UP news Today
दोहरी लापरवाही: बिजली विभाग की उदासीनता से युवा पत्रकार की शहादत, वृंदावन यमुना में लोनिवि पुल हादसे से बोट पलटी—10 मृत, 22 सुरक्षित निकाले गए।
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo.
उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए दो दर्दनाक हादसों ने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला हादसा गोंडा जिले में हुआ, जहां एक पत्रकार की करंट लगने से मौत हो गई। वहीं दूसरा हादसा वृंदावन में हुआ, जहां यमुना नदी में नाव पलटने से 10 श्रद्धालुओं की जान चली गई। दोनों घटनाओं में एक समान बात सामने आई—अगर समय रहते जिम्मेदार विभागों ने कार्रवाई की होती तो शायद ये जानें बच सकती थीं।
बच्चों को बचाने की कोशिश में गई पत्रकार की जान
पहला हादसा गोंडा जिले के पथवलिया गांव में हुआ। शुक्रवार सुबह गांव के पास एक पेड़ से टकरा रही हाईटेंशन बिजली लाइन से लगातार चिंगारियां निकल रही थीं। आसपास बच्चे खेल रहे थे और खतरा बढ़ता जा रहा था।
इसी दौरान स्थानीय हिंदी दैनिक के पत्रकार रंजीत तिवारी ने बच्चों को खतरे से दूर हटाने की कोशिश की। लेकिन इसी बीच जर्जर बिजली का तार अचानक टूटकर उन पर गिर पड़ा। तेज करंट लगने से वह बुरी तरह झुलस गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई। रंजीत तिवारी अपने पीछे पत्नी पूजा, मां सरोज देवी और तीन छोटे बच्चों—7 साल की पूर्णिमा, 4 साल के आर्यन और डेढ़ साल के विराट—को छोड़ गए। गांव में शोक के कारण स्थानीय स्कूल भी बंद कर दिए गए।
सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई कि इस हाईटेंशन लाइन को लेकर पहले भी कई शिकायतें की जा चुकी थीं। देवीपाटन मंडल के मंडलायुक्त ने 20 जनवरी को ही बिजली विभाग को तार कसने या शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए बजट भी जारी किया गया था, लेकिन महीनों बीतने के बावजूद विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
गोंडा की जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने इस घटना पर दुख जताते हुए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता देने की बात भी कही है।
पुलिस ने इस मामले में बिजली विभाग के कई अधिकारियों—मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, उपखंड अभियंता और अवर अभियंता—के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो यह हादसा टाला जा सकता था।
वृंदावन में यमुना में नाव पलटी, 10 श्रद्धालुओं की मौत
दूसरी बड़ी दुर्घटना मथुरा जिले के पवित्र तीर्थ स्थल वृंदावन में हुई। जानकारी के अनुसार करीब 132 श्रद्धालु बसों से वृंदावन पहुंचे थे और राधाकृष्ण गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे।
दोपहर करीब 3 बजे निधिवन के दर्शन के बाद करीब 30 श्रद्धालु यमुना में नौकाविहार के लिए निकल पड़े। वे देशी बोट घाट से मोटरबोट में बैठकर मांट घाट की ओर जा रहे थे।
करीब 15 मिनट बाद अचानक तेज हवाएं चलने लगीं। उसी समय यमुना पर लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाए जा रहे पैंटून पुल का एक बड़ा पीपा बहकर मोटरबोट से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गई।
नाव पलटते ही चीख-पुकार मच गई और कई लोग नदी में गिर गए।
स्थानीय गोताखोरों और बचाव दल ने तुरंत राहत अभियान शुरू किया। करीब 30 मिनट के भीतर 22 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, हालांकि इनमें से 8 लोग घायल बताए जा रहे हैं।
मथुरा प्रशासन के अनुसार इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि नाव चालक समेत 5 लोग लापता बताए गए। बचाव कार्य में स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स और अन्य एजेंसियों की टीमें भी जुटी हुई हैं।
बताया जा रहा है कि इस दुर्घटना में एक ही परिवार के सात सदस्यों की मौत हो गई, जिससे माहौल और भी अधिक गमगीन हो गया।
प्रशासन ने दिए जांच और कार्रवाई के संकेत
दोनों घटनाओं के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गोंडा प्रशासन ने पत्रकार रंजीत तिवारी की मौत की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है। वहीं वृंदावन नाव हादसे में भी सुरक्षा व्यवस्था और पुल निर्माण के दौरान बरती गई सावधानियों की जांच की जा रही है।
हालांकि स्थानीय लोग और मृतकों के परिजन इस मामले में कड़ी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
गोंडा के ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार बिजली के खतरनाक तारों को हटाने की शिकायत की थी, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। वहीं वृंदावन हादसे के बाद श्रद्धालुओं के परिजन सवाल उठा रहे हैं कि पुल निर्माण के दौरान नावों के संचालन पर पाबंदी क्यों नहीं लगाई गई।
सिस्टम की लापरवाही पर उठे सवाल
दोनों घटनाओं ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर गोंडा में महीनों से खतरनाक बिजली लाइन को ठीक नहीं किया गया, जबकि दूसरी ओर वृंदावन में नदी पर निर्माण कार्य के बावजूद नाव संचालन जारी रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाए जाते तो ये हादसे रोके जा सकते थे।
सुधार की जरूरत
गोंडा में पत्रकार रंजीत तिवारी की मौत और वृंदावन में श्रद्धालुओं की दुखद मृत्यु सिर्फ हादसे नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही का परिणाम भी मानी जा रही है।
अब जरूरत इस बात की है कि इन घटनाओं से सबक लिया जाए। खतरनाक बिजली लाइनों को तुरंत हटाया जाए, निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन हो और नदी में नाव संचालन के लिए सख्त दिशानिर्देश लागू किए जाएं।
अगर ऐसा नहीं हुआ, तो डर यही है कि ऐसी दुखद घटनाएं फिर दोहराई जा सकती हैं।
for more in depth report click here
Read Also : School van on fire : मुजफ्फरनगर पुरकाजी में 7 बच्चे-चालक झुले, ग्रामीणों ने बचाई जान


