1 मई 2026 से कमर्शियल गैस एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹993 की भारी बढ़ोतरी की गई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर महंगाई का बड़ा बोझ पड़ा है ।
कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की नई कीमतों का पोस्टर
देश की तीनों सरकारी तेल कंपनियां – इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) – ने 1 मई 2026 से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में रिकॉर्ड 993 रुपये प्रति 19 किलो सिलेंडर की बढ़ोतरी कर दी है। दिल्ली में अब 19 किलो का सिलेंडर 2,078.50 रुपये से बढ़कर 3,071.50 रुपये का हो गया है। यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल के चलते की गई है, जबकि घरेलू रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है।
यह क्यों और कैसे हुआ?
यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी कीमतों के लगातार बढ़ने का सीधा नतीजा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा लागत आसमान छू रही है। कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो चार साल के उच्चतम स्तर पर हैं।
तेल कंपनियां हर महीने लागत के आधार पर कीमतें संशोधित करती हैं। मार्च में 114.50 रुपये, अप्रैल में 195.50 रुपये की बढ़ोतरी के बाद मई में यह तीसरी लगातार वृद्धि है, कुल मिलाकर 1,303 रुपये का इजाफा। भारत 85% एलपीजी आयात करता है, इसलिए वैश्विक उतार-चढ़ाव का असर सीधा पड़ता है।
उद्धरण और कथन
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा, “कहने के लिए कमर्शियल सिलेंडरों के दाम बढ़े हैं, लेकिन होटल मालिक अब ग्राहकों से ही वसूल लेंगे। चुनाव खत्म होते ही डेढ़ गुना दाम बढ़ गए, इसका असर आम जनता पर पड़ेगा।”
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा बोले, “अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर भारत का नियंत्रण नहीं। दाम बढ़ रहे हैं, सबको सामना करना पड़ेगा।” IOCL ने बयान जारी कर कहा कि पेट्रोल-डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतें स्थिर रखी गई हैं, लेकिन नुकसान हो रहा है।
पृष्ठभूमि और समय-सीमा
कमर्शियल एलपीजी कीमतें 2008 से लगातार बढ़ रही हैं – 658 रुपये से अब 3,000 पार। हालिया टाइमलाइन:
मार्च 1, 2026: 114.50 रुपये बढ़ोतरी।
अप्रैल 1, 2026: 195.50 रुपये और बढ़े।
मई 1, 2026: रिकॉर्ड 993 रुपये का हाइक, कुल 1,303 रुपये।
पश्चिम रशिया संघर्ष और अब मिडिल ईस्ट टेंशन से सप्लाई चेन बाधित। भारत होज मार्ग पर 20% निर्भर, जो अब रुक गया है। इससे पहले मार्च 2020 में एलपीजी किल्लत से श्रमिक गांव लौटे थे।
यह क्यों मायने रखता है
यह बढ़ोतरी होटल, रेस्टोरेंट, स्ट्रीट फूड वेंडर्स और छोटे व्यापारियों पर भारी बोझ डालेगी। गैस लागत बढ़ने से भोजन की कीमतें 10-20% तक महंगी हो सकती हैं। उद्योग जगत प्रभावित, खासकर जहां गैस मुख्य ईंधन है। आम उपभोक्ता को बाहर खाना अब महंगा पड़ेगा।
भारत का दृष्टिकोण
भारत में करोड़ों छोटे कारोबारी इस पर निर्भर हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में चाय-समोसे की दुकानों से लेकर ढाबों तक, yeh issue kaafi important hai। ग्रामीण इलाकों में जहां बिजली कम है, गैस पर ज्यादा बोझ। पश्चिम बंगाल चुनाव खत्म होते ही यह ऐलान, महंगाई का राजनीतिक रंग भी।
विश्लेषण
वैश्विक अस्थिरता से भारत की ऊर्जा निर्भरता उजागर हो रही। सरकार ने घरेलू सिलेंडर बचाए, लेकिन कमर्शियल पर मार। लॉजिकल देखें तो, अगर कच्चा तेल 110 डॉलर से ऊपर रहा तो खुदरा दाम भी बढ़ेंगे। उद्योग चैंबर ने पहले ही सरकार से राहत की मांग की थी।
आगे क्या?
निकट भविष्य में पेट्रोल-डीजल 25-28 रुपये प्रति लीटर महंगे हो सकते हैं। सरकारी सूत्रों ने इनकार नहीं किया। ATF और थोक डीजल भी बढ़े हैं। अगर संघर्ष लंबा चला तो भोजन, ट्रांसपोर्ट सब महंगा। सरकार सब्सिडी या वैकल्पिक ईंधन पर फोकस कर सकती है।|This story Also cover by Dainik jagran
निष्कर्ष
कमर्शियल गैस सिलेंडर पर 993 रुपये की रिकॉर्ड बढ़ोतरी महंगाई की नई लहर ला रही है। व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित, पेट्रोल-डीजल पर भी खतरा। भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर देना होगा, वरना आम आदमी का बजट बिगड़ेगा। Yeh samay sambhalne ka hai।
Written by M.A.Arif


