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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के हैजरपुर क्षेत्र में एक 45 वर्षीय युवक ने कर्ज के बोझ से तंग आकर आम के बाग के पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक, जाबिर अहमद, अपनी कैंसर‑पीड़ित पत्नी गुलिस्ता के इलाज में लगभग 25 लाख रुपये के कर्ज में फंस गए थे।
बास्टा रोड, हैजरपुर के आम बाग में आम के पेड़ से लटकता मिला शव। परिवार बता रहा है कि युवक कर्ज और पत्नी की बीमारी के दबाव में था।
घटना क्या हुई, किसने किया यह कदम?
जागरण के संवाददाता के अनुसार, बिजनौर सदर क्षेत्र के गांव फजलपुर ढाको निवासी 45 वर्षीय जाबिर अहमद ने हैजरपुर के आम बाग में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जाबिर ने बास्टा रोड पर स्थित आम बाग का ठेका लिया हुआ था, जहां वह काम करता था।
सोमवार देर शाम वह बाइक से हैजरपुर के आम बाग में पहुंचा और वहीं रह गया, लेकिन देर रात तक घर नहीं लौटा। जब वह लंबे समय तक घर नहीं पहुंचा, तो उसके स्वजन रात को ही उसे तलाशते हुए हैजरपुर पहुंचे। बाग में उन्हें उसकी बाइक खड़ी मिली, और कुछ ही दूरी पर आम के एक पेड़ पर जाबिर का शव लटका हुआ मिला।
पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कटवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या मान लिया गया है, क्योंकि फंदा डालने के साक्ष्य और परिजनों के बयान से ऐसा लगता है कि जाबिर ने खुद यह कदम उठाया।
पत्नी की बीमारी और 25 लाख का कर्ज
स्वजन के अनुसार, जाबिर अहमद की पत्नी गुलिस्ता करीब पांच साल से कैंसर से पीड़ित हैं। उनका इलाज चल रहा है, लेकिन खर्च इतना अधिक है कि जाबिर को कई लोगों और स्थानीय “कमेटी ग्रुप” से लगभग 25 लाख रुपये का कर्ज लेना पड़ा। इस बोझ से वह काफी समय से मानसिक रूप से तनावग्रस्त था।
कर्ज देने वालों की लगातार तकाजा, इलाज के खर्च और बढ़ते बिल ने जाबिर को इतना दबाव में डाल दिया कि वह उठता‑बैठता बीवी और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता करता रहता था। गुलिस्ता अब बिस्तर पर पड़ी हुई हैं, जागना‑सोना, खाना‑पीना सब मुश्किल हो गया है। उनकी आवाज लगभग कमजोर पड़ चुकी है और वह “जिंदगी और मौत के बीच जूझती” हुई दिख रही हैं।
पहले भी जहर खाने का था प्रयास
जाबिर पर आत्महत्या का दबाव सिर्फ पहली बार नहीं था। परिवार के अनुसार, लगभग पांच दिन पहले उसने जहर खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। उस समय स्वजनों ने उसे जहरीला पदार्थ खाते हुए देख लिया था और तुरंत प्रतिक्रिया दिखाते हुए उससे फ्लास्क छीन लिया था।
उसके बाद परिवार ने उसे समझाया‑बुझाया था कि उन सबके साथ रहकर कर्ज को धीरे‑धीरे चुकाया जा सकता है। जाबिर तब शांत हो गया था और आत्महत्या के कदम से लौट आया लगता था। लेकिन दबाव घटा नहीं, बल्कि बार‑बार तकाजा और बिल की धमकियां लगातार चलती रहीं, जिससे वह एक बार फिर मानसिक रूप से टूट गया।
घर में किसान के जाने के बाद क्या हुआ?
जाबिर और गुलिस्ता के तीन बच्चे हैं—दो बेटे और एक बेटी। जाबिर की आत्महत्या से घर का आधार हिल गया है। बच्चों के सिर से न केवल पिता का साया उठ गया है, बल्कि उनकी मां की गंभीर बीमारी भी उनके लिए भारी बोझ बन गई है।
स्वजन बताते हैं कि बच्चे रो‑रोकर बुरी तरह टूटे हुए हैं। वे अभी छोटे हैं, न तो पढ़ाई पूरी कर पाए हैं और न ही इस तरह की आर्थिक तकलीफ से निपटने की ताकत रखते हैं। गुलिस्ता की हालत देखकर उनका दिल टूटता है और वे रोते‑रोते ही सोते‑जागते हैं।
पुलिस क्या कर रही है, क्या है जांच की स्थिति?
हैजरपुर पुलिस ने घटना की सूचना मिलते ही मामला दर्ज कर लिया है। कोतवाल राहुल कुमार के अनुसार, जाबिर के स्वजनों से बयान लिए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रारंभिक चर्चा में इसे कर्ज और तनाव के चलते आत्महत्या के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन पुलिस अभी भी सभी पहलुओं की जांच कर रही है।


