Bijnor Smart Meter
सरकार ने घरों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगा दी। जिले में 1.03 लाख स्मार्ट मीटर लगे, जिनमें 87 हजार प्रीपेड। अब सिर्फ खराब मीटर या नए कनेक्शन पर लगेंगे।
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को बुधवार को बड़ी राहत मिली। शासन ने घरों और प्रतिष्ठानों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर पूर्ण रोक लगा दी। अब तक जिले में 1.03 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके हैं, जिनमें से 87 हजार से अधिक प्री-पेड हो गए हैं। ग्रामीणों का विरोध इतना तीव्र हो गया कि धामपुर के सुहागपुर गांव में सैकड़ों लोग लाठी-डंडे लेकर सड़क पर उतर आए। उन्होंने मीटर तोड़ने की खुली धमकी दी। सरकार के इस फैसले से गरीब-मजदूर वर्ग को राहत मिली है।
स्मार्ट मीटर का विरोध
पिछले साल विद्युत निगम ने बड़े स्तर पर स्मार्ट मीटर लगाना शुरू किया। पहले ये पोस्ट-पेड थे, फिर प्री-पेड। लेकिन जल्द ही शिकायतों का दौर शुरू हो गया। उपभोक्ताओं का कहना था कि बिल असामान्य रूप से बढ़ गए। प्री-पेड सिस्टम में बैलेंस खत्म होते ही बिजली कट जाती। दैनिक मजदूरी करने वाले ग्रामीण रोजाना रिचार्ज नहीं कर पाते। सुहागपुर गांव के रामचरण सिंह, अनीता रानी, सोनू कुमार, नाहिदा परवीन, मोहम्मद वाजिद और फातिमा खातून ने बताया, “हमारे पुराने मीटर ठीक चल रहे थे। स्मार्ट मीटर लगाने से साफ मना किया था। लेकिन विद्युत कर्मियों ने 10 हजार रुपये में मीटर बदलवाया। अब रोजाना माइनस बैलेंस आता है और बिजली बंद हो जाती।”
जिले में स्मार्ट मीटरों का पूरा ब्यौरा:
| मंडल/डिवीजन | कुल स्मार्ट मीटर | प्री-पेड मीटर |
|---|---|---|
| बिजनौर | 19,654 | 16,320 |
| चांदपुर | 16,699 | 3,733 |
| नजीबाबाद | 53,727 | – |
| नूरपुर | 9,367 | 8,084 |
| धामपुर | 18,773 | 15,168 |
| अफजलगढ़ | 11,060 | 9,383 |
| कुल | 1,03,280 | 87,688 |
कार्रवाई कैसे हुई?
विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता धर्मराज सिंह ने बताया, “शासन से साफ निर्देश मिले हैं। जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगेंगे। केवल खराब पुराने मीटर बदलने या नए कनेक्शन लेने पर ही स्मार्ट मीटर लगाया जाएगा।” बुधवार को जारी आदेश के बाद जिले भर में राहत की लहर दौड़ गई। पहले ग्रामीण कलेक्ट्रेट धरना दे रहे थे, अब आंदोलन शांत।
सुहागपुर का ऐतिहासिक प्रदर्शन
धामपुर के सुहागपुर गांव में बुधवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने लाठी-डंडे थामे सड़क जाम कर दी। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी सड़क पर। उन्होंने नारे लगाए – “स्मार्ट मीटर हटाओ, पुराना मीटर लाओ!” ग्रामीणों ने कहा कि मजदूरी से पेट पालते हैं, रोज रिचार्ज संभव नहीं। मीटर न हटाने पर तोड़ फोड़ की चेतावनी दी। इसके बाद सभी विद्युत कार्यालय पहुंचे और अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन सौंपा। विभाग ने तत्काल आश्वासन दिया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
स्मार्ट मीटर का विरोध पूरे उत्तर प्रदेश में फैल चुका था। प्रयागराज, मुरादाबाद, बरेली जैसे जिलों में ग्रामीण सामूहिक रूप से कनेक्शन कटवाने की धमकी दे रहे थे। शासन ने कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए। ज्यादा बिल आने, प्री-पेड सिस्टम की जटिलता और तकनीकी खराबी मुख्य कारण। यह उपभोक्ता अधिकारों की बड़ी जीत है। गरीब किसान-मजदूर वर्ग को न्याय मिला।
स्थानीय कोण
चांदपुर मंडल में 16,699 स्मार्ट मीटर लगे हैं। चांदपुर, चंदपुर के ग्रामीणों को विशेष राहत। पराली जलाने वाले किसान, दैनिक मजदूरी करने वाले परिवार अब परेशान नहीं। लेकिन सावधान रहें – नए घर या दुकान के कनेक्शन पर स्मार्ट मीटर अनिवार्य होगा। यह फैसला ग्रामीण भारत की वास्तविकता को दर्शाता है।
विश्लेषण:
स्मार्ट मीटर योजना ग्रामीण भारत के लिए समय से पहले थी। तकनीक अच्छी है लेकिन जागरूकता, रखरखाव और आर्थिक स्थिति का ध्यान नहीं रखा। “स्मार्ट मीटर हटाओ” जैसे कीवर्ड पूरे यूपी में ट्रेंड कर रहे। सरकार ने सही समय पर ब्रेक लगाया। भविष्य में हाइब्रिड सिस्टम (पोस्ट-पेड + ऐप मॉनिटरिंग) संभव। ग्रामीण आंदोलन ने राजनीतिक प्रभाव डाला।
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आगे क्या होगा?
कमेटी रिपोर्ट: शासन की जांच समिति फैसला लेगी।
खराब मीटर: केवल क्षतिग्रस्त मीटर ही बदले जाएंगे।
नए कनेक्शन: व्यवसायिक/घरेलू नए कनेक्शन पर स्मार्ट।
ग्रामीण आश्वासन: विभाग गांव-गांव जाकर भरोसा दिलाएगा।
कानूनी कार्रवाई: मीटर बदलने के नाम पर अनियमितता पर जांच।
निष्कर्ष
बिजनौर के 1.03 लाख उपभोक्ताओं को ऐतिहासिक राहत। सुहागपुर जैसे गांवों का धैर्यवान संघर्ष रंग लाया। स्मार्ट मीटर अब जरूरत पर आधारित। गरीब किसान-मजदूर की आवाज बुलंद हुई। सरकार ने सही समय पर कदम उठाया। लेकिन सतर्क रहें – तकनीक का विरोध नहीं, गलत अमल का विरोध जरूरी। ग्रामीण भारत ने साबित किया – जनता की ताकत सबसे बड़ी।
लिखित द्वारा एम.ए.अरिफ


