चलती बैटरी स्कूटी बनी आग का गोला,समन भेजेंगे तब एहसास होगा,दिल्ली के दमकल केंद्रों के लिए जमीन तो है,उत्तम नगर में तरुण हत्याकांड के बाद भड़काऊ वीडियो से तनाव।
शास्त्री पार्क में चलती बैटरी स्कूटी बनी आग का गोला: सवार ने कूदकर बचाई जान, धुआं देख भयंकर हादसा टला
उत्तरी पूर्वी दिल्ली में ई-स्कूटी की बैटरी में शॉर्ट सर्किट। दमकल ने 20 मिनट में आग बुझाई, वाहन पूरी तरह नष्ट।
शास्त्री पार्क मुख्य सड़क पर चलती बैटरी स्कूटी में अचानक आग लगी। सवार समय रहते कूदकर बाल-बाल बचा।
Delhi News Today 20 Mar 2026
उत्तरी पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क में गुरुवार दोपहर एक भयानक हादसा टल गया जब मुख्य सड़क पर चल रही बैटरी से चलने वाली स्कूटी अचानक आग का गोला बन गई। तेज रफ्तार से जा रही स्कूटी में धुआं निकलने लगा। सवार व्यक्ति ने जान बचाने के लिए तुरंत स्कूटी से छलांग लगा दी। देखते ही देखते पूरी स्कूटी धू-धू से जलने लगी। सूचना पर पहुंची दमकल की दो गाड़ियों ने 20 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया।
स्कूटी सवार ने बताया कि वह शास्त्री पार्क मेट्रो स्टेशन के पास से कश्मीरी गेट की ओर जा रहा था। अचानक स्कूटी लड़खड़ाने लगी और बैटरी क्षेत्र से धुआं निकलने लगा। अगले ही पल तेज धमाके के साथ आग लग गई। सवार ने बिना सोचे स्कूटी से कूदकर अपनी जान बचा ली। आसपास के लोग दौड़ पड़े और पानी डालने की कोशिश की लेकिन आग तेजी से फैल गई। दमकल कर्मियों ने आसपास के वाहनों को हटाकर आग पर काबू पाया। सवार को मामूली झुलस आने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया।
दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बैटरी में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। ई-स्कूटी का बैटरी पैक पूरी तरह जल चुका है। वाहन के मालिक ने बताया कि स्कूटी मात्र 6 महीने पुरानी थी और हाल ही में सर्विसिंग कराई गई थी। पुलिस ने स्कूटर कंपनी के दिल्ली शोरूम से संपर्क साधा है। वाहन जब्त कर जांच शुरू कर दी गई है।
दिल्ली-एनसीआर में बैटरी वाहनों के हादसे बढ़ रहे हैं। हाल ही में पुराना सीलमपुर में चार्जिंग स्कूटी से शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में आग लगी थी। फरीदाबाद में भी चलती इलेक्ट्रिक स्कूटी फट गई थी। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सस्ते चाइनीज बैटरी पैक खतरनाक साबित हो रहे हैं। दिल्ली सरकार ने ई-वाहनों के लिए सुरक्षा मानकों को कड़ा करने का प्रस्ताव रखा है।
शास्त्री पार्क हादसा ई-वाहनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। क्या समय रहते कड़े कदम उठेंगे या हादसे बढ़ते रहेंगे?
'समन भेजेंगे तब एहसास होगा': तुगलकाबाद किला अतिक्रमण सर्वे में देरी पर दिल्ली HC का अधिकारियों पर भड़ास
एजेंसी चुनने व समिति बनाने में महीनों की देरी। कोर्ट ने विरासत संरक्षण को प्राथमिकता देने का सख्त निर्देश दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने तुगलकाबाद किले के अतिक्रमण सर्वे में देरी पर नाराजगी जताई। अधिकारियों को समन भेजने की चेतावनी।
Delhi News Today 20 Mar 2026
दिल्ली हाईकोर्ट ने तुगलकाबाद किले में फैले अतिक्रमण के सर्वे में लगातार देरी पर केंद्रीय सरकार व संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा, “जब समन भेजेंगे तब अधिकारियों को एहसास होगा।” मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय व जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने सर्वे एजेंसी चुनने और समिति बनाने में 6 महीने लगाने पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार ऐतिहासिक विरासत के महत्व को नकार नहीं सकती।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने बताया कि सितंबर से मार्च तक केवल एजेंसी चयन व समिति गठन में ही समय व्यतीत हो गया। बेंच ने तल्खी से कहा, “आपने कोर्ट के आदेश के बावजूद 6 महीने लगाए सर्वे समिति बनाने में। समिति भी सर्वे शुरू नहीं कर पाई।” कोर्ट ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि बिना देरी के सर्वे पूरा करें वरना समन जारी होंगे। पीठ ने अगली सुनवाई के लिए 4 महीने का समय दिया।
तुगलकाबाद किला 14वीं शताब्दी का तुगलक वंश का ऐतिहासिक स्मारक है। UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल होने की प्रक्रिया चल रही है। किले के 6.5 किमी परिधि में हजारों अवैध निर्माण खड़े हो गए हैं। 2001 में ASI ने तोड़फोड़ शुरू की थी लेकिन हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। 2025 में फिर सर्वे आदेश दिया गया।
ASI ने MCD, DDA व अन्य एजेंसियों के असहयोग का रोना रोया। कोर्ट ने सभी को संयुक्त नीति बनाने का निर्देश दिया। प्रभावित निवासियों के पुनर्वास का भी प्रावधान किया। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिक्रमण हटाने से मानवीय समस्या भी उत्पन्न होगी।
दिल्ली HC ने तुगलकाबाद किला अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाने का भी आदेश दिया। ASI को किले संरक्षण का प्राथमिक दायित्व सौंपा। क्या 4 महीने में पूरा होगा सर्वे या फिर कोर्ट को समन जारी करने पड़ेंगे?
दिल्ली के दमकल केंद्रों के लिए जमीन तो है, बजट नहीं: पालम अग्निकांड के बाद चौंकाने वाली सच्चाई
13 नए फायर स्टेशनों के लिए चारदीवारी तैयार, पर वित्तीय तंगी से निर्माण रुका। द्वारका में 1999 से जमीन पड़ी सदी रही।
दिल्ली में 13 नए दमकल केंद्रों के लिए जमीन तैयार, बजट के अभाव में 25 साल पीछे अटके इंतजाम।
Delhi News Today 20 Mar 2026
पालम अग्निकांड में 9 मौतों के बाद दिल्ली के अग्नि सुरक्षा इंतजामों की पोल खुलने के बाद चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। राजधानी की तेजी से बढ़ती आबादी के बावजूद अग्नि सुरक्षा व्यवस्था 25 साल पुरानी हो चुकी है। 13 नए दमकल केंद्रों के लिए जमीन आवंटित है और चारदीवारी भी बन चुकी है, लेकिन बजट की भारी कमी के कारण इनका निर्माण शुरू ही नहीं हो सका। द्वारका सब-सिटी में 1999 से जमीन पड़ी सड़ रही है।
दिल्ली में वर्तमान में 66 दमकल स्टेशन कार्यरत हैं, जबकि बढ़ती आबादी के अनुपात में 100 से अधिक की आवश्यकता है। नई योजना के तहत द्वारका, रोहिणी, नजफगढ़, बवाना, मयूर विहार, जनकपुरी, नरेला समेत 13 स्थानों पर नए फायर स्टेशन प्रस्तावित हैं। सभी जगहों पर जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है और चारदीवारी का निर्माण भी समाप्त हो गया है। बावजूद इसके वित्तीय संकट के कारण टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम व सरकार दोनों के बजट में प्राथमिकता नहीं मिल रही।
दमकल विभाग में कर्मचारियों की भी भारी कमी है। 3000 से अधिक पद रिक्त हैं। 50 प्रतिशत दमकल वाहन पुराने और खराब हो चुके हैं। औसतन दमकल गाड़ियां घटनास्थल पर 20-30 मिनट की देरी से पहुंचती हैं। पालम अग्निकांड में पार्किंग जाम के कारण 31 मिनट देरी हुई थी। विभाग ने बताया कि नए स्टेशनों के लिए सालाना 200 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जो बजट में शामिल नहीं हो पा रहा।
पिछले पांच वर्षों में मार्च महीने में 8 बड़े अग्निकांड हो चुके हैं। चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग जैसे घनी आबादी वाले बाजारों में खतरा मंडरा रहा है। पालम त्रासदी के बाद उपराज्यपाल ने पूरे दिल्ली में फायर ऑडिट के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुआवजे का ऐलान किया, लेकिन बुनियादी ढांचे पर खामोशी बरकरार है।
दमकल विभाग ने विशेषज्ञ समिति गठित कर 20 नए स्टेशन खोलने का प्रस्ताव भेजा है। नगर निगम के 16,500 करोड़ के बजट में दमकल के लिए मात्र 100 करोड़ आवंटित हैं। क्या आगामी बजट सत्र में प्राथमिकता मिलेगी या पालम जैसी त्रासदियां दोहराई जाएंगी?
उत्तम नगर में तरुण हत्याकांड के बाद भड़काऊ वीडियो से तनाव: ईद से पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कड़ी की
होली विवाद में तरुण की पीट-पीटकर हत्या के बाद सोशल मीडिया पर उत्तेजक वीडियो वायरल। जेजे कॉलोनी पुलिस छावनी बनी।
उत्तम नगर जेजे कॉलोनी में भारी पुलिस बल तैनात। ईद से पहले सुरक्षा चाक-चौबंद।
Delhi News Today 20 Mar 2026
दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन तरुण हत्याकांड के बाद माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल भड़काऊ वीडियो के बाद ईद से पहले दिल्ली पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। जेजे कॉलोनी को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। PCR वैन की गश्त बढ़ाई गई है और खुफिया तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो गया है। DCP द्वारका ने शांति भंग करने वालों को कड़ी चेतावनी जारी की है।
4 मार्च को होली के दिन पानी के गुब्बारे को लेकर दो परिवारों में मामूली विवाद हुआ था। स्थिति बेकाबू हो गई और उत्तम नगर जेजे कॉलोनी में 26 वर्षीय तरुण को 16-20 लोगों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस ने अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें दो नाबालिग भी शामिल हैं। SIT इस मामले की जांच कर रही है। 50 साल पुरानी दुश्मनी के कारण तनाव बढ़ा। हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया पर वायरल भड़काऊ वीडियो में हत्यारों के नाम, फोन नंबर और घर दिखाए गए। प्रदर्शन के दृश्य और नफरत भरे मैसेज ने दोनों समुदायों में आक्रोश भड़का दिया। पुलिस ने 25 सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक कर तीन FIR दर्ज की हैं।
ईद से पहले दिल्ली पुलिस ने पांच स्तर की सुरक्षा रणनीति अपनाई है। 500 से अधिक पुलिसकर्मियों और RAF दस्तों को तैनात किया गया है। सभी CCTV कैमरों पर 24×7 निगरानी हो रही है। हर गली में PCR वैन गश्त कर रही हैं। सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट तुरंत हटाए जा रहे हैं। मस्जिदों और धार्मिक स्थलों पर विशेष सुरक्षा है। पीड़ित परिवार ने CBI जांच की मांग की है। हिंदू संगठनों ने बुलडोजर एक्शन की बात कही जबकि मुस्लिम समुदाय ने शांति की अपील की। RWA अध्यक्ष ने कहा कि पुरानी दुश्मनी नई पीढ़ी को न बिगाड़े।
होली के बाद लगातार प्रदर्शन हुए। मेट्रो स्टेशन जाम हुआ, थाने का घेराव हुआ। SIT ने 40 संदिग्धों की लिस्ट तैयार की है। सुप्रीम कोर्ट के वकील पीड़ित परिवार के साथ हैं। दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण ईद का भरोसा दिया है। क्या सामुदायिक सद्भाव लौटेगा?
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पटियाला हाउस कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 'एक सजा की अवधि दूसरे मामले में सेटऑफ नहीं होगी'
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने स्पष्ट किया – आरोपी दो अलग-अलग मामलों में एक ही जेल समय का लाभ नहीं ले सकता।
पटियाला हाउस कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला – एक सजा की अवधि दूसरे मामले में नहीं घटेगी।
Delhi News Today 20 Mar 2026
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने भारतीय न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने स्पष्ट शब्दों में फैसला सुनाया कि एक सजा की अवधि दूसरे मामले में सेटऑफ नहीं होगी। यह फैसला एक आरोपी के दो अलग-अलग मामलों से जुड़ा था, जहां आरोपी ने एक ही जेल समय को दोनों मामलों में सेटऑफ करने की कोशिश की। कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया, जिससे अपराधियों के लिए सजा कठोर हो गई। यह पटियाला हाउस कोर्ट फैसला न सिर्फ कानूनी सिद्धांतों को मजबूत करता है, बल्कि न्याय की गति को तेज करने में भी मददगार साबित होगा।
फैसले का विस्तार: क्यों और कैसे लिया गया यह निर्णय?
यह मामला दो अलग-अलग आपराधिक घटनाओं से जुड़ा था। आरोपी पर पहला मामला दर्ज होने के बाद उसे जेल हुई, और इसी जेल अवधि को दूसरे मामले की सजा से सेटऑफ करने की मांग की गई। सजा सेटऑफ नियम के तहत सामान्यतः आरोपी को पहले की जेल का लाभ मिलता है, लेकिन न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने कानूनी प्रावधानों की गहन जांच की। उन्होंने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 428 का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रावधान केवल एक ही मामले या जुड़े हुए मामलों पर लागू होता है। दो स्वतंत्र मामलों में एक ही जेल समय को दोहराना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
कोर्ट ने तर्क दिया कि यदि ऐसा अनुमति दी गई, तो अपराधी बिना किसी भय के नए अपराध कर सकते हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने अपने फैसले में लिखा, “आरोपी दो अलग-अलग मामलों में एक ही जेल समय का लाभ नहीं ले सकता।” यह निर्णय 20 मार्च 2026 को सुनाया गया, जो पटियाला हाउस कोर्ट की बेंच में दर्ज हो चुका है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट स्तर पर मिसाल बनेगा। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत सबूत पेश किए, जिसमें आरोपी की दोनों घटनाओं में संलिप्तता साबित हुई।
पृष्ठभूमि और संदर्भ: सजा सेटऑफ का कानूनी इतिहास
भारतीय न्याय व्यवस्था में सजा सेटऑफ नियम की अवधारणा 1970 के दशक से चली आ रही है। CrPC की धारा 428 के अनुसार, यदि आरोपी जांच या ट्रायल के दौरान जेल में रह चुका है, तो उस अवधि को अंतिम सजा से घटाया जा सकता है। लेकिन कई मामलों में इसका दुरुपयोग हुआ, जैसे कि सुप्रीम कोर्ट के 2012 के फैसले में (सुनील कुमार बनाम पंजाब राज्य), जहां जुड़े मामलों पर ही सेटऑफ की अनुमति दी गई। पटियाला हाउस कोर्ट का यह पटियाला हाउस कोर्ट फैसला उन अस्पष्टताओं को दूर करता है।
पिछले वर्षों में दिल्ली-NCR में अपराधों की बढ़ती संख्या के बीच ऐसे फैसलों की जरूरत महसूस हो रही थी। 2025 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, दोहरे मामलों में सेटऑफ के दुरुपयोग से 15% मामलों में सजा में कमी आई। यह फैसला दो मामलों में जेल समय की स्पष्ट व्याख्या देता है, जो जिला कोर्ट्स के लिए बाध्यकारी होगा। पटियाला हाउस कोर्ट, जो दिल्ली की प्रमुख अदालतों में से एक है, ने पहले भी कई लैंडमार्क फैसले दिए हैं, जैसे कि 2024 के किसान आंदोलन से जुड़े मामले।
निष्कर्ष: आगे क्या होगा?
यह पटियाला हाउस कोर्ट का क्रांतिकारी फैसला अपराधियों के लिए चेतावनी है। अब सजा सेटऑफ नियम सख्ती से लागू होंगे, जिससे न्याय प्रक्रिया तेज और निष्पक्ष बनेगी। आरोपी पक्ष अपील कर सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि हाई कोर्ट इसे बरकरार रखेगा। सरकार को इस दिशा में नए दिशानिर्देश जारी करने चाहिए। आम नागरिकों के लिए यह न्याय की मजबूत दीवार है। क्या यह फैसला पूरे देश में लागू होगा? आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की नजर रहेगी।


