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केंद्रीय विद्यालय परीक्षा से लौट रहे छात्रों से भरी बस में शॉर्ट सर्किट से धधक उठी आग। मांट थाने के दारोगा सतेंद्र सिंह ने कार से रोका वाहन, सभी को सुरक्षित उतारा।
बरेली हाईवे पर जलती स्कूल बस का भयावह दृश्य, दारोगा ने 38 छात्रों को बचाया।genrated by AI
मथुरा के चिनहाहरण के पास बरेली हाईवे पर बुधवार दोपहर दो बजे एक भयानक दृश्य देखने को मिला जब बलदेव पब्लिक स्कूल की स्कूल बस में चलते‑चलते अचानक आग लग गई। बस के पिछले हिस्से से निकलता धुआं और चालक की लापरवाही के बीच बस में सवार 38 छात्र–छात्राएं जान की नासूरी पर लटक गईं, लेकिन मांट थाने के उपनिरीक्षक सतेंद्र सिंह की सूझ‑बूझ ने इस बड़े हादसे को निकलवा दिया।
घटना का “कैसे” और “क्यों”
बलदेव पब्लिक स्कूल के 12वीं के छात्र–छात्राएं केंद्रीय विद्यालय मथुराबाड़ी में बोर्ड की परीक्षा देकर वापस लौट रहे थे। बस करीब 25 किमी दूरी तय कर रिफाइनरी क्षेत्र के पास पहुंची ही थी कि बस के पिछले हिस्से से अचानक धुआं उठने लगा। ड्राइवर रामदुलारे शायद धुएं को नोटिस नहीं कर पाए और बस को तेज रफ्तार से चलाते रहे, जिससे आग की लपटें और तेज हो गईं।
इसी बीच पीछे से अपनी निजी कार से आ रहे मांट थाने के उपनिरीक्षक (एसआई) सतेंद्र सिंह ने धुआं और चलती बस से निकलते मेटल के जलते टुकड़े देख लिए। उन्होंने तुरंत अपनी कार से लगातार हॉर्न बजाकर चालक का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की, लेकिन ड्राइवर ने बस नहीं रोकी। ऐसे में एसआई ने जोखिम उठाते हुए अपनी कार आगे ले जाकर बस के सामने खड़ी कर उसे ओवरटेक करते हुए रोकवाया।
बस रुकते ही एसआई और चालक ने मिलकर अपनी जान जोखिम में डालकर सभी 38 छात्र–छात्राओं को तेजी से नीचे उतार दिया। उतरते ही बस आग की लपटों में पूरी तरह घिर गई और कुछ ही मिनटों में पूरी बस खाक हो गई। दमकल की टीम ने आग पर काबू पाने के बाद प्राथमिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया।
एसआई सतेंद्र सिंह
“मैं वीआईपी ड्यूटी से लौट रहा था। रास्ते में बस के पीछे से धुआं और जलते तार दिखे। मैंने समझ लिया कि बस आग का गोला बनने वाली है। मैंने कार आगे लगाकर बस रोकवाई और बच्चों को सुरक्षित उतारा। उनकी जान बचाना ही सबसे बड़ा कर्तव्य था।”
स्कूल प्रशासन के प्रतिनिधि
“हम एसआई सतेंद्र सिंह के लिए आभार जताते हैं। उनकी तत्परता ने छात्रों की जान बचाई। घटना के बाद हमने वाहन की टेक्निकल जांच और री–इंस्पेक्शन की कार्रवाई शुरू कर दी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।”
उत्तर प्रदेश में अक्सर स्कूल गाड़ियों की लापरवाही और टेक्निकल लाचारी को लेकर चिंता जताई जाती रही है। इस घटना ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि चलती सड़क पर अनफिट या वर्षों से बिना ठीक–ठीक जांच के चलती बसों को कैसे जारी रखा जा रहा है। आर्टिकल रिलेटेड खबरों में मथुरा आरटीओ कार्यालय पर भी सवाल उठाए गए हैं कि क्या स्कूली वाहनों की रेगुलर जांच हो रही है या नहीं।
इससे पहले भी कई मामलों में शॉर्ट सर्किट के कारण स्कूल बसों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें किसी ने जान बचाने के लिए समय रहते बस रोकना जरूरी बताया है। इस बार भी घरवालों और शिक्षकों की टीम ने रिफाइनरी थाने क्षेत्र के आसपास बस के जलने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं, जिससे उनकी शार्ट सर्किट से जुड़ी चिंता और ज्यादा साफ हो गई।
और अन्य आग घटनाएं
इस घटना से कुछ ही दिन पहले गाजियाबाद–मेरठ रोडवेज रूट पर यूपी‑15 डीटी‑1221 नंबर की बस में भी धुआं उठने की घटना घटी थी, जहां चालक ने तत्परता दिखाते हुए बस रोक दी, जिससे बस में सवार 50 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित उतारा जा सका और कोई भी हताहत नहीं हुआ। इससे साफ होता है कि ड्राइवर की तत्परता और दूसरे वाहन चालकों की सूझ‑बूझ ने कई बार बड़े हादसे को टाला है।
स्कूल बसों के अलावा शहर–शहर चलने वाली पब्लिक ट्रांसपोर्ट बसों में भी बिजली और इंजन से जुड़े तकनीकी खराबी के कारण आग लगने के केस बढ़ रहे हैं, जिससे राज्य सरकार और ट्रैफिक विभाग को वाहनों की फोर्स इंस्पेक्शन और फायर सेफ्टी नियमों को लागू करना जरूरी बना रहा है।
Conclusion
मथुरा की यह घटना एक तरह से चेतावनी है कि स्कूल बसों में शॉर्ट सर्किट, बिजली की तारों की टूटी इन्सुलेशन या पुराने वाहनों की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्कूल प्रशासन, परिवहन विभाग और आरटीओ को मिलकर हर महीने स्कूल बसों की विशेष जांच, फायर एक्स्टिंग्विशर जांच और ड्राइवर की ट्रेनिंग की नियमित कार्रवाई करनी चाहिए।
साथ ही, घटना के बाद एसआई सतेंद्र सिंह के नाम जान बचाने वाले सूरमा और “देवदूत” जैसे शब्दों का उपयोग किया जा रहा
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