Meerut Central Market Sealing
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में आवास विकास परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 44 आवासीय-व्यावसायिक संपत्तियों को सील किया, व्यापारियों का जबरदस्त विरोध और मेरठ बंद।
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में सीलिंग कार्रवाई के दौरान आवास विकास परिषद के अधिकारी और पुलिस बल मौजूद।
मेरठ, उत्तर प्रदेश:
मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में बुधवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की टीम ने अवैध व्यावसायिक निर्माणों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 44 संपत्तियों को सील कर दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई के दौरान व्यापारियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया, नारेबाजी की और सड़क पर धरना भी दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने पूरी कार्रवाई पूरी की।
कार्रवाई के विरोध में गुरुवार को मेरठ के कई बाजार बंद रहे और व्यापारिक संगठनों ने इसे मेरठ बंद का रूप दे दिया। कई दुकानों, पेट्रोल पंपों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने भी बंद का समर्थन किया।
सुबह से शुरू हुई कार्रवाई
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में सीलिंग की कार्रवाई बुधवार सुबह करीब 9:25 बजे शुरू हुई। आवास विकास परिषद की टीम मजिस्ट्रेट और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। प्रशासन ने इस कार्रवाई के लिए आठ अलग-अलग टीमों का गठन किया था। हर टीम में एक सहायक अभियंता, मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मी शामिल थे।
सबसे पहले जिस संपत्ति को सील किया गया, वह सैनफोर्ड हॉस्पिटल की बिल्डिंग थी। अधिकारियों का कहना था कि यह इमारत भी उन निर्माणों में शामिल है, जो मूल रूप से आवासीय भूमि पर बनाए गए थे लेकिन बाद में उन्हें व्यावसायिक उपयोग में लाया गया।
जैसे ही सीलिंग की प्रक्रिया शुरू हुई, बाजार के व्यापारी बड़ी संख्या में एकत्र हो गए और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
व्यापारियों का आरोप: पहले अनुमति दी, अब कार्रवाई क्यों?
प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों का कहना था कि उन्होंने भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज़ चेंज) के लिए शुल्क जमा किया था और उन्हें अनुमति भी दी गई थी। उनका दावा है कि लगभग 70 करोड़ रुपये विभिन्न शुल्कों के रूप में जमा किए गए थे।
कई व्यापारी हाथों में पोस्टर लेकर सड़क पर उतर आए और उन्होंने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि पहले अनुमति देकर अब उन्हें अवैध बताया जा रहा है।
एक व्यापारी ने कहा,
“हमने नियमों के अनुसार फीस दी, अनुमति ली और सालों से यहां कारोबार कर रहे हैं। अगर सब कुछ अवैध था तो हमें पहले क्यों नहीं रोका गया?”
व्यापारियों ने आवास विकास परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर बुलाने की भी मांग की।
प्रशासन का पक्ष: कोर्ट के आदेश का पालन जरूरी
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने व्यापारियों को समझाने की कोशिश की कि यह कार्रवाई सीधे अदालत के आदेश के तहत की जा रही है।
मेरठ के एडीएम सिटी ब्रजेश कुमार ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन के पास अदालत के निर्देशों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने व्यापारियों से शांति बनाए रखने की अपील की।
सीओ अभिषेक तिवारी ने भी प्रदर्शन कर रहे लोगों से सहयोग करने की अपील की और कहा कि किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शाम तक पूरी हुई सीलिंग
प्रशासनिक कार्रवाई पूरे दिन चलती रही। दोपहर करीब 2 बजे तक 39 संपत्तियों को सील किया जा चुका था। बाकी बची संपत्तियों को शाम करीब 5:30 बजे तक सील कर दिया गया।
बताया गया कि एक स्थान पर कार्रवाई में थोड़ा समय इसलिए लगा क्योंकि वहां स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा से सामान निकालने की प्रक्रिया चल रही थी।
जैसे ही सीलिंग की खबर फैली, बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई दुकानदारों ने जल्दबाजी में अपने प्रतिष्ठानों से सामान हटाना शुरू कर दिया।
मेरठ बंद का असर
सीलिंग के विरोध में गुरुवार को कई व्यापारी संगठनों ने मेरठ बंद का आह्वान किया। शहर के प्रमुख बाजारों में दुकानों के शटर बंद रहे।
व्यापारिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने इस बंद को समर्थन दिया और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई। कई व्यापारियों का कहना था कि बिना उनकी बात सुने सीधे सीलिंग करना गलत है।
व्यापारिक नेताओं और राजनीतिक प्रतिक्रिया
व्यापारी नेता अंजनेय सिंह और राहुल मलिक ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि परिषद ने पहले व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी थी और शुल्क भी लिया था।
उनका कहना है कि यदि अनुमति दी गई थी तो अब अचानक कार्रवाई करना व्यापारियों के साथ अन्याय है।
समाजवादी पार्टी के नेता अतुल प्रधान और संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने भी व्यापारियों का समर्थन किया और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
एक व्यापारी ने कहा,
“अगर हमारी इमारतें अवैध थीं तो इतने साल तक हमें यहां कारोबार क्यों करने दिया गया?”
लंबे समय से चल रहा विवाद
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट का विवाद कई वर्षों से चल रहा है। यहां कई इमारतें मूल रूप से आवासीय प्लॉट पर बनाई गई थीं, लेकिन समय के साथ उन्हें व्यावसायिक उपयोग में लाया जाने लगा।
यह मामला अदालत तक पहुंचा, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माणों पर सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए।
बताया जा रहा है कि इस मामले में कई अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। करीब 67 अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है और उनकी आय से अधिक संपत्ति की जांच भी हो सकती है।
इसके अलावा इस मामले में 45 अधिकारियों और 22 व्यापारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की भी चर्चा है।
गंगा घाट हादसे से जुड़ी दूसरी घटना
इसी दौरान मेरठ जिले में एक अलग दुखद घटना भी सामने आई। हस्तिनापुर के मखदूमपुर गंगा घाट पर चार भाइयों के डूबने की खबर से इलाके में शोक का माहौल बन गया।
रेस्क्यू अभियान के दौरान नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स की टीम ने तीन शव बरामद किए।
मृतकों की पहचान अभिषेक, दीपांशु और हिमांशु के रूप में हुई है, जबकि चौथे भाई प्रियांशु की तलाश जारी है।
बताया गया कि चारों भाई अपनी 102 वर्षीय दादी के अंतिम संस्कार के बाद गंगा में स्नान करने उतरे थे, तभी यह हादसा हो गया।
आगे क्या होगा?
सेंट्रल मार्केट मामले में अब सभी की नजर आगामी सुनवाई पर टिकी है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को करेगा, जिसमें आवास विकास परिषद को अपनी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।
दूसरी ओर, व्यापारी संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है।
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रशासन की नीति और व्यापारियों के अधिकारों के बीच संतुलन की एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।


