Student bus accident
परीक्षा देकर घर लौट रही 19 वर्षीय बीए छात्रा निजी बस के चालक की लापरवाही से कुचल गई। गुस्साए ग्रामीणों ने शव सड़क पर रखकर जाम लगाया, अफसरों से नोकझोंक।
निजी बस की लापरवाही से हुई छात्रा की मौत
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के पहासू थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। करौरा गांव निवासी 19 वर्षीय सोनम, जो एनआरईसी कालेज खुर्जा में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा थी, अपनी परीक्षा देकर निजी बस से घर लौट रही थी। दोपहर करीब 1:30 बजे जब बस करौरा के निकट पहुंची, तो सोनम अगले दरवाजे से उतरने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन चालक ने बिना इंतजार किए बस चला दी।
छात्रा सड़क पर गिर पड़ी और बस के पिछले पहिये के नीचे आ गई – मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। हादसे की खबर फैलते ही स्वजन, ग्रामीण एकत्र हो गए। गुस्से में उन्होंने सोनम का शव सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। सीओ विकास प्रताप सिंह, एसडीएम प्रतीक्षा पांडेय समेत भारी पुलिस बल पहुंचा, लेकिन 2.5 घंटे तक नोकझोंक चली। अधिकारियों के आश्वासनों पर शाम 4 बजे जाम खोला गया। चालक और पारिचालक फरार हैं। ये घटना निजी बस संचालन की घोर लापरवाही को बेनकाब करती है, जहां हर दिन सैकड़ों जिंदगियां खतरे में हैं।
छात्रा की मौत कैसे और क्यों हुई?
सोनम का दिन सामान्य था। सोमवार सुबह वह करौरा से खुर्जा के एनआरईसी कालेज परीक्षा देने निकलीं। दोपहर 1 बजे पेपर समाप्त होने पर वह निजी बस में सवार होकर गांव लौटने लगीं। बस में भीड़ थी, चालक स्पीड में था। करौरा गांव के पास बस थोड़ी रुकी। गवाहों ने बताया, “सोनम अगले दरवाजे से उतर ही रही थीं। दरवाजा ठीक से खुला न था, चालक ने हॉर्न भी नहीं बजाया और अचानक गाड़ी चला दी।” छात्रा फिसलकर नीचे गिर गईं और भारी पिछले पहिये ने उन्हें कुचल दिया। मौत तत्काल हो गई – कोई मौका चीखने का भी न मिला।
हादसे के बाद चालक बस लेकर भागा। लोकल पुलिसकर्मियों ने पीछा किया और बिजलीघर के पास बस को काबू में लिया, लेकिन चालक व पारिचालक अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। सोनम का शव सड़क पर पड़ा रहा। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पाया गया – मल्टीपल फ्रैक्चर, सिर व छाती पर गंभीर चोटें, आंतरिक रक्तस्राव। क्यों हुई ये लापरवाही? निजी बसें अक्सर ओवरलोडेड चलती हैं, चालक ट्रेनिंग की कमी, दरवाजे चेक न करना। उत्तर प्रदेश में 2025 में 5,000 से ज्यादा सड़क हादसे हुए, जिनमें 30 प्रतिशत पैसेंजर से जुड़े थे। पहासू थाने में IPC धारा 304A (लापरवाही से मौत), 279 (लापरवाह ड्राइविंग) के तहत मुकदमा दर्ज। पुलिस मंगलवार को manhunt चला रही है।
बयान और प्रतिक्रियाएं
सोनम के पिता रामस्वरूप ने रोते हुए कहा, “मेरी इकलौती बेटी थी। पढ़-लिखकर परिवार का सहारा बनती। चालक को फांसी की सजा दो, वरना न्याय नहीं लेंगे।” भाई ने आरोप लगाया, “बस ओवरलोडेड थी, चालक नशे में था शायद।” ग्रामीण नेता रामू ने बोला, “निजी बसों के लाइसेंस रद्द करो। रोज ये हादसे हो रहे।”
सीओ विकास प्रताप सिंह ने जासं को बताया, “चालक-पारिचालक की तलाश तेज। FIR दर्ज, वाहन सीज। परिवार को हर संभव मदद।” एसडीएम प्रतीक्षा पांडेय बोलीं, “मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 लाख मुआवजा दिलवाएंगे। जांच पूरी होने पर कार्रवाई।” सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ प्रो. अनिल शर्मा ने कहा, “बसों में CCTV, स्पीड लिमिटर, ड्राइवर साप्ताहिक चेकअप जरूरी। ये preventable था।” स्थानीय MLA ने ट्वीट किया, “दुखद। दोषी को सख्त सजा, बस स्टैंड पर सुरक्षा बढ़ाएंगे।”
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पृष्ठभूमि और टाइमलाइन
बुलंदशहर जिला NH-91 पर हादसों का हॉटस्पॉट है। 2025 में 20 से ज्यादा छात्र-छात्राओं की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई। करौरा जैसे ग्रामीण इलाकों में निजी बसें एकमात्र साधन, लेकिन लाइसेंस उल्लंघन आम। पिछले महीने भी पहासू में एक स्कूल बस हादसा हुआ था।
टाइमलाइन:
सोमवार सुबह 8 बजे: सोनम घर से कालेज रवाना।
दोपहर 1 बजे: परीक्षा समाप्त, बस में सवार।
1:30 बजे: करौरा के पास हादसा, मौत।
1:45 बजे: जाम शुरू, बस जब्त।
2 से 4 बजे: अफसरों से नोकझोंक, रूट डायवर्ट।
4 बजे: आश्वासन पर जाम समाप्त।
मंगलवार: पोस्टमॉर्टम, चालक तलाश।
यह क्यों मायने रखता है
ये सिर्फ सोनम की मौत नहीं, हजारों छात्राओं की सुरक्षा का सवाल। ग्रामीण भारत में लड़कियां शिक्षा के लिए बसों पर निर्भर, लेकिन लापरवाही जानलेवा। परिवार बर्बाद, गांव शोक में। समाज पर असर – पढ़ाई छूटेगी, महिलाएं घरबंद। अर्थव्यवस्था को नुकसान – नई पीढ़ी खराब। सड़क हादसे भारत में सालाना 1.5 लाख मौतें लेते हैं। Yeh issue national emergency hai।Story Also Covered by Amar Ujala
स्थानीय पहलू
पहासू, करौरा, चंदपुर जैसे इलाकों में डर का माहौल। “Ab betiyan college kaise jayengi?” निजी बसें जान हैं, लेकिन मौत बांट रही। UP सरकार ई-बस ला रही, लेकिन rural routes ignore। स्थानीय मांग: DM से 10 लाख मुआवजा, चालक गिरफ्तारी, बस स्टैंड CCTV। Hinglish mein: “Yeh bus drivers ko license hi mat do, jaan ja rahi hai logon ki.” बुलंदशहर DM से जल्द मीटिंग की उम्मीद।
आगे क्या?
चालक-पारिचालक 48 घंटे में गिरफ्तार संभव। कोर्ट चार्जशीट 15 दिन में। परिवार हाईकोर्ट जाए compensation के लिए। सरकार: नई गाइडलाइंस – बसों में CCTV, ड्राइवर टेस्ट। अगर जाम दोहराए, तो क्षेत्रीय बैंड। लॉन्ग टर्म: ग्रामीण बस फ्लीट अपग्रेड, awareness कैंपेन।
निष्कर्ष
सोनम की मौत लापरवाही का क्रूर चेहरा। जाम ने पीड़ा की गूंज फैलाई, लेकिन न्याय बाकी। सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दो – परिवार को इंसाफ, बसों को जिम्मेदारी। ये एक जिंदगी नहीं, पूरे सिस्टम की नाकामी है। कल फिर कोई सोनम न बने।
Written by M.A.Arif


