Delhi News Today,पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन में पिछले एक महीने से पीने के पानी की सप्लाई में सीवर का दूषित पानी मिल रहा है। पुरानी और जर्जर लाइनों के कारण यह गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है, जबकि जल बोर्ड और स्थानीय नेताओं की ओर से अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है।
दिलशाद गार्डन के निवासियों को नलों से बदबूदार, सीवर से मिला दूषित पानी मिल रहा है, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ गया है।
Delhi News Today: दिलशाद गार्डन में नलों से निकल रहा सीवर का पानी, हादसे का इंतजार
पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन में एक गंभीर पेयजल संकट सामने आया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले एक महीने से उनके घरों के नलों से साफ पानी की जगह सीवर का दूषित पानी निकल रहा है। इस वजह से यहां लगभग पांच हजार लोगों की सेहत को सीधा खतरा है, क्योंकि वे अनजाने में बीमारी फैलाने वाले दूषित जल का सेवन कर रहे हैं।
निवासियों ने दिल्ली जल बोर्ड, नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से शिकायतें की हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। जल बोर्ड ने केवल नमूने जांच के लिए लिए हैं, जबकि लोग रोज‑रोज़ बीमारी, उल्टी, दस्त और त्वचा संक्रमण जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं।
डिटेल्स: पेयजल में सीवर कैसे घुस रहा है?
इस सैनिटेशन संक्रमण की मुख्य वजह पुरानी, जर्जर और लीक हो रही पेयजल और सीवर लाइनें बताई जा रही हैं。 दिलशाद गार्डन के बाजार‑स्तर पर दोनों पाइपलाइनें एक ही नाली में बिछी हैं, और समय के साथ उनकी सीलिंग टूट गई है। जब सीवर प्रेशर में होता है और फाइट प्रेशर कम, तो सीवर का गंदा पानी रिवर्स‑फ्लो होकर पीने के पाइप में घुस जाता है।
स्थानीय वार्ड ऑफिसर ने एक रिपोर्ट में माना है कि यहां की लाइनें 20–25 साल पुरानी हैं और उनका कभी पूरा ओवरहॉल नहीं हुआ। जल बोर्ड की तकनीकी टीम भी मानती है कि बिना पूरे ज़ोन में पाइप‑रीप्लेसमेंट या नए नेटवर्क के यह समस्या नहीं जा सकती। लेकिन ठोस योजना और फंड अभी “विचाराधीन” चरण में हैं, जबकि लोगों को रोज़ के लिए सुरक्षित पानी की खुराक की आवश्यकता है।
निवासियों से कथन
अशोक वर्मा, 35 वर्ष (पाकेट D, दिलशाद गार्डन):
“पिछले महीने से हमारे नल से जो पानी आता है, उसकी बदबू आती है और रंग हल्का भूरापन लिए हुए है। मैंने बच्चे को इस पानी से नहलाना रोक दिया है क्योंकि पिछले हफ्ते दो बच्चों में दस्त और त्वचा की खुजली की शिकायत हुई। जल बोर्ड ने बस सैंपल लिए और कहा ‘अभी परिणाम पेंडिंग हैं’। ये वादे कब खत्म होंगे?”
रेखा गुप्ता, 50 वर्ष (स्टील मार्केट के पास):
“हर घर में कम से कम दो boro‑बाल्टी पानी घर में स्टोर करके रखना पड़ रहा है, फिर भी ये दूषित पानी नलों में आ जाता है। अगर सीवर मिला पानी इतनी देर तक चला रहा है तो बीमारी का बड़ा दायरा खुल जाएगा – टाइफाइड, हेपेटाइटिस और स्किन इंफेक्शन का पूरा संकट।
अनिल कुमार (स्थानीय नगर सेवा संगठन):
“हमने तीन बार ज्ञापन दिया, एक रोड शो निकाला और सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया, लेकिन जवाब यह मिला कि ‘जल्द ही लाइनें बदली जाएंगी’। लेकिन फिलहाल NGO और दानदाता संस्थाएं आ सकती हैं, जल बोर्ड और नगर निगम के दरवाजे बंद रहते हैं।”
बैकग्राउंड / संदर्भ: दिल्ली में पेयजल संकट की स्थिति
दिल्ली में पेयजल की समस्या नई नहीं है। शहर की बढ़ती आबादी और पार्श्व‑क्षेत्रों में बढ़ता हाउसिंग कॉम्प्लेक्स ने पानी की मांग और दबाव दोनों बढ़ा दिए हैं। 2025–26 के बजट में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सरकार ने जल आपूर्ति और बोर्ड अपग्रेड के लिए बड़े फंड रखे, लेकिन ये योजनाएं अभी नए जलाशयों, अंडरग्राउंड टैंक और बूस्टर पंप प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित हैं, जबकि अतिपुरानी नेटवर्क की तत्काल जगह‑दर‑जगह रिप्लेसमेंट योजना नहीं चल रही।
दिलशाद गार्डन जैसे इलाके दश‑दशक से बस सप्टेन या मोल्डेड बाजार‑स्तर की व्यवस्थाओं पर चलते रहे, और जब प्रेशर या भौगोलिक स्थिति बदलती है, तो सीवर‑पानी मिश्रण जैसी घटनाएं हमेशा होती रही हैं। दक्षिणी दिल्ली के Ramnagar जैसे इलाकों में पिछले साल भी सीवर के मल‑एवं‑मूत्र मिलने की शिकायतें आई थीं, जो दिल्ली जल बोर्ड की लाइन‑डाइनिंग और निगरानी में चूक को उजागर करती हैं। for in depth click here
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