Smart Meter Issue
रिचार्ज खत्म होते ही बिजली कटने से दिहाड़ी मजदूर और गरीब परिवार परेशान, सरकार से नीति पर पुनर्विचार की मांग
लोकसभा में स्मार्ट मीटर और रिचार्ज की समस्या को उठाते नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद। गरीब और दिहाड़ी मजदूर परिवारों की बिजली कटौती से जुड़ी दिक्कतों पर जोरदार बयान।
संसद में उठा स्मार्ट बिजली मीटर का मुद्दा
उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में लगाए जा रहे स्मार्ट विद्युत मीटरों को लेकर बढ़ती शिकायतों का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने लोकसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर प्रणाली के कारण आम लोगों, खासकर गरीब और दिहाड़ी मजदूर परिवारों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
संसद में बोलते हुए उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर के रिचार्ज सिस्टम के कारण लोगों के सामने बिजली कटने का लगातार डर बना रहता है। कई जगहों पर रिचार्ज खत्म होते ही बिजली तुरंत बंद हो जाती है, जिससे गरीब परिवारों के लिए रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है।
“पहले पैसा दो, फिर बिजली लो” जैसी स्थिति
चंद्रशेखर आजाद ने अपने भाषण में कहा कि आजकल कई कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार में “पहले इस्तेमाल करो, फिर भरोसा करो” जैसी बात करती हैं। लेकिन बिजली के स्मार्ट मीटर सिस्टम में गरीब उपभोक्ताओं को ऐसा लगता है कि उनके सामने “पहले पैसा दो, फिर बिजली लो” जैसी व्यवस्था लागू कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था खासकर उन परिवारों पर ज्यादा दबाव डाल रही है जिनकी आय स्थिर नहीं होती। कई गरीब परिवारों को रोजाना खर्च चलाना ही मुश्किल होता है, ऐसे में बार-बार रिचार्ज कर पाना उनके लिए आसान नहीं है।
दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति
लोकसभा में बोलते हुए सांसद ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं। कई बार उन्हें कई दिनों तक काम नहीं मिलता, जिससे उनकी आय रुक जाती है। ऐसे में अगर बिजली के लिए पहले से रिचार्ज करना जरूरी हो, तो यह उनके लिए बड़ी समस्या बन जाती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर घर की बिजली अचानक कट जाए तो बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की जरूरतें और घर के अन्य काम कैसे चलेंगे। गर्मी या सर्दी के मौसम में बिजली का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
सांसद ने कहा कि ऐसी व्यवस्था गरीब परिवारों के जीवन को और मुश्किल बना सकती है, इसलिए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतें
चंद्रशेखर आजाद ने स्मार्ट मीटर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई जगहों से शिकायतें मिल रही हैं कि रिचार्ज कराने के बाद भी बिजली तुरंत चालू नहीं होती, या यूनिट अपेक्षा से ज्यादा तेजी से खत्म हो जाती हैं।
कुछ उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि उनके मीटर की रीडिंग सही नहीं दिखती या बिल अचानक ज्यादा आ जाता है। ग्रामीण और छोटे कस्बों में रहने वाले कई लोगों के लिए इस नई तकनीक को समझना भी आसान नहीं है।
सांसद ने कहा कि अगर किसी तकनीकी गड़बड़ी के कारण बिजली कट जाती है तो उपभोक्ता परेशान हो जाता है, जबकि उसे यह भी पता नहीं होता कि शिकायत कहां दर्ज कराई जाए।
ऊर्जा मंत्री का जवाब
इस मुद्दे पर जवाब देते हुए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने की व्यवस्था अनिवार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक वैकल्पिक प्रणाली है और उपभोक्ता चाहें तो पुराने पोस्टपेड मीटर का उपयोग जारी रख सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर से कई फायदे हो सकते हैं, जैसे बिलिंग में पारदर्शिता, सही रीडिंग और बिजली वितरण कंपनियों के लिए बेहतर प्रबंधन।
मंत्री के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में बिजली व्यवस्था को अधिक आधुनिक और व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकती है।
सांसद ने उठाए नए सवाल
ऊर्जा मंत्री के जवाब के बाद भी सांसद चंद्रशेखर आजाद ने अपनी चिंता दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि स्मार्ट मीटर वास्तव में ऐच्छिक व्यवस्था है, तो कई जगहों पर लोगों को इसे अपनाने के लिए दबाव क्यों महसूस हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की शिकायत है कि उनके मीटर बिना स्पष्ट जानकारी के प्रीपेड मोड में बदल दिए गए। ऐसे मामलों में रिचार्ज खत्म होते ही बिजली तुरंत बंद हो जाती है।
सांसद ने सरकार से मांग की कि इस व्यवस्था को लागू करते समय गरीब और कमजोर वर्ग की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों से शिकायतें
चंद्रशेखर आजाद ने अपने वक्तव्य में उत्तर प्रदेश के कई जिलों का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि शामली, बिजनौर, रामपुर और आसपास के इलाकों से स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों की शिकायतें सामने आई हैं।
कई जगह ग्रामीण उपभोक्ताओं और किसानों ने इस व्यवस्था को लेकर विरोध भी जताया है। उनका कहना है कि बिना पूरी जानकारी और तैयारी के नई तकनीक लागू करने से लोगों को परेशानी हो रही है।
नीति की समीक्षा की मांग
अंत में सांसद ने सरकार से अपील की कि स्मार्ट मीटर योजना को लागू करते समय आम जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य लोगों की जिंदगी आसान बनाना होना चाहिए, न कि उन्हें अतिरिक्त चिंता में डालना।
सांसद के अनुसार, अगर सरकार उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से सुने और आवश्यक सुधार करे, तो इससे बिजली व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा और व्यवस्था ज्यादा प्रभावी बन सकेगी।
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