Ballia Ambulance
बैरिया, बलिया: निजी एंबुलेंस के पेट्रोल खत्म होने पर पंप ने मना किया, SDM ने भी टाल दिया। 50 साल के छठू वर्मा रास्ते में तड़प-तड़प कर मर गए। DM ने अब एक्शन लिया।
यह तस्वीर बलिया के बैरिया इलाके में रुकी हुई एंबुलेंस और परेशान परिवार को दिखाती है
घटना का पूरा विवरण
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बैरिया थाना क्षेत्र में बुधवार रात (22 अप्रैल 2026) को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। टेंगरही गांव के 50 वर्षीय छठू वर्मा (छट्ठू शर्मा) को सीने में तेज दर्द हुआ। ग्राम प्रधान सत्येंद्र यादव उर्फ सतन यादव को सूचना दी गई। प्रधान ने निजी एंबुलेंस बुलाई और छठू व उनके परिजनों को लेकर जिला अस्पताल की ओर रवाना हुए। लेकिन महज 2 किमी चलने के बाद एंबुलेंस का पेट्रोल खत्म हो गया। पास के भूषण पेट्रोलियम फीलिंग स्टेशन पर पहुंचे, लेकिन सेल्समैन संजय कुमार ने “तेल खत्म” कहकर 5 लीटर भी नहीं दिया।
काफी गिड़गिड़ाहट के बाद प्रधान ने बैरिया SDM संजय कुशवाहा को फोन किया। आरोप है कि SDM ने “निजी एंबुलेंस है, मेरी जिम्मेदारी नहीं” कहकर बात टाल दी। आखिरकार 3-4 मोटरसाइकिलों से पेट्रोल निकालकर एंबुलेंस भरी गई। लेकिन रास्ते में ही छठू की सांसें थम गईं। अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। CMO डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि निजी एंबुलेंस का रिकॉर्ड परिवहन विभाग के पास होता है।
क्यों और कैसे हुई यह लापरवाही?
सबसे बड़ा सवाल – पेट्रोल पंप पर 8500 लीटर पेट्रोल और 4500 लीटर डीजल स्टॉक था, फिर एंबुलेंस को क्यों नहीं दिया? जांच में पता चला कि पंप पर तेल था, लेकिन सेल्समैन ने मना किया। रात का समय था, शायद नियमों का हवाला दिया। एंबुलेंस चालक ने ईंधन चेक नहीं किया – ये भी बड़ी गलती। SDM का रवैया शॉकिंग – इमरजेंसी में मदद न करना। ग्रामीण इलाकों में निजी एंबुलेंस पर निर्भरता बढ़ी है, लेकिन 108 जैसी सरकारी सुविधा दूर। ये सिस्टम फेलियर है।
प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के बयान
ग्राम प्रधान सत्येंद्र यादव बोले, “मैंने SDM को फोन किया, लेकिन उन्होंने निजी एंबुलेंस कहकर टाल दिया। पंप वाले ने भी इंकार किया। छठू तड़पते रहे।” SDM संजय कुशवाहा ने सफाई दी, “फोन आया था, लेकिन निजी वाहन था तो पंप संचालक से बात करने को कहा।” लेकिन DM मंगला प्रसाद सिंह भड़क गए। उन्होंने पंप संचालक पर कार्रवाई के आदेश दिए और SDM को शो-कॉज नोटिस जारी किया। CMO ने कहा, “मामला जांच में है।”
परिजनों का गुस्सा फूटा, “Yeh insaniyat ka khoon hai! थोड़ा तेल दे देते तो जान बच जाती।” पंप संचालक का फोन नहीं उठा।
बैकग्राउंड और टाइमलाइन
टाइमलाइन:
बुधवार रात 10 बजे: छठू को सीने में दर्द, प्रधान को सूचना।
10:15 बजे: निजी एंबुलेंस में जिला अस्पताल रवाना।
10:20 बजे (2 किमी बाद): पेट्रोल खत्म, पंप पर रुकना।
10:30 बजे: SDM को फोन, इंकार।
11 बजे: बाइक से पेट्रोल डाला।
रास्ते में: छठू की मौत।
रात 11:30: अस्पताल पहुंचे, मृत घोषित।
गुरुवार: DM एक्शन, शो-कॉज।
बैकग्राउंड: बलिया जैसे ग्रामीण जिलों में सरकारी एंबुलेंस कम। निजी वाले ईंधन चेक नहीं करते। पहले भी सितापुर, लखीमपुर में ऐसे केस – डीजल न मिलने से मरीज मरे। पेट्रोल संकट पुराना, लेकिन स्टॉक होने पर भी इंकार शर्मनाक।|Story also covered by Dainik jagran
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यह क्यों मायने रखता है
एक जिंदगी का सवाल – पेट्रोल पंप पर तेल था, फिर क्यों नहीं दिया? ये गरीबों की जिंदगी सस्ती बता रहा। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर, इमरजेंसी में कोई मदद नहीं। प्रशासन सो रहा – SDM का रवैया trust तोड़ता है। पूरे UP में ऐसे केस बढ़ें तो क्या होगा? परिवार बर्बाद, गांव शोक में।
स्थानीय पहलू
चांदपुर, बलिया जैसे इलाकों में ये रोज की कहानी। रात में मरीज हो तो सरकारी मदद कहां? Yeh issue kaafi serious hai – निजी एंबुलेंस लो, लेकिन फुल टैंक चेक करो। पूर्वांचल में पंप वाले रात बंद कर देते, SDM जैसे अफसर टालते। हमारे जैसे content writers को “बलिया एंबुलेंस मौत” जैसे keywords से traffic मिलेगा। स्थानीय स्तर पर 108 एंबुलेंस बढ़ाओ!
विशेषज्ञ विश्लेषण
पंपों पर इमरजेंसी फ्यूल पॉलिसी बनो। निजी एंबुलेंस को सरकारी मानो। Opinion: DM सही एक्शन ले रहे, लेकिन SDM जैसों को सजा दो।
आगे क्या?
DM एक्शन: पंप लाइसेंस सस्पेंड, सेल्समैन पर FIR।
SDM: शो-कॉज, ट्रांसफर पॉसिबल।
परिवार: मुआवजा 5 लाख+, जॉब।
सुधार: पंपों पर 24/7 इमरजेंसी फ्यूल, 108 एंबुलेंस बैरिया में।
निष्कर्ष
छठू वर्मा की मौत सिस्टम की नाकामी है। पेट्रोल था, मदद नहीं। DM जागे, लेकिन पहले क्यों नहीं? Yeh seekh hai – इमरजेंसी में इंसानियत पहले। गांववालों सावधान रहो, अधिकारियों जागो। न्याय मिले, वरना भरोसा टूटेगा।
Written by M.A.Arif


