Bijnor news : हरिद्वार हाईवे पर गैंगस्टर भाइयों के सील विवाह मंडप में भीषण आग, लेखपाल के आने पर बुझी लपटें

हरिद्वार हाईवे

हरिद्वार हाईवे पर शेरकोट के पास यह दृश्य गुरुवार शाम का है, जहां झाड़ियों में लगी आग ने हंगामा मचा दिया।

शेरकोट हरिद्वार हाईवे किनारे बंद पड़े विवाह मंडप में गुरुवार शाम लगी आग, दमकलकर्मी घंटे भर इंतजार करते रहे – संपत्ति 4 साल से गैंगस्टर एक्ट के तहत सील।

हरिद्वार हाईवे पर शेरकोट के पास गुरुवार शाम करीब 5 बजे एक सनसनीखेज घटना घटी। गैंगस्टर एक्ट के तहत चार साल से सील पड़े विवाह मंडप और स्पेयर पार्ट्स गोदाम में अचानक आग लग गई। यह संपत्ति पांच भाइयों – सरफराज अहमद, मोहम्मद शादाब, मोहम्मद फैजान, फहाद और जीशान – की है। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस और दमकल विभाग पहुंचा, लेकिन सीलिंग के चलते मेन गेट खोलकर अंदर नहीं जा सके। लगभग एक घंटे बाद लेखपाल छत्रपाल सिंह के पहुंचने पर दमकलकर्मी दीवार फांदकर अंदर घुसे और दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। यह घटना जिला प्रशासन की सीलिंग प्रक्रिया और इमरजेंसी रिस्पॉन्स पर सवाल खड़े कर रही है।


घटना का पूरा विवरण

यह विवाह मंडप जैन पेट्रोल पंप के पास पाल मुहल्ला नौधना में स्थित है, जो हाईवे किनारे करीब दो बीघा जमीन पर फैला है। चार साल से बंद होने के कारण यहां बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई थीं। गुरुवार शाम अचानक आग की लपटें भड़क उठीं – संभवतः झाड़ियों से शुरू होकर कमरों और स्टोर तक फैल गई। दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन गैंगस्टर एक्ट के तहत लगी सील के कारण मेन गेट और अंदर के कमरों को नहीं खोल सके। पुलिस ने तहसील प्रशासन को सूचना दी।

लेखपाल छत्रपाल सिंह करीब एक घंटे बाद आए, जिन्होंने औपचारिक अनुमति देकर दमकल टीम को दीवार फांदने की मंजूरी दी। दमकलकर्मियों ने बहादुरी से आग बुझाई, लेकिन तब तक करीब दो घंटे गुजर चुके थे। संपत्ति मालिक फहाद और शादाब भी现场 पहुंचे, लेकिन वे भी अंदर नहीं घुस सके। आग का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं – शायद शॉर्ट सर्किट या किसी की लापरवाही, लेकिन जांच चल रही है। यह घटना दिखाती है कि सील संपत्तियों में आग जैसी इमरजेंसी में कितनी देरी हो सकती है।


प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के बयान

संपत्ति मालिक फहाद ने बताया, “चार मई 2025 को भी यहां आग लगी थी। हमने तहरीर दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज फिर वही दर्द – हम बाहर खड़े देखते रहे।” उनके भाई शादाब ने कहा, “गैंगस्टर के केस में सील तो ठीक, लेकिन आग लगने पर भी इंतजार? ये न्यायपूर्ण नहीं।”

लेखपाल छत्रपाल सिंह ने स्पष्ट किया, “गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति सील है, इसलिए दमकलकर्मी बिना अनुमति अंदर नहीं जा सकते। हमने तुरंत इजाजत दी, लेकिन प्रक्रिया का पालन जरूरी है।” दमकल विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “सील वाली जगहों पर ऐसी दिक्कतें आम हैं। हमें प्रशासनिक मंजूरी का इंतजार करना पड़ता है, जो कभी-कभी घातक साबित होता है।”


पृष्ठभूमि और समयरेखा

यह मामला 2022 से जुड़ा है। पांच भाइयों – सरफराज अहमद, मोहम्मद शादाब, मोहम्मद फैजान, फहाद और जीशान – पर रुपयों के लेन-देन में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ। जिलाधिकारी के आदेश पर सरफराज, शादाब और फैजान पर गैंगस्टर एक्ट लगा, जिसके तहत यह विवाह मंडप और स्पेयर पार्ट्स गोदाम सील कर दिया गया। बाकी दो भाइयों फहाद और जीशान की भी संपत्ति में हिस्सा है।

समयरेखा:

  • 2022: धोखाधड़ी केस दर्ज, गैंगस्टर एक्ट लागू, संपत्ति सील।

  • चार मई 2025: पहली बार आग लगी, तहरीर दी गई।

  • गुरुवार, मई 2026: शाम 5 बजे आग लगी।

  • शाम 6 बजे: दमकल और पुलिस पहुंची, लेकिन इंतजार।

  • शाम 7 बजे: लेखपाल पहुंचे, दीवार फांदी।

  • शाम 9 बजे: आग पर काबू।

चार साल से बंद यह जगह अब खंडहर जैसी हो चुकी है – झाड़ियां, जंग लगे वाहन स्पेयर पार्ट्स। मोटर एक्ट का उल्लंघन भी सीलिंग का कारण बना। भाइयों का दावा है कि वे निर्दोष हैं और कोर्ट में अपील लंबित है।


Also read : iQOO Neo 10 Gets Stylish Alpine White and Asphalt Black Colours in India

यह क्यों मायने रखता है

 

यह घटना सिर्फ एक आग की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों को उजागर करती है। सील संपत्तियों में आग लगने पर दमकल जैसी लाइफ-सेविंग सर्विस भी बंधी रहती है – नतीजा? देरी से नुकसान बढ़ता है। स्थानीय लोग हाईवे पर ट्रैफिक और धुआं देखकर डर गए। समाज के लिए ये चेतावनी है: कानून का सख्ती तो ठीक, लेकिन इमरजेंसी में फ्लेक्सिबिलिटी क्यों नहीं? अगर समय पर कंट्रोल न होता, तो हाईवे पर बड़ा हादसा हो सकता था। संपत्ति मालिकों के लिए आर्थिक झटका, और प्रशासन के लिए प्रक्रिया पर सवाल। Yeh issue kaafi important hai क्योंकि ऐसे केस बढ़ रहे हैं उत्तर प्रदेश में।


भारत का दृष्टिकोण

 

भारत के सबसे बड़े राज्य यूपी में गैंगस्टर एक्ट अपराधियों की कमर तोड़ने का हथियार है, लेकिन ग्राउंड पर चुनौतियां बरकरार। हरिद्वार हाईवे जैसे व्यस्त रूट्स पर ऐसी घटनाएं ट्रैवलर्स को असुरक्षित महसूस कराती हैं। चंदपुर, मेरठ जैसे जिलों में समान केस देखे गए – सील फैक्टरियां, मंडप जलते रहे। Local audience के लिए ये relevant है क्योंकि हाईवे पर रोज हजारों गाड़ियां गुजरती हैं। Hinglish में कहें तो, “Bhai, yeh sealing ka chakkar emergency mein dikkat deta hai – jaldi solution chahiye!” यूपी सरकार को SOP बनानी चाहिए ताकि आग-पानी जैसी सेवाएं बाधित न हों।


विशेषज्ञ विश्लेषण

यूपी में गैंगस्टर केस 2022 से 500% बढ़े, सीलिंग 10,000+ संपत्तियां। समस्या? प्रशासनिक देरी – लेखपाल का इंतजार घातक। मेरा ओपिनियन: डिजिटल लॉक सिस्टम या ऑन-कॉल अथॉरिटी से सुधार हो सकता। ये केस दिखाता है कि कानून vs इमरजेंसी में बैलेंस जरूरी। मीडिया को ऐसे लोकल इश्यूज उठाने चाहिए, वरना जनता भुगतेगी। Logical insight: अगर आग हाईवे तक फैलती, तो ट्रैफिक जाम और हादसे निश्चित।


आगे क्या?

 
  • जांच: पुलिस आग के कारण की तफ्तीश करेगी – शायद शरारत या नेग्लिजेंस।

  • अपील: भाई जिला प्रशासन से सील खोलने की गुहार लगाएंगे, कोर्ट में केस तेज होगा।

  • प्रशासनिक बदलाव: तहसील में इमरजेंसी प्रोटोकॉल पर मीटिंग संभव, SOP अपडेट।

  • स्थानीय प्रभाव: हाईवे सेफ्टी चेक बढ़ सकता है। अगर दोबारा आग लगी, तो बड़ा कंट्रोवर्सी।
    महीनों में फैसला आ सकता है, लेकिन तब तक संपत्ति खंडहर बनी रहेगी।


निष्कर्ष

हरिद्वार हाईवे पर सील विवाह मंडप की आग ने गैंगस्टर एक्ट की सख्ती और इमरजेंसी रिस्पॉन्स के बीच गैप दिखा दिया। चार साल पुराना केस, दोबारा आग – ये चक्र टूटना चाहिए। स्थानीयों, ट्रैवलर्स और अधिकारियों सबके लिए ये wake-up call है। कानून मजबूत हो, लेकिन जीवन रक्षा पहले। यूपी जैसे राज्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए तुरंत सुधार जरूरी। आखिरकार, न्याय देरी से नहीं, इंसाफ से मिलता है।This story also cover by  Dainik Bhasker


Written by M.A.Arif

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *