Siddharthnagar : सिद्धार्थनगर टंकी 16 घंटे बाद वायुसेना के हेलीकॉप्टर से दो किशोरों का सुरक्षित रेस्क्यू, एक बच्चे की मौत

सिद्धार्थनगर रील बनाने के लिए पानी की टंकी पर चढ़े पांच किशोरों में से तीन नीचे गिर गए, एक की मौत हो गई और दो किशोर 16 घंटे तक टंकी पर फंसे रहे। रविवार सुबह भारतीय वायुसेना के Mi-17 हेलीकॉप्टर ने दोनों को सुरक्षित निकाल लिया।

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर की कांशीराम कॉलोनी में जर्जर पानी की टंकी पर फंसे किशोरों को वायुसेना के हेलीकॉप्टर से सुरक्षित नीचे उतारते बचाव दल के जवान।

शनिवार का दिन सिद्धार्थनगर के लोगों के लिए कभी न भूलने वाला बन गया। एक तरफ खुशी थी कि दो बच्चों की जान बच गई, लेकिन दूसरी तरफ एक मासूम की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।

कांशीराम आवासीय कॉलोनी की पुरानी पानी की टंकी पर पांच किशोर सिर्फ एक “रील” बनाने के लिए चढ़ गए थे। शायद उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही मिनटों में ये मज़ाक जानलेवा हादसे में बदल जाएगा।


हादसा कैसे हुआ

शनिवार दोपहर करीब 1:30 बजे ये पांचों बच्चे टंकी पर चढ़े। नीचे उतरते वक्त सभी एक साथ सीढ़ी पर आ गए। टंकी का ढांचा पहले से ही कमजोर था—और अचानक सीढ़ी टूट गई।

तीन बच्चे नीचे गिर गए।

इनमें से एक, सिद्धार्थ, की मौके पर ही मौत हो गई। बाकी दो घायल हो गए। वहीं दो बच्चे ऊपर ही फंस गए—न नीचे उतर सकते थे, न किसी तरह खुद को बचा सकते थे।

यहीं से शुरू हुआ एक लंबा और तनाव भरा इंतज़ार।


रातभर चला संघर्ष

शाम होते-होते एनडीआरएफ की टीम गोरखपुर से पहुंची। लेकिन असली समस्या थी वहां तक पहुंचना।

टंकी के आसपास दलदली जमीन थी। कोई सीधा रास्ता नहीं था। टीम ने रास्ता बनाने की कोशिश की, लेकिन हर बार कोई न कोई तकनीकी दिक्कत आ रही थी।

पूरी रात कोशिश होती रही… लेकिन सफलता नहीं मिली।

समय बीत रहा था, और ऊपर फंसे दोनों बच्चों की हालत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही थी।


फिर आया टर्निंग पॉइंट

जब जमीन से बचाव मुश्किल हो गया, तब प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया—वायुसेना की मदद मांगी गई।

रविवार सुबह करीब 5:20 बजे हेलीकॉप्टर मौके पर पहुंचा।

और जो काम घंटों में नहीं हो पाया था, वो सिर्फ 9 मिनट में हो गया।

5:29 बजे तक दोनों बच्चों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।

यह पल वहां मौजूद हर शख्स के लिए राहत का था।


क्यों ये मामला अहम है

यह सिर्फ एक हादसा नहीं है।

यह एक चेतावनी है—हम सबके लिए।

आजकल सोशल मीडिया पर वायरल होने का दबाव खासकर किशोरों पर बहुत बढ़ गया है। एक “कूल वीडियो” बनाने के लिए बच्चे ऊंची इमारतों, रेलिंग, टंकियों और खतरनाक जगहों पर चढ़ जाते हैं।

लेकिन हकीकत ये है कि एक छोटी सी गलती जिंदगी बदल सकती है।


बड़ी समस्या: जर्जर ढांचे

इस घटना ने एक और गंभीर मुद्दा सामने रखा—पुरानी और असुरक्षित संरचनाएं।

देश के कई शहरों और कस्बों में ऐसी टंकियां, इमारतें और ढांचे बिना किसी सुरक्षा के खड़े हैं। कोई गार्ड नहीं, कोई बैरिकेड नहीं।

बच्चों के लिए ये “एडवेंचर स्पॉट” बन जाते हैं—जबकि असल में ये मौत का जाल होते हैं।


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आगे क्या होना चाहिए

अब सवाल यह है कि इससे सीखा क्या जाएगा?

  • क्या ऐसी जर्जर टंकियों को बंद किया जाएगा?
  • क्या बच्चों को जागरूक किया जाएगा?
  • क्या प्रशासन नियमित सुरक्षा जांच करेगा?

ये फैसले अब जरूरी हो गए हैं।|Also covered by Aaj Tak


 

अंत में

सिद्धार्थनगर का यह हादसा दर्दनाक भी है और सीख देने वाला भी। एक बच्चे की मौत ने पूरे मामले को गहरा दुख दिया, जबकि वायुसेना के तेज और सटीक बचाव ने दो जिंदगियां बचा लीं।
यह साफ संदेश देता है कि लापरवाही, जर्जर ढांचे और viral content की दौड़ मिलकर बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं।
अब जरूरत है कि प्रशासन भी सक्रिय रहे और परिवार भी बच्चों को ऐसे खतरनाक स्टंट से दूर रखें, क्योंकि सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।




Written by M.A.Arif 

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