राज्य के दो हजार करोड़ रुपये से अधिक जीएसटी चोरी के मामलों की जांच में विशेष जांच दल एसआइटी ने कमर कस ली है।
UP News today 16Nov2025/sbkinews .in
लखनऊ में गठित एसआइटी विशेष जांच दल के नेतृत्व में 44 जिलों में दर्ज 188 मुकदमों की डीटेल जांच शुरू हो गई है। इन मामलों में बोगस फर्मों, नकली इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दुरुपयोग कर जीएसटी चोरी के आरोप शामिल हैं। एसआइटी की अध्यक्षता अधिकारी केएस ईमैनुएल कर रहे हैं, जबकि टीम में विशेष सुरक्षा बल के कमांडेंट अविनाश पांडेय, एसएसपी एसटीएफ घुले सुशील चंद्रभान और एएसपी विजिलेंस बबिता सिंह जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
एसआइटी ने राज्य कर विभाग से जीएसटी चोरी की सभी संबंधित पत्रावलियां अपने कब्जे में ले ली हैं और अब सभी मुकदमों की गहन विवेचना करेगी। राज्य कर आयुक्त नितिन बंसल ने कहा है कि एसआइटी को पूरी सहूलियत दी जाएगी और उससे जितने भी दस्तावेज मांगे जाएंगे, उपलब्ध कराए जाएंगे। 2018 के बाद के बड़े मामलों की भी जांच की जाएगी, जिसमें लखनऊ, मुरादाबाद, आगरा, मेरठ, कानपुर, वाराणसी, गाजीपुर और प्रयागराज जैसे जिलों के कई मुकदमे शामिल हैं।
एसआइटी की यह पहल सरकारी खजाने को हो रही भारी भरकम हानि को रोकने के लिए है। फर्जी फर्म और आईटीसी के प्लानिंग से बड़ी मात्रा में चोरी हो रही है, जिसकी जांच में डिजिटल बेटीवरण, कॉल रिकॉर्ड, और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण भी शामिल है।
इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि बड़े घोटालों का पर्दाफाश होगा और कर चोरी रोकने में मदद मिलेगी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने 26 नवंबर को सांसदों के आवास पर धरना प्रदर्शन और 17 दिसंबर को संपूर्ण बंद का ऐलान किया
UP News today 16Nov2025
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने जोरदार आंदोलन तेज कर दिया है। शनिवार को कैराना में हुए बार भवन की संयुक्त बैठक में तीन अहम प्रस्ताव पारित किए गए। सबसे पहले 26 नवंबर को सभी जिलों के अधिवक्ता अपने-अपने सांसदों के घर धरना प्रदर्शन करेंगे और संसद सत्र में हाईकोर्ट बेंच की मांग उठाने का आग्रह करेंगे।
इसके बाद 17 दिसंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संपूर्ण बंद रखा जाएगा, जिसमें रजिस्ट्री कार्यालय भी बंद रहेंगे। इस बंदी में सभी संगठनों एवं आम जनता का समर्थन शामिल होगा। तीसरे प्रस्ताव के तहत संघर्ष समिति की अगली बैठक की तारीख तय करने के लिए सभी जिलों के बार एसोसिएशन पदाधिकारियों के साथ संवाद किया जाएगा।
संयुक्त संघर्ष समिति के चेयरमैन संजय शर्मा और संयोजक राजेंद्र सिंह राणा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पश्चिमी यूपी के 22 जनपदों की जनता व अधिवक्ताओं के न्यायिक एवं प्रशासनिक अन्याय को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। अधिवक्ताओं ने आंदोलन को और अधिक व्यापक व प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है।
इस आंदोलन से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को न्याय की बेहतर पहुंच और तेज फैसले की उम्मीद है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामलों का भारी बोझ है, जिससे न्याय में अत्यधिक देरी हो रही है और बेंच की स्थापना से यह समस्या हल हो सकेगी।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से बर्खास्त तीन डॉक्टरों की सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू की जांच, दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े कई पहलु सामने आए
UP News today 16Nov2025
कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के तीन और डॉक्टरों हफीजुल रहमान (फिजियोलॉजी विभाग), हामिद अंसारी (एनेाटमी विभाग), और निसार अहमद (सर्जरी विभाग) की बर्खास्तगी के बाद उनकी जांच सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू की है। ये सभी डॉक्टर लंबे समय तक अपने-अपने विभागों से बिना सूचना के अनुपस्थित रहे और नोटिस देने के बावजूद जवाब नहीं दिया। वर्ष 2021 में शासन स्तर पर बर्खास्त किया गया।
खुफिया एजेंसियों ने शुक्रवार को इनके रिकॉर्ड जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि डॉ. शाहीन जो कि इसी कॉलेज की फार्माकोलॉजी विभाग की पूर्व प्रवक्ता थीं, ने विदेश जाने और पासपोर्ट बनाने का अनुरोध भी किया था। डॉ. हामिद पिछले साल कानपुर देहात के राजकीय मेडिकल कॉलेज में तैनात पाए गए हैं।
डॉ. शाहीन समेत इन डॉक्टरों पर आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ने का संदेह है और उनसे जुड़े कई सुराग जांच में मिले हैं। इनके खिलाफ खुदाई जारी है कि किस तरह से ये लोग देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त थे। विशेष एजेंसियां इनके संपर्कों और पुराने रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं।
कानपुर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी इन डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी दी और शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता को लेकर संजीदगी दिखाई है।
पर्यटकों के लिए खुले कार्बेट और राजाजी नेशनल पार्क, पांच माह बाद शुरू हुई जंगल सफारी और रात्रि विश्राम की सुविधा
UP News today 16Nov2025
नैनीताल के रामनगर से संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, पांच महीने की बंदी के बाद कार्बेट नेशनल पार्क और हरिद्वार स्थित राजाजी नेशनल पार्क शनिवार को पर्यटकों के लिए फिर से खोल दिए गए हैं। कार्बेट के ढिकाला और राजाजी के चीला पर्यटन जोन में पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया। कार्बेट में अब रात्रि विश्राम की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसके तहत कई पर्यटक जंगल के भीतर रात गुजार सकते हैं।
पहले दिन 232 पर्यटक कार्बेट के ढिकाला जोन में सफारी और रात्रि विश्राम के लिए पहुंचे। 128 पर्यटक आठ कैंटर में और 104 पर्यटक 38 जीपों में सफारी का आनंद लेने लगे। ढिकाला, बिजरानी, झिरना और ढेला क्षेत्रों में पर्यटक रात्रि विश्राम कर रहे हैं। कार्बेट नेशनल पार्क में 39 कक्षों और 23 डार्मेट्री की व्यवस्था की गई है।
राजाजी नेशनल पार्क के चीला, मोतीचूर, हरिद्वार और चिल्लावाली गेट भी पर्यटकों के लिए खुल गए हैं। पार्क प्रशासन ने पर्यटकों से जंगल की शांति बनाए रखने, जानवरों को परेशान न करने और कचरा न फैलाने की अपील की है।
वन क्षेत्राधिकारी बीडी तिवारी ने बताया कि राजाजी टाइगर रिजर्व में 300 से अधिक हाथी और करीब 50 बाघ विचरण करते हैं। यह देश का दूसरा प्रमुख टाइगर रिजर्व है जहां हजारों देशी-विदेशी सैलानी हर साल जंगल सफारी का आनंद लेते हैं।
टीजीटी परीक्षा टलने का बना नया रिकॉर्ड, 18-19 दिसंबर को प्रस्तावित परीक्षा फिर हो सकती है स्थगित
UP News today 16Nov2025
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा वर्ष 2022 की टीजीटी (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक) भर्ती परीक्षा अब पांचवीं बार स्थगित होने के कगार पर है। 3539 पदों के लिए जनवरी 2022 में विज्ञापन जारी किए जाने के बाद से परीक्षा की कई तिथियां प्रस्तावित हुईं, जिनमें 4-5 अप्रैल, 14-15 मई, 21-22 जुलाई और 30-31 जुलाई प्रमुख हैं, लेकिन कोई परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी। आयोग ने 18-19 दिसंबर को फिर से परीक्षा की तिथियां प्रस्तावित की हैं, लेकिन संशोधन अध्यादेश-2025 की वजह से नए अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी हो रही है, जिससे परीक्षा कराना मुश्किल प्रतीत हो रहा है।
नए अध्यक्ष के चुनाव तक परीक्षा की तैयारी संभव नहीं है और दिसंबर के मध्य में प्रस्तावित परीक्षा के आयोजन पर संशय बना हुआ है। अभ्यर्थी इस बार भी परीक्षा टलने की आशंका में हैं, क्योंकि आयोग में अभी तक अध्यक्ष का चयन नहीं हो पाया है।
यूपी में टीजीटी पीजीटी परीक्षा वर्ष 2022 से बार-बार स्थगित हो रही है, जिससे लाखों अभ्यर्थी निराश और मानसिक तनाव में हैं। ऐसे में आयोग से अपेक्षा है कि वे शीघ्र ही अध्यक्ष चुनकर परीक्षाओं का आयोजन सुनिश्चित करें ताकि शिक्षा क्षेत्र में विकास और पारदर्शिता बनी रहे।Danik Jakran
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