Merrut news : मेरठ हर्ष फायरिंग दूल्हे के चाचा ने ली राजमिस्त्री की जान, मातम में बदली शादी की खुशियां!

कंकरखेड़ा के खड़ौली गांव में दुल्हन के स्वागत के दौरान चचिया ससुर ने की अंधाधुंध हर्ष फायरिंग; छत पर अर्घ्य दे रहे निर्दोष सुभाष प्रजापति की गर्दन में लगी गोली – आरोपी गिरफ्तार।

मेरठ

 मेरठ के कंकरखेड़ा में खड़ौली गांव का घटनास्थल

मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खड़ौली गांव में गुरुवार सुबह शादी की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब एक दर्दनाक हर्ष फायरिंग की घटना ने 45 वर्षीय निर्दोष राजमिस्त्री सुभाष प्रजापति की जान ले ली। घटना उस समय हुई जब दूल्हे आदेश कुमार की बारात सुबह वापस लौटी और घर के बाहर दुल्हन प्रियंका का स्वागत किया जा रहा था। 

दूल्हे के चचिया ससुर संदीप उर्फ विक्की ने अपने दोस्त की लाइसेंसी पिस्टल से ताबड़तोड़ तीन राउंड हवाई फायरिंग शुरू कर दी। इसी दौरान सामने वाले मकान की पहली मंजिल की छत पर सुभाष प्रजापति सूर्यदेव को जल अर्पित कर रहे थे। एक गोली सुभाष की गर्दन में जा लगी, जिससे वह लहूलुहान होकर फर्श पर गिर पड़े ।

घटना का विवरण: क्यों हुई यह चूक?

सुभाष प्रजापति, जो मूल रूप से मुजफ्फरनगर के ताल्डा गांव के रहने वाले थे, पिछले 20 सालों से खड़ौली में किराए के मकान में रह रहे थे। चश्मदीदों के अनुसार, जब संदीप ने फायरिंग शुरू की, तो सुभाष ने उन्हें रोकने की कोशिश भी की थी, लेकिन संदीप नहीं रुके। गोली लगने के बाद सुभाष को फौरन अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के तुरंत बाद दुल्हन को घर में छोड़कर दूल्हे का पूरा परिवार घर से फरार हो गया।

गुस्साए स्वजनों और स्थानीय लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर भारी हंगामा किया और पुलिस को शव उठाने से भी रोक दिया। बाद में पुलिस अधिकारियों के समझाने और आरोपी की गिरफ्तारी के आश्वासन के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया ।

पुलिस की कार्रवाई और कानूनी शिकंजा

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। सीओ प्रकाश चंद्र अग्रवाल के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने छापेमारी की और घटना के करीब पांच घंटे बाद मुख्य आरोपी संदीप को गिरफ्तार कर लिया । पुलिस ने उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त 32 बोर की लाइसेंसी पिस्टल भी बरामद कर ली है। एसएसपी अविनाश पांडेय ने स्पष्ट किया है कि आरोपी के लाइसेंस के निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और हत्या का मुकदमा दर्ज कर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है ।

यह क्यों मायने रखता है

 

यह घटना फिर से साबित करती है कि ‘हर्ष फायरिंग’ कितनी घातक और गैर-जिम्मेदाराना परंपरा है। एक निर्दोष व्यक्ति, जो अपने घर पर शांति से पूजा कर रहा था, महज कुछ मिनटों की ‘दिखावटी खुशी’ की भेंट चढ़ गया। यह समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि जश्न के नाम पर हथियारों का प्रदर्शन और फायरिंग न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि किसी के जीवन को भी खतरे में डाल सकती है। कानून का उल्लंघन करने वाले न केवल स्वयं मुसीबत में पड़ते हैं, बल्कि एक पूरे परिवार को ताउम्र का दर्द दे जाते हैं ।

भारत का दृष्टिकोण

 

उत्तर प्रदेश, विशेषकर मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में हर्ष फायरिंग की घटनाएं एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। कानून सख्त होने के बावजूद अक्सर शादी-विवाहों में लोग अपनी ‘दबंगई’ दिखाने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करते हैं। यह घटना न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि प्रशासन के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि बार-बार चेतावनी के बावजूद ऐसी घटनाएं थम नहीं रही हैं। Hinglish में कहें तो, “Yeh show-off ka culture bahut dangerous ho gaya hai, ek innocent life chali gayi!” सरकार को अब और भी कड़े कदम उठाने की जरूरत है ।

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विशेषज्ञ विश्लेषण

एक न्यूज राइटर के नजरिए से देखें तो मेरठ में हर्ष फायरिंग के मामलों में पिछले कुछ समय में इजाफा हुआ है। मुख्य समस्या कानून का डर कम होना और ‘स्टेटस सिंबल’ के रूप में हथियारों का प्रयोग है। अक्सर अपराधी बारात के जोश में कानून को ताक पर रख देते हैं। अगर समय रहते लाइसेंसी हथियारों के प्रदर्शन पर पूरी तरह पाबंदी नहीं लगी, तो ऐसी दुखद घटनाएं होती रहेंगी। Logical insight यही है कि प्रशासन को केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि हर शादी में होने वाली ऐसी फायरिंग पर पैनी नजर रखनी होगी।|This story also cover by Hindustan 

निष्कर्ष

 

मेरठ का यह मामला एक बार फिर से कानून-व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं के बीच की खाई को उजागर करता है। चंद मिनटों का जश्न एक मासूम की जिंदगी छीन गया। उम्मीद है कि सुभाष के परिवार को न्याय मिलेगा और आरोपी को कड़ी सजा होगी। यह घटना हर उस व्यक्ति के लिए आईना है जो जश्न के नाम पर कानून हाथ में लेने की सोचता है।

Written by M.A.Arif

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