Madrasa Rules
लखनऊ। सपा सरकार की 2016 मदरसा नियमावली में क्रांतिकारी बदलाव। मान्यता के लिए न्यूनतम 5 कक्षाएं, अलग ऑफिस व खेल का मैदान जरूरी। शिक्षा को रोजगारपरक व पारदर्शी बनाने पर जोर।
योगी आदित्यनाथ मदरसा शिक्षा सुधारों पर चर्चा करते हुए। कैप्शन: उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा को आधुनिक रूप देने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम।]
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की Yogi Adityanath सरकार राज्य की मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार 2016 में Akhilesh Yadav के कार्यकाल में बनी मदरसा नियमावली में संशोधन करने जा रही है। सरकार का कहना है कि इन सुधारों का उद्देश्य मदरसा शिक्षा को पारदर्शी, आधुनिक और रोजगारोन्मुखी बनाना है, ताकि छात्र मुख्यधारा की शिक्षा और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
इन बदलावों की जरूरत उस समय और बढ़ गई जब Supreme Court of India ने 2024 में मदरसा बोर्ड द्वारा दी जाने वाली कामिल (स्नातक) और फाजिल (परास्नातक) डिग्रियों को University Grants Commission के नियमों के खिलाफ बताते हुए असंवैधानिक करार दिया। इसके बाद राज्य सरकार ने नई व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की, ताकि मदरसा शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा ढांचे से जोड़ा जा सके।
मान्यता के लिए सख्त मानक
नई प्रस्तावित नियमावली में मदरसों की मान्यता के लिए बुनियादी सुविधाओं को अनिवार्य किया जाएगा। अब किसी मदरसे के पास सिर्फ अपना या किराए का भवन होना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उसमें न्यूनतम सुविधाएं भी सुनिश्चित करनी होंगी।
सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, मदरसा मान्यता के लिए भवन में कम से कम पांच कक्षाएं होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा एक अलग कार्यालय कक्ष और खेल का मैदान भी जरूरी होगा। प्राथमिक स्तर के मदरसों में कम से कम पांच कमरे होने चाहिए, जबकि जूनियर स्तर के लिए आठ कक्षाएं आवश्यक मानी जाएंगी।
इसके साथ ही पुस्तकालय, शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था और पर्याप्त फर्नीचर भी अनिवार्य मानकों में शामिल किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे छात्रों को बेहतर शिक्षण वातावरण मिलेगा और मदरसा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
पाठ्यक्रम में आधुनिक विषय
सरकार मदरसों के पाठ्यक्रम में भी बदलाव करना चाहती है ताकि छात्र आधुनिक शिक्षा से जुड़ सकें। प्रस्ताव के अनुसार कक्षा 1 से 3 तक का पाठ्यक्रम National Council of Educational Research and Training के अनुसार पढ़ाया जाएगा। वहीं कक्षा 4 से 8 तक का पाठ्यक्रम State Council of Educational Research and Training के आधार पर लागू होगा।
कक्षा 9 से 12 तक के लिए मदरसा बोर्ड नए सिरे से विषय तय करेगा। इन कक्षाओं में धार्मिक शिक्षा के साथ हिंदी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे।
इसके अलावा सरकार कंप्यूटर शिक्षा, स्पोकन इंग्लिश और अन्य व्यावसायिक विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर दे रही है। कई मदरसों में विज्ञान प्रयोगशाला और कंप्यूटर लैब स्थापित करने की भी योजना है ताकि छात्र व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकें।
शिक्षकों की भर्ती और प्रशिक्षण
नई व्यवस्था में शिक्षकों की योग्यता और भर्ती प्रक्रिया को भी बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार अब शिक्षक नियुक्ति छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर की जा सकती है।
मौजूदा शिक्षकों को भी आधुनिक विषय पढ़ाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए ब्रिज कोर्स चलाए जाने की योजना है, जिससे शिक्षक विज्ञान, गणित और कंप्यूटर जैसे विषय पढ़ाने में सक्षम बन सकें।
प्राथमिक स्तर के लिए विषय आधारित विशेषज्ञता तय की जाएगी और माध्यमिक स्तर पर प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इससे मदरसों में शिक्षण गुणवत्ता सुधारने की उम्मीद है।
सुधार की जरूरत क्यों पड़ी
इन सुधारों के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उच्च शिक्षा में मदरसा डिग्रियों की मान्यता का सवाल खड़ा हो गया था। इस समस्या को हल करने के लिए राज्य सरकार उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 में संशोधन का प्रस्ताव भी तैयार कर रही है, जिससे मदरसों को विश्वविद्यालयों से जोड़ा जा सके।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि 2016 की नियमावली में कई कमियां थीं। कई ऐसे मदरसे भी पाए गए जो सिर्फ कागजों पर चल रहे थे या जहां बुनियादी सुविधाएं और योग्य शिक्षक नहीं थे।
इसी कारण सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई संस्थानों की जांच कराई। इस दौरान हजारों मदरसों की मान्यता पर रोक लगाई गई और करीब 240 मदरसों की मान्यता रद्द भी की गई क्योंकि वहां छात्र संख्या निर्धारित मानकों से कम पाई गई।
डिजिटल निगरानी व्यवस्था
सरकार ने मदरसों की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था भी शुरू की है। वर्ष 2022 में एक ऑनलाइन मदरसा पोर्टल लॉन्च किया गया, जिसमें सभी मदरसों को पंजीकरण करना अनिवार्य किया गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 560 सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे और करीब 10,000 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों ने इस पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। वर्ष 2024 में करीब 513 मदरसों ने अपनी मान्यता स्वयं ही वापस कर दी क्योंकि वे निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे थे।
नई नियमावली लागू होने के बाद मान्यता देने से पहले सभी सुविधाओं का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
छात्रों और शिक्षकों पर असर
उत्तर प्रदेश में लगभग 1.2 लाख मदरसे हैं जिनमें करीब 25 लाख छात्र पढ़ते हैं। इनमें से लगभग 13,329 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं और इनमें 12 लाख से अधिक छात्र अध्ययन कर रहे हैं।
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से छात्रों को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलेंगे। कंप्यूटर, विज्ञान और आधुनिक विषयों की पढ़ाई से उन्हें उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरियों के लिए तैयारी करने में मदद मिलेगी।
साथ ही व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसे टेलरिंग, इलेक्ट्रिशियन या तकनीकी कौशल से जुड़े कोर्स भी जोड़े जा सकते हैं, जिससे छात्र रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
प्रतिक्रियाएं और आगे की प्रक्रिया
इन प्रस्तावित सुधारों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई शिक्षा विशेषज्ञ इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं और कहते हैं कि इससे मदरसा शिक्षा आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनेगी।
हालांकि कुछ मदरसा प्रबंधकों का कहना है कि छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों के मदरसों के लिए नई शर्तों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सरकार जल्द ही इन नियमों को कैबिनेट में पेश कर सकती है। मंजूरी मिलने के बाद मदरसों को नई व्यवस्था लागू करने के लिए लगभग छह महीने का समय दिया जा सकता है।
यदि कोई संस्था निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करती है तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है और वहां पढ़ने वाले छात्रों को पास के सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित किया जा सकता है।
सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक राज्य के सभी मदरसे आधुनिक मानकों के अनुरूप काम करें। अधिकारियों का मानना है कि इन सुधारों से लाखों छात्रों का भविष्य बेहतर होगा और मदरसा शिक्षा को नई दिशा मिलेगी।
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