Bijnor News : 800 बीघा सरकारी जमीन
संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने सिंचाई और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम बनाकर जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
जिला प्रशासन ने सरकारी भूमि पर कथित कब्जे और उस पर गेहूं की फसल काटे जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। शिकायत मिलने के बाद डीएम ने सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम बनाकर जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है मामला
शिकायत में कहा गया कि मरिय गांव के जंगल में करीब 800 बीघा सरकारी भूमि पर कुछ लोगों ने गेहूं की फसल बोई थी और अब उसकी कटाई कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने संपूर्ण समाधान दिवस में यह मामला उठाया और जांच कर कार्रवाई की मांग की।
बताया गया कि शिकायत पर मौजूद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इसके बाद डीएम ने राजस्व और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम गठित करने के निर्देश दिए, ताकि यह साफ हो सके कि जमीन किस विभाग की है और वहां किसने कब्जा किया है।
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जांच क्यों जरूरी है
यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि सरकारी जमीन पर खेती करना और फिर फसल काटना, दोनों ही अवैध कब्जे की ओर इशारा करते हैं। अगर शिकायत सही पाई जाती है, तो यह सिर्फ अतिक्रमण नहीं बल्कि बड़ी प्रशासनिक लापरवाही भी मानी जाएगी।
राजस्व विभाग को जमीन की स्थिति स्पष्ट करनी होगी, जबकि सिंचाई विभाग को यह बताना होगा कि भूमि वास्तव में उसकी है या नहीं। अगर दोनों विभागों के रिकॉर्ड में अंतर मिला, तो आगे बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
संपूर्ण समाधान दिवस में गुस्सा
शिकायतकर्ता ने संपूर्ण समाधान दिवस में रोष जताते हुए कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा करके फसल बोई गई और अब उसे काटा जा रहा है। इस पर अधिकारियों ने तत्काल जांच के आदेश दिए।
संपूर्ण समाधान दिवस में मौजूद अधिकारियों ने भी यह माना कि बिना जांच के ऐसी स्थिति पर जवाब देना मुश्किल है। इसी वजह से संयुक्त टीम बनाकर मौके की पड़ताल कराने का फैसला लिया गया।
प्रशासन का रुख
डीएम ने साफ निर्देश दिए हैं कि हर शिकायत का निस्तारण करने से पहले शिकायतकर्ता को संतुष्ट किया जाए। यह भी कहा गया कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि मौके पर जाकर हकीकत जांचनी होगी।
अब प्रशासन की टीम यह देखेगी कि जमीन सरकारी है या नहीं, उस पर किसका कब्जा है, और गेहूं की फसल किसने बोई। अगर अवैध कब्जा साबित होता है, तो कार्रवाई तय मानी जा रही है।
पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। कई जिलों में भू-माफिया लंबे समय तक सरकारी जमीन पर खेती करते रहे हैं, और बाद में प्रशासन ने कार्रवाई कर जमीन खाली कराई है।
ऐसे मामलों में अक्सर शुरुआत शिकायत से होती है और फिर राजस्व अभिलेख, नक्शा, खसरा-खतौनी और मौके की स्थिति की जांच की जाती है। यही प्रक्रिया इस मामले में भी अपनाई जाएगी।
स्थानीय असर
इस तरह की शिकायतें गांव और तहसील स्तर पर काफी गंभीर मानी जाती हैं, क्योंकि सरकारी जमीन का सीधा संबंध सार्वजनिक हित से होता है। अगर 800 बीघा जमीन पर अवैध खेती हुई है, तो यह बहुत बड़ा मामला है।
स्थानीय लोगों के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि सरकारी जमीन का उपयोग स्कूल, तालाब, रास्ता, चारागाह या अन्य सार्वजनिक कामों में हो सकता है। ऐसे में कब्जा सीधे गांव की जरूरतों को प्रभावित करता है।Story Also cover by Amar Ujala
आगे क्या
अब संयुक्त टीम मौके पर जाकर जांच करेगी और रिपोर्ट देगी। उसके बाद तय होगा कि जमीन पर कब्जा हटाना है या नहीं, और क्या किसी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अगर जांच में भू-माफिया की भूमिका साबित होती है, तो प्रशासन फसल जब्त करने, कब्जा हटाने और संबंधित लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराने तक जा सकता है।
निष्कर्ष
यह मामला सरकारी जमीन पर कब्जे और अवैध खेती की गंभीरता को दिखाता है। शिकायत पर प्रशासन ने तुरंत संयुक्त जांच टीम बनाई है, जो अब पूरी सच्चाई सामने लाएगी।
Written by M.A.Arif


