Uttarakhand News 05Oct2025

देहरादून में अतिक्रमण पर बुलडोजर की भरमार, ट्रांसपोर्टनगर के दुकानदारों में भारी असंतोष

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एमडीडीए और नगर निगम की संयुक्त टीम ने अतिक्रमण हटाने के लिए सख्त कार्रवाई की है। ट्रांसपोर्टनगर क्षेत्र में दुकानों के बाहर बने अतिक्रमणों को तोड़ा गया और अवैध निर्माणों को सील कर दिया गया।

यह अभियान शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने और व्यवस्थित विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। अधिकारियों ने यह निर्णय किया है कि भविष्य में भी अतिक्रमण नियंत्रण के लिए साप्ताहिक अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे।

इस कार्रवाई के दौरान प्रभावित दुकानदारों ने विरोध जताया और अपने किए गए अतिक्रमण हटाने के विरोध में आवाज उठाई। हालांकि प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि किसी को भी नियमानुसार कार्रवाई से बाहर नहीं रखा जाएगा।

एमडीडीए अधिकारीयों ने कहा कि यह कदम देहरादून की सुंदरता और पर्यावरण की रक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने स्थानीय जनता से सहयोग की अपील की है ताकि शहर का विकास सुचारू और संतुलित तरीके से हो सके।

शहर में व्यवस्थित और साफ-सुथरा वातावरण बनाए रखने के लिए यह अभियान निरंतर जारी रहेगा, जिससे नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर और सुविधाएं मुहैया हो सकें।

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की बदतर हालत, डॉक्टरों ने मोबाइल की रोशनी में किया मरीजों का इलाज

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उत्तराखंड के पौड़ी जिला अस्पताल में बिजली गुल होने से मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा। अस्पताल के जनरेटर में खराबी होने के कारण बिजली नहीं थी, जिससे डॉक्टरों को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में ही मरीजों का इलाज करना पड़ा।

यह मामला कई बार सामने आ चुका है, जहां अस्पताल में पर्याप्त बिजली की व्यवस्था न होने की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा आई है। स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी ने भी अस्पताल प्रशासन और सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की है।

विद्युत विभाग ने पुष्टि की है कि जनरेटर में तकनीकी खराबी के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई। प्रमुख अधिकारीयों ने इसे गंभीर बताया है और जल्द ही इसे सुधारने का आश्वासन दिया है।

स्वास्थ्य सेवाओं की इस हालत ने क्षेत्र के नागरिकों को चिंतित कर दिया है, क्योंकि बिजली बाधित होने से इमरजेंसी सेवाएं भी बाधित हुईं। जनता ने सरकार से मांग की है कि वे इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले ताकि भविष्य में मरीजों को ऐसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

अस्पताल प्रशासन को भी सजग होकर आवश्यक संसाधनों और आपातकालीन बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।

उत्तराखंड में बच्चों की कफ सिरप की बिक्री अब डॉक्टर के पर्चे पर ही

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राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप की वजह से हुई बच्चों की मौतों के बाद उत्तराखंड के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने कफ सिरप के सुरक्षित उपयोग के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब उत्तराखंड में दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं दिया जा सकेगा।

एफडीए ने स्पष्ट कहा है कि बच्चों में खांसी और जुकाम की दवाओं का उपयोग पूर्ण चिकित्सकीय परामर्श पर ही किया जाना चाहिए। कफ सिरप सहित अन्य आवश्यक दवाओं की बिक्री केवल डॉक्टर की लिखित पर्ची पर ही प्रतिबंधित की गई है।

यह कदम राजस्थान में कफ सिरप पीने से हुई बच्चे की मौत के बाद उठाया गया है ताकि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को रोका जा सके। प्रदेश भर के मेडिकल स्टोर्स को इस नियम का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं, और उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने आम जनता से भी आग्रह किया है कि दवाई लेने से पहले उचित चिकित्सकीय सलाह जरूर लें और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें। यह पहल बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उनकी जान बचाने के प्रयासों का हिस्सा है।

दवाओं के साइड इफेक्ट्स की रिपोर्टिंग अब होगी आसान, QR कोड और टोल-फ्री नंबर से मिलेगी सुविधा

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प्रदेशभर की खुदरा और थोक दवा दुकानों पर फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (PVPi) का QR कोड और टोल-फ्री नंबर प्रदर्शित किया जाएगा। यह पहल स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को दवा, टीका या चिकित्सा उपकरणों से होने वाले दुष्प्रभावों की सूचना सीधे और सुविधाजनक तरीके से रिपोर्ट करने में मदद करना है।

भारतीय फार्माकोपिया आयोग ने इस सुविधा के लिए एक स्वदेशी सॉफ्टवेयर भी विकसित किया है, जो दवाओं से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं के प्रबंधन में सहायक होगा। उपभोक्ता QR कोड स्कैन कर या टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

इस पहल से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे दुष्प्रभावों की त्वरित पहचान और समाधान संभव होगा, जिससे रोगियों की सुरक्षा और अनुभव बेहतर होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की जागरूकता बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी समस्या अनदेखी न हो, इस पहल को महत्वपूर्ण बताया है। दवाओं की निगरानी के लिए यह कदम चिकित्सा क्षेत्र में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को मजबूती देगा।

इस नए सिस्टम के तहत उपभोक्ता, चिकित्सक और फार्मेसी कर्मी भी दवाओं के दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग कर सकते हैं, जिससे व्यापक डेटा एकत्रित होगा और स्वास्थ्य प्रशासन की तैयारी बेहतर होगी।

उत्तराखंड में सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी, पुलिसकर्मी समेत दो पर मुकदमा दर्ज

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देहरादून में एक पुलिसकर्मी और उसके साथी ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर एक व्यक्ति से 15.21 लाख रुपये की ठगी की। पीड़ित ने नौकरी के लिए बैंक से लोन लेकर यह राशि जमा की थी, लेकिन बावजूद इसके कोई नौकरी नहीं मिली।

शिकायत के बाद भी पुलिस ने देर तक कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे पीड़ित को न्याय पाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और अब जांच में जुट गई है।

पुलिसकर्मी और उसके साथी पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के साथ ही उनकी जल्द गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों को सख्त कानून के तहत जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

इस मामले ने सरकारी नौकरी के नाम पर हो रही धोखाधड़ी पर सवाल खड़ा किया है और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत भी जताई है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें, ताकि इस तरह की ठगी को रोका जा सके।

यह घटना सरकारी सेवा में विश्वास को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए प्रशासन इसे गंभीरता से ले रहा है और ऐसे मामलों को रोकने के लिए नीतिगत सुधार की भी संभावना जताई जा रही है।

UKSSSC पेपर लीक के बाद नया फर्जीवाड़ा: फर्जी स्थायी निवासी व OBC सर्टिफिकेट जमा करने वाला पकड़ा गया

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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) में फर्जी दस्तावेज जमा करने का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने सुरेंद्र कुमार नामक एक शख्स को गिरफ्तार किया है, जिस पर फर्जी स्थायी निवास और ओबीसी प्रमाणपत्र जमा करने का आरोप है।

आयोग को संदेह है कि सुरेंद्र कुमार के अलावा अन्य कई अभ्यर्थी भी फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर परीक्षा में शामिल हुए हैं। पुलिस इन फर्जीवाड़ों की जांच कर रही है और मिलीभगत करने वाले अन्य आरोपितों को पकड़ने में लगी है।

यह मामला UKSSSC में हाल ही में हुए पेपर लीक विवाद के बाद आयोग की विश्वसनीयता पर एक और बड़ा सवाल खड़ा करता है। जांच अधिकारीयों ने कहा है कि वे इस मामले को संज्ञान में लेकर कड़ी कार्रवाई करेंगे ताकि चयन प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संचालित किया जा सके।

पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध दस्तावेज या धोखाधड़ी की जानकारी तत्काल पुलिस या आयोग के अधिकारियों को दें, ताकि फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके। यह कार्रवाई उत्तराखंड में सरकारी सेवा में भ्रष्टाचार को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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