Today
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कूड़े के विशाल पहाड़ों से अब प्लास्टिक, लोहा और अन्य हानिकारक कचरा निकल रहा है। ओखला, गाजीपुर और भलस्वा जैसे प्रमुख लैंडफिल साइट्स से निकाले जाने वाले ‘इनर्ट’ (निष्क्रिय मलबे) में प्लास्टिक बोतलें, धातु स्क्रैप और घरेलू कचरा मिलाया जा रहा है। इसे इको पार्क, खाली खेल मैदानों और नदी किनारों पर अवैध रूप से डंप किया जा रहा है। दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने इसकी शिकायत दर्ज की है, जो दिल्ली नगर निगम (MCD) की लापरवाही को उजागर करता है।
इससे मिट्टी प्रदूषण, जल संदूषण और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ गए हैं। लाखों दिल्लीवासी जो इन इलाकों के पास रहते हैं, अब जहरीली गैसों और बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। यह खुलासा पर्यावरण मंत्रालय की टीम के निरीक्षण के दौरान हुआ, जिसने MCD पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
विस्तार से: क्यों और कैसे हो रही अवैध डंपिंग
दिल्ली रोजाना 11,000 टन से अधिक कचरा पैदा करती है, लेकिन लैंडफिल साइट्स 95% क्षमता पर पहुंच चुकी हैं। इनर्ट सामग्री—जैसे मिट्टी, ईंट-बजरी—को निकालकर रिसाइकिल या डिस्पोज करने के नाम पर प्लास्टिक (30% तक) और लोहा (15% मिश्रण) मिलाया जाता है। कचरा माफिया ट्रक भरकर इसे बेचते हैं, जो ₹200-500 प्रति टन के हिसाब से इको पार्क प्रोजेक्ट्स में डाल दिया जाता है।
प्रक्रिया का ब्रेकडाउन:
लैंडफिल से निकासी: ओखला (70 लाख टन कचरा) से रोज 500 टन इनर्ट निकलता।
मिश्रण: प्लास्टिक बैग, आयरन स्क्रैप, ऑर्गेनिक वेस्ट मिलाकर ‘क्लीन फिल’ का दावा।
डंपिंग साइट्स: भलस्वा के पास यमुना फ्लडप्लेन्स, गाजीपुर के खाली प्लॉट्स।
लाभार्थी: ठेकेदार ₹10-15 लाख मासिक कमाते, MCD को चूना लगाते।
MCD का दावा है कि बायोमाइनिंग से कचरा कम हो रहा, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं 40% इनर्ट गंदा। सुप्रीम कोर्ट के 2019 आदेश के बावजूद कोई प्रगति नहीं। इससे भूजल दूषित हो रहा, मीथेन गैस रिसाव से आग लगने का खतरा। CPCB ने MCD को नोटिस जारी किया है।
अधिकारियों व विशेषज्ञों के बयान
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा, “दिल्ली लैंडफिल से अवैध डंपिंग असहनीय है। MCD पर सख्त कार्रवाई होगी, इको पार्क प्रोजेक्ट्स रोके जाएंगे।”
MCD आयुक्त गौरव गुप्ता बोले, “हम जांच कर रहे हैं। दोषी ठेकेदारों का लाइसेंस रद्द होगा।”
पर्यावरण कार्यकर्ता स्वाति मालीवाल ने ट्वीट किया, “दिल्ली के कूड़े के पहाड़ अब जहर फैला रहे। सरकार सोई हुई है, बच्चों का भविष्य खतरे में!”
NGO टॉक्सिक्स लिंक के दीपक अप्पास्वामी ने बताया, “प्लास्टिक मिश्रण से मिट्टी 20 साल बंजर हो जाती। तत्काल बैन जरूरी।”
पृष्ठभूमि और संदर्भ: दिल्ली कचरा संकट का इतिहास
दिल्ली का कचरा संकट पुराना है। 2012 से ओखला, गाजीपुर, भलस्वा पर बोझ—अब ऊंचाई 65 मीटर तक। 2020 स्वच्छ भारत मिशन के तहत वादा था 2025 तक शून्य लैंडफिल, लेकिन विफल। COVID ने कचरा 20% बढ़ाया। केंद्र ने ₹425 करोड़ दिए बायोमाइनिंग के लिए, लेकिन 10% ही खर्च।
तुलनात्मक आंकड़े:
| लैंडफिल | क्षमता (टन) | वर्तमान ऊंचाई | प्लास्टिक मिश्रण (%) |
|---|---|---|---|
| ओखला | 70 लाख | 65 मीटर | 35 |
| गाजीपुर | 50 लाख | 58 मीटर | 28 |
| भलस्वा | 55 लाख | 60 मीटर | 32 |
पड़ोसी राज्यों में भी समस्या, लेकिन दिल्ली सबसे बदतर। प्लास्टिक बैन 2022 के बाद काला बाजार फला। सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में डेडलाइन दी, लेकिन अनदेखी। जलवायु परिवर्तन से फ्लड रिस्क बढ़ा।
प्रभाव, निष्कर्ष और आगे क्या: पर्यावरण बचाने की चुनौती
यह डंपिंग दिल्ली के 2 करोड़ लोगों के लिए खतरा। कैंसर, श्वास रोग 30% बढ़े आसपास। यमुना जहरीली, पक्षी मर रहे। अर्थव्यापार को नुकसान: रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स रुके।
आगे क्या?
MCD को 3 माह में क्लीनअप।
सैटेलाइट मॉनिटरिंग से ट्रैकिंग।
पेनल्टी: ₹50 लाख जुर्माना।
वैकल्पिक: वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स।
दिल्ली कचरा डंपिंग का यह घोटाला सिस्टम की नाकामी दिखाता है। तत्काल कार्रवाई से ही शहर हरा-भरा बचेगा। अपडेट्स के लिए MCD पोर्टल चेक करें। For in depth click here
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