योगी आदित्यनाथ : “काले कर्मों से राजमहल सजाने वाले कलंक बन जाते हैं” महिला आरक्षण पर योगी का विपक्ष पर तीखा हमला

विधानमंडल के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के ‘दोहरे चरित्र’ को आड़े हाथों लिया; नारी शक्ति वंदन अधिनियम को आधी आबादी के लिए ऐतिहासिक करार दिया।

योगी आदित्यनाथ

विधानमंडल के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को विधानमंडल के विशेष सत्र में विपक्षी दलों, विशेषकर सपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा, “जो लोग अपने काले कर्मों से राजमहल सजाते हैं, वही इतिहास में कलंक बनकर रह जाते हैं।” उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे संसद में महिला आरक्षण का विरोध करते हैं और राज्य में इसका समर्थन करने का नाटक कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष का यह गिरगिट जैसा रंग बदलना देखकर गिरगिट भी शरमा जाएगा। उन्होंने इस सत्र को प्रदेश की ‘आधी आबादी’ को समर्पित बताया और कहा कि यह बिल महिलाओं को उनका उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सम्मान दिलाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।


सत्ता का दोहरा चरित्र: विपक्ष पर हमला

योगी आदित्यनाथ ने अपने 45 मिनट के ओजस्वी भाषण में विपक्ष के इतिहास और आचरण की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने 1995 के कुख्यात ‘गेस्ट हाउस कांड’ का जिक्र करते हुए सपा को घेरा। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे उस समय भाजपा के दिवंगत नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक दलित महिला मुख्यमंत्री की सुरक्षा सुनिश्चित की थी, जबकि उस समय की सरकार का नैतिक दायित्व उन्हें बचाना था। इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस के ‘शाह बानो प्रकरण’ को याद दिलाकर उनके महिला विरोधी इतिहास पर सवाल खड़े किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये दल हर उस प्रगतिशील योजना का विरोध करते रहे हैं, जो महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ी रही है।


सशक्तिकरण की नई गाथा

मुख्यमंत्री ने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना ही राष्ट्र निर्माण का मूल मंत्र है। उन्होंने कहा:

  • स्वच्छ भारत मिशन: शौचालय केवल सुविधा नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा का प्रश्न था। सपा शासन में महिलाओं को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ता था, जहां उन्हें शोहदों की फब्तियों का सामना करना पड़ता था।

  • प्रधानमंत्री आवास योजना: प्रदेश में 65 लाख से अधिक आवास दिए गए, जिनमें से अधिकांश महिलाओं के नाम पर हैं, जो उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाता है।

  • जनधन योजना: सीधे खातों में पैसा पहुंचने से बिचौलियों और भ्रष्टाचार का अंत हुआ, जिससे महिलाओं को सीधा लाभ मिला।

यह क्यों मायने रखता है

यह सत्र और मुख्यमंत्री का यह रुख राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में, जहां महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण हमेशा चुनावी मुद्दे रहे हैं, वहां इस तरह के बिल पर तीखी बहस दर्शाती है कि आने वाले समय में महिलाओं का वोट बैंक और उनकी भागीदारी सरकारें तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ केवल आरक्षण नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान की एक बड़ी लड़ाई है।


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भारत का दृष्टिकोण

भारत के संदर्भ में, राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने से नीति-निर्धारण में महिलाओं की प्रभावी भूमिका सुनिश्चित होगी। योगी आदित्यनाथ का यह बयान इस बात पर जोर देता है कि सशक्तिकरण केवल नारों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए। विपक्ष का दोहरा रुख, जो संसद में अलग और विधानसभा में अलग दिखता है, इस बात का प्रमाण है कि भारत की राजनीति में ‘महिला शक्ति’ अब एक अनिवार्य केंद्र बन चुकी है।


विशेषज्ञ विश्लेषण

एक न्यूज राइटर के तौर पर मेरा मानना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान ‘पॉलिटिकल माइलेज’ और ‘सामाजिक संदेश’ का एक बेहतरीन मिश्रण है। “काले कर्मों से राजमहल सजाने वाले” जैसा जुमला सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए पर्याप्त है। यह विपक्ष को बैकफुट पर लाने और भाजपा की ‘महिला समर्थक’ छवि को और पुख्ता करने की एक सोची-समझी रणनीति है।


निष्कर्ष

योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है। इतिहास के पन्नों को कुरेदकर विपक्ष के कृत्यों को जनता के सामने लाने की यह कवायद यह बताने के लिए काफी है कि चुनाव का आगामी दौर केवल विकास के नहीं, बल्कि ‘इतिहास और चरित्र’ के इर्द-गिर्द घूमने वाला है।|This  story is Also covered by Zeenews


Written by M.A.Arif

 
 
 

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